The Lancet Study On Obesity 2026: हमारे देश की बड़ी आबादी मोटापे की समस्या से जूझ रही है। मोटापा शब्द का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले हृदय रोग या डायबिटीज का जोखिम दिमाग में चलने लगता है। हाल ही में 'द लैंसेट' में प्रकाशित फिनलैंड और यूके के 5.4 लाख लोगों पर किए गए एक बड़ी स्टडी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस अध्ययन के अनुसार मोटापा 925 प्रकार के गंभीर संक्रामक रोगों के खतरे को भी दबे पांव बढ़ा देता है।
Obesity Health: अकेले मोटापा इन गंभीर बीमारियों का बढ़ा देता है खतरा, ये स्टडी पढ़कर सन्न रह जाएंगे आप
Obesity Related Health Risks: मोटापा एक ऐसी समस्या है जिससे हमारे देश की एक बड़ी आबादी इससे परेशान है। ध्यान देने वाली बात यह है कि मोटापा अपने साथ कई तरह की बीमारियों को लेकर आती है। द लैसेंट ने इसी विषय पर एक स्टडी पब्लिश की है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
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फेफड़ों और रक्त प्रवाह पर पड़ता है बुरा असर
अध्ययन के मुताबिक, जैसे-जैसे शरीर का वजन बढ़ता है, उसका सबसे पहला असर फेफड़ों की कार्यक्षमता और खून के प्रवाह पर पड़ता है। अधिक वजन होने के कारण श्वसन तंत्र पर दबाव बढ़ता है, जिससे फेफड़े अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते। इसके चलते निमोनिया और इन्फ्लुएंजा जैसे श्वसन तंत्र के संक्रमणों का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। शरीर में ऑक्सीजन का सही प्रवाह न होना इन बीमारियों को और अधिक घातक बना देता है।
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बैक्टीरियल संक्रमण का बढ़ता जोखिम
अध्ययन में पाया गया है कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा स्वस्थ वजन वाले लोगों की तुलना में कहीं अधिक होता है। इनमें सेप्सिस (खून का संक्रमण), त्वचा और कोमल ऊतकों में होने वाले संक्रमण प्रमुख हैं। रक्त का संक्रमण यानी सेप्सिस एक जानलेवा स्थिति हो सकती है। बढ़ा हुआ वजन शरीर की कोशिकाओं को कमजोर करता है, जिससे बैक्टीरिया आसानी से शरीर के भीतर फैलने लगते हैं और अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
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मेटाबॉलिक गड़बड़ी और अन्य संक्रमण
वजन बढ़ने से शरीर के भीतर मेटाबॉलिक गड़बड़ी पैदा होती है, जो कीटाणुओं के पनपने के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करती है। इसके कारण मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। शरीर में मौजूद क्रॉनिक सूजन और मेटाबॉलिक असंतुलन बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने के बजाय उनके विकास में मदद करते हैं, जिससे सामान्य संक्रमण भी गंभीर रूप ले लेते हैं।
बचाव और जागरूकता ही समाधान
अध्ययन में एक और बड़ी बात बताई गई है कि मोटापा शरीर को एक 'प्रो-इंफ्लेमेटरी' अवस्था में डाल देता है, जिससे वैक्सीन का असर भी कम हो सकता है। मोटापे से निपटने के लिए केवल डाइट को सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे एक बीमारी मानकर चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए। अगर आपका वजन नियंत्रित है तो आप न सिर्फ पुरानी बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि अपनी इम्युनिटी को भी मजबूत कर सकते हैं। समय रहते जागना ही आपको इन 900 से अधिक घातक संक्रमणों से बचा सकता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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