कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिसका खतरा सभी उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ता जा रहा है। कुछ दशकों पहले कैंसर को उम्र बढ़ने के साथ या बुजुर्गों को होने वाली बीमारी के रूप में जाना जाता था, हालांकि अब बच्चे भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि हर साल अकेले भारत में 50 हजार बच्चे कैंसर का शिकार हो रहे हैं, बच्चों में कुछ खास तरह के कैंसर के मामले ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं।
GIST Cancer: इस दुर्लभ कैंसर को लेकर विशेषज्ञों ने किया सावधान, जानिए क्या हैं इसके लक्षण और कैसे पहचानें
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर एक दुर्लभ और गंभीर प्रकार का कैंसर है, जो पाचन तंत्र में होता है। चूंकि इसके मामले बहुत कम होते हैं, इसलिए इसके लक्षणों और कारणों को लेकर आम लोगों में जागरूकता भी कम देखी जाती है। आइए इसके बारे में जानते हैं...
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामले
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर एक दुर्लभ लेकिन गंभीर प्रकार का कैंसर है, ये पाचन तंत्र में विकसित होता है। यह कैंसर आमतौर पर पेट और छोटी आंत में होता है। हालांकि कुछ मामलों में यह भोजन नली, बड़ी आंत या मलाशय में भी हो सकता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामले बहुत कम होते हैं और ये अक्सर धीरे-धीरे बढ़ने वाला कैंसर है। जेनेटिक म्यूटेशन को इस कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है।
- जीआईएसटी कैंसर वाले ट्यूमर होते हैं। ये एक तरह के सॉफ्ट टिशू सारकोमा होते हैं।
- ट्यूमर आमतौर पर आपके पेट या छोटी आंत में आपके गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में बनते हैं।
- कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर एक इंच से भी छोटे हो सकते हैं। इस तरह के ट्यूमर के आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते हैं।
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर की क्या पहचान है?
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर और इसके कैंसर में हर बार लक्षण हों ये जरूरी नहीं है। कई बार लोगों को इसका तब पता चलता है कि जब वे किसी और वजह से टेस्ट या सर्जरी करवाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पेट से संबंधित कुछ लक्षणों को लेकर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए ताकि समय रहते इसकी पहचान हो सके।
- अक्सर पेट में दर्द रहना या शौच के साथ खून आना।
- अक्सर कब्ज और थकान की दिक्कत होते रहना।
- बिना कोशिश किए वजन कम होना
- भूख न लगना या खाने की इच्छा न होना।
- उल्टी के साथ खून आने की समस्या होना।
क्या है इस कैंसर की वजह?
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर वाले कैंसर का सबसे बड़ा कारण जेनेटिक म्यूटेशन माना जाता है। ज्यादातर मामलों में KIT या PDGFRA जीन में बदलाव के कारण कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यह म्यूटेशन आमतौर पर जन्म के समय नहीं होता, बाद के दिनों में ये विकसित हो सकता है। इसलिए अधिकतर मामलों में इसे वंशानुगत कैंसर नहीं माना जाता।
- जीआईएसटी कैंसर का खतरा आमतौर पर 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा देखा जाता है।
- पुरुषों और महिलाओं दोनों में इसका जोखिम लगभग समान होता है।
- कुछ दुर्लभ जेनेटिक सिंड्रोम, जैसे न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप-1 से ग्रसित लोगों में ट्यूमर और कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है।
- इसके अलावा जिन लोगों में पहले किसी प्रकार का ट्यूमर रहा हो या जिनकी इम्यून सिस्टम कमजोर हो, उनमें भी जोखिम अधिक हो सकता है।
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर से बचने के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर को आम तौर पर रोका नहीं जा सकता क्योंकि ये पर्यावरणीय या लाइफस्टाइल फैक्टर्स के बजाय जेनेटिक म्यूटेशन की वजह से होते हैं।
अब तक इससे बचाव के लिए कोई पुख्ता तरीका नहीं खोजा जा सका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हेल्दी लाइफस्टाइल जैसे पौष्टिक आहार, व्यायाम और स्मोकिंग से दूरी बनाकर रखना आपके कैंसर को जोखिमों को कम करने और इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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