लाइफस्टाइल की गड़बड़ी को दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर क्रॉनिक बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। हम जो कुछ खाते-पीते हैं, जिस तरह से दिनभर की दिनचर्या रहती है इन सबका सेहत पर सीधा असर होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सेंडेंटरी लाइफस्टाइल यानी लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियां कम होना सेहत के लिए बड़ी समस्याओं का कारण है।
ALert: क्या आप भी ऑफिस में 7-8 घंटे बैठे रहते हैं? तो जरूर पढ़ें ये रिपोर्ट, वरना बढ़ सकती है आपकी मुसीबत
शारीरिक निष्क्रियता दुनियाभर में होने वाली समय से पहले मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। जब शरीर लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहता है, तो खून का संचार प्रभावित हो जाता है, जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की सप्लाई प्रभावित होती है। आइए जानते हैं इसके और क्या-क्या नुकसान हैं?
शारीरिक निष्क्रियता और इसके खतरे
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, शारीरिक निष्क्रियता दुनिया भर में होने वाली समय से पहले मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। जब शरीर लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहता है, तो खून का संचार प्रभावित हो जाता है, जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की सप्लाई प्रभावित होती है। यही वजह है कि ऑफिस में काम करते समय छोटे-छोटे ब्रेक लेना सिर्फ आराम के लिए नहीं, बल्कि सेहत की सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है।
लगातार बैठे रहने से कैलोरी बर्न कम हो जाती है, जिससे शरीर में फैट जमा होने लगता है। लंबे समय तक बैठने वालों में टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज का जोखिम ज्यादा होता है, भले ही आप रोद व्यायाम क्यों न करते हों।
लंबे समय तक बैठे रहने के और क्या नुकसान हैं?
लंबे समय तक बैठे रहना आपकी सेहत को कई तरह से प्रभावित करने वाली हो सकती है।
- गलत पोस्चर में घंटों बैठना रीढ़ की हड्डी पर दबाव डालता है। इससे पीठ दर्द, सर्वाइकल पेन और कंधों में जकड़न की समस्या आम हो जाती है।
- लगातार बैठे रहने से शरीर का मेटाबॉलिक रेट कम होता है। इससे वजन बढ़ने और पेट के आसपास चर्बी जमा होने लगती है।
- शारीरिक गतिविधि की कमी का असर दिमाग पर भी पड़ता है। लंबे समय तक एक जगह बैठे रहने से तनाव, चिड़चिड़ापन और एंग्जायटी बढ़ सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर हो सकता है असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लगातार काम करते रहने से न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं इसलिए बीच में ब्रेक जरूरी है।
कई लोग काम के दबाव के कारण ब्रेक लेना भूल जाते हैं और लगातार देर तक काम करते रहते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं। कि लगातार काम करने की आदत मस्तिष्क के लिए अच्छी नहीं है, इससे शारीरिक के साथ-साथ मानसिक समस्याएं भी हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की साल 2000 से 2016 की ग्लोबल मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग हफ्ते में 55 घंटे से ज्यादा काम करते हैं, उन्हें मानसिक तनाव हो सकता है, हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है, स्टेस हार्मोन बढ़ने के कारण उनमें अनिद्रा की समस्या भी हो सकती है। जब दिमाग थक जाता है, तो चिड़चिड़ापन महसूस होता है, काम में मन नहीं लगता और तनाव महसूस होता है। यह समस्या समय के साथ एग्जाइटी डिसऑर्डर में बदल सकती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रदीप कुमार शैलत कहते हैं, 90 मिनट काम करें, फिर 20 मिनट का ब्रेक जरूर लें। ब्रेक में बाहर टहलें, गहरी सांस लें या फिर हल्का संगीत सुने इससे स्ट्रेस हार्मोन नहीं बढ़ते हैं और मोटिवेशन बना रहता है। लगातार काम करने से आप न खुद पर ध्यान दे पाते हैं, न सामाजिक संबंध बना पाते हैं और न ही आराम कर पाते हैं। इससे मन में नकारात्मक विचार आने लगते हैं और व्यक्ति तनाव या अवसाद का शिकार होने लगता है। ब्रेक की कमी से स्लीप पैटर्न भी खराब होने लगता है और मूड डिसआर्डर हो सकते हैं।
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