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Mobile Addiction Impact: स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से कैसे प्रभावित हो रही है हमारी याददाश्त और एकाग्रता

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Sun, 29 Jun 2025 01:35 PM IST
सार

आज के समय में अधिकतर लोगों के पास स्मार्टफोन है, और बहुत से लोग अपनी दिनचर्या का ज्यादातर हिस्सा फोन के स्क्रीन पर बिताते हैं। स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से इसका नकारात्मक प्रभाव हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए।

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How Excessive Smartphone Use Affects Memory and Concentration Know Impact
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Adobe Stock

Smartphone Mental Health: आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। हमारी जेब में समा जाने वाला यह छोटा सा उपकरण, हमारे जीवन को बेहद सुविधाजनक बनाता है। लेकिन, इस सुविधा का एक दूसरा पहलू भी है, इसका अत्यधिक उपयोग हमारी याददाश्त और एकाग्रता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।



कई स्टडी में सामने आया है कि स्मार्टफोन की लत, जिसे 'डिजिटल डिमेंशिया' भी कहा जाने लगा है, हमारे मस्तिष्क के कार्यों, विशेष रूप से स्मृति और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर नकारात्मक असर डाल रही है। लगातार नोटिफिकेशन्स, सोशल मीडिया फीड्स और बिना रुके जानकारी का अंबार हमारे दिमाग को हमेशा उत्तेजित रखता है, जिससे वास्तविक दुनिया में ध्यान केंद्रित कर पाना मुश्किल हो जाता है। आइए इस लेख में हम विस्तार से जानते हैं कि स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग हमारे याददाश्त और एकाग्रता को कैसे प्रभावित कर रहा है और इससे बचने के लिए हम क्या प्रभावी उपाय अपना सकते हैं।

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How Excessive Smartphone Use Affects Memory and Concentration Know Impact
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Adobe Stock

याददाश्त पर प्रभाव
स्मार्टफोन का अधिक उपयोग, विशेष रूप से सोशल मीडिया और निरंतर नोटिफिकेशन्स, हमारी अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मृति को कमजोर करता है। मस्तिष्क की जानकारी को संसाधित करने और संग्रहीत करने की क्षमता प्रभावित होती है, क्योंकि हम लगातार नई जानकारी के संपर्क में रहते हैं। उदाहरण के लिए, हर छोटी जानकारी के लिए गूगल पर बढ़ती निर्भरता के कारण हमारा मस्तिष्क स्वयं उसे याद रखने का प्रयास कम कर देता है, जिससे हमारी याददाश्त की क्षमता घटती जा रही है। शोध में पाया गया कि स्मार्टफोन की लत से हिप्पोकैम्पस, जो स्मृति के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क का हिस्सा है, कम सक्रिय हो जाता है।


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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik

एकाग्रता में कमी
स्मार्टफोन का बार-बार उपयोग हमारी एकाग्रता को प्रभावित करता है। मल्टीटास्किंग, जैसे काम के बीच में नोटिफिकेशन्स चेक करना, मस्तिष्क को लगातार विचलित करता है। इससे 'ध्यान अवधि' (अटेंशन स्पैन) कम होती है। एक अध्ययन के अनुसार, जो बार-बार फोन इस्तेमाल करता है, सभी नोटिफिकेशन चेक करता है या फोन को हमेशा पास में रखता है, उसकी गहन एकाग्रता यानी डीप फोकस की क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा, स्क्रीन टाइम से डोपामाइन का लेवल बढ़ता है, जो मस्तिष्क को तुरंत संतुष्टि की आदत डालता है, जिससे लंबे समय तक किसी कार्य पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है।


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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik

नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग, खासकर रात में, नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को कम करती है, जिससे इनसोम्निया की समस्या होती है। नींद की कमी सीधे याददाश्त और एकाग्रता को नुकसान पहुंचाती है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर अत्यधिक समय बिताने से तनाव और चिंता बढ़ती है, जो मस्तिष्क की कार्यक्षमता को और कमजोर करते हैं।

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फोन का अधिक इस्तेमाल - फोटो : Adobe Stock
बचाव के उपाय
स्मार्टफोन के दुष्प्रभावों से बचने के लिए डिजिटल डिटॉक्स जरूरी है। रोजाना स्क्रीन टाइम सीमित करें, जैसे दिन में ज्यादा से ज्यादा 1-2 घंटे ही फोन का इस्तेमाल करें। नोटिफिकेशन्स बंद करें, भोजन या पढ़ाई के दौरान फोन से दूरी बनाएं। ध्यान और योग जैसे अभ्यास एकाग्रता बढ़ाने में मदद करते हैं। रात में सोने से पहले फोन का उपयोग न करें और नीली रोशनी फिल्टर का उपयोग करें। किताबें पढ़ना और मस्तिष्क प्रशिक्षण खेल खेलना स्मृति को मजबूत करता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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