क्या आप भी स्मोकिंग करते हैं, कुछ दिनों से आपको कम दिखाई देने लगा है? नजरें धुंधली हो रही हैं और रात में गाड़ी चलाते समय दिकक्त होती है? अगर हां तो ये दिक्कतें आपकी खराब आदत की वजह से हो सकती है।
Health Alert: कहीं सिरगेट तो नहीं छीन रही आपके आंखों की रोशनी? स्मोकिंग करते हैं तो हो जाएं सावधान
सिगरेट के धुएं में हजारों रसायन होते हैं, जिनमें कई जहरीले और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाने वाले तत्व शामिल हैं। ये शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं, रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं और आंखों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कहीं आप भी तो धूम्रपान नहीं करते?
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धूम्रपान के कारण होने वाली दिक्कतें
अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान केवल फेफड़ों का ही नहीं, बल्कि नजर का भी दुश्मन माना जाता है। धूम्रपान करने वालों में गंभीर नेत्र रोगों का जोखिम धूम्रपान न करने वालों की तुलना में अधिक हो सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर धूम्रपान छोड़ने की सलाह देते हैं।
अगर आपको हाल के दिनों में कम दिखाई देना, रंग पहचानने में दिक्कत, आंखों में सूखापन, बार-बार जलन या धुंधलापन महसूस हो रहा है, तो इसे केवल थकान समझकर टालना ठीक नहीं।
ऐसी स्थिति में आंखों की जांच के साथ लाइफस्टाइल पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
सिगरेट आंखों पर कैसे असर करती है?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि धूम्रपान शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ाती है, जिससे आंखों की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं।
- सिगरेट के धुएं में मौजूद रसायन रेटिना और ऑप्टिक तंत्रिका तक जाने वाले रक्त प्रवाह पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
- निकोटिन और अन्य विषैले तत्व रक्त वाहिकाओं को संकुचित करते हैं, जिससे आंखों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता।
- लंबे समय तक ऐसी स्थति होने पर आंखों से संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि धूम्रपान करने वालों में उम्र से संबंधित मैक्यूलर डिजेनरेशन, मोतियाबिंद, ड्राई आई सिंड्रोम और ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
- उम्र से संबंधित मैक्यूलर डिजेनरेशन में रेटिना प्रभावित होता है, जिससे पढ़ने और चेहरा पहचानने जैसी गतिविधियां कठिन हो सकती हैं।
- धूम्रपान करने वालों में मोतियाबिंद होने का जोखिम भी अधिक रहता है, जिसमें आंखों का लेंस धुंधला हो जाता है।
आपको भी हो रही हैं दिक्कतें तो क्या करें?
यदि अचानक या धीरे-धीरे नजर कमजोर लगने लगे तो खुद से कोई दवा या ड्रॉप लेने के बजाय विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
- नजर में बदलाव केवल चश्मे का नंबर बढ़ने की वजह से नहीं बल्कि रेटिना, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद या अन्य रोगों के कारण भी हो सकता है।
- धूम्रपान करने वालों के लिए नियमित आंखों की जांच को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।