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Pediatric Diabetes: आपका बच्चा भी तो नहीं है डायबिटीज का शिकार? कैसे करें इसकी पहचान

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 23 Jun 2026 05:58 PM IST
सार

टाइप-1 डायबिटीज लंबे समय से बच्चों में देखी जाती रही है, वहीं मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और अस्वास्थ्यकर खानपान के कारण टाइप-2 डायबिटीज भी कम उम्र में सामने आने लगी है। कहीं आपका बच्चा भी तो डायबिटीज का शिकार नहीं है?

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बच्चों में डायबिटीज के मामले - फोटो : Amarujala.com

डायबिटीज वैश्विक स्तर पर देखी जा रही है गंभीर बीमारी है।  हर साल न सिर्फ इसके लाखों मरीज सामने आ रहे हैं बल्कि डायबिटीज के कारण होने वाली दूसरी बीमारियों के चलते बड़ी संख्या में लोगों की मौतें भी हो रही हैं। कुछ दशकों पहले तक  डायबिटीज को मुख्य रूप से वयस्कों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। भारत सहित दुनिया के कई देशों में कम उम्र के बच्चों और किशोरों में भी डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं।



जब बात बच्चों में डायबिटीज की हो तो टाइप-1 डायबिटीज की सबसे ज्यादा चर्चा होती है। हालांकि मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बच्चों में बढ़ता मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और खराब खानपान  टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को भी बढ़ाता जा रहा है।

अब सवाल ये है कि कहीं आपका बच्चा भी तो इसका शिकार नहीं है, कैसे इसकी पहचान की जाए?

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कम उम्र वालों में डायबिटीज के मामले - फोटो : Adobe Stock

बच्चे भी हो रहे डायबिटीज का शिकार

मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनियाभर में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और किशोरों की सबसे ज्यादा संख्या भारत में है। यहां अनुमानित 3 लाख बच्चे और किशोर (19 साल की उम्र के) टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित हैं। इसके अलावा, टाइप 2 डायबिटीज और प्री-डायबिटीज के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। किशोरों में प्री-डायबिटीज की दर 16.18% और डायबिटीज की दर 0.56% है।

डॉक्टर कहते हैं, यदि समय रहते लक्षणों की पहचान करके जांच और उपचार शुरू हो जाए तो अधिकांश बच्चों को डायबिटीज के कारण होने वाली दिक्कतों से बचाया जा सकता है। सभी माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चे की दिनचर्या, खानपान और शारीरिक स्थितियों में बदलाव पर गंभीरता से ध्यान देते रहें।

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मोटापा बच्चों में भी बढ़ा रहा डायबिटीज का खतरा - फोटो : Adobe Stock

किन बच्चों में डायबिटीज का खतरा ज्यादा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज का खतरा ज्यादा देखा जाता रहा है, इसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। हालांकि हाल के वर्षों में मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी स्थितियों के कारण टाइप-2 डायबिटीज के मामले भी बढ़े हैं।
 

  • शहरी जीवनशैली, जंक फूड, मीठे पेय, बाहर खेलकूद में कमी और बढ़ता मोटापा बच्चों में मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा रहे हैं।
  • ये स्थितियां डायबिटीज का कारण बन सकती हैं।
  • इसके अलावा जिन बच्चों के परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज रहो हो उनमें खतरा अधिक हो सकता है।
  • बच्चों का वजन अधिक होना, बाहर खेलकूद न करना या कुछ ऑटोइम्यून स्थितियां भी डायबिटीज का खतरा बढ़ा देती हैं।
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बच्चों में डायबिटीज का खतरा - फोटो : freepik.com

कैसे जाने आपका बच्चा भी तो नहीं है शिकार?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं जिन बच्चों में डायबिटीज का जोखिम अधिक हो उनमें लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।
 

  • अगर बच्चा सामान्य से कहीं ज्यादा पानी पी रहा है और फिर भी प्यास नहीं बुझती, तो यह बढ़ी हुई ब्लड शुगर का संकेत हो सकता है।
  • बच्चा अगर पहले से ज्यादा बार पेशाब जाने लगे, तो अलर्ट हो जाएं।
  • पर्याप्त भोजन के बावजूद वजन कम होना और लगातार भूख महसूस होना शरीर में ग्लूकोज के सही उपयोग न होने का संकेत हो सकता है।
  • बच्चा अगर थका-थका या सुस्त रहता है और खेलकूद में रुचि कम हो रही हो तो ये भी डायबिटीज का शुरुआती संकेत हो सकता है।


यदि आपके बच्चे में इस तरह की दिक्कतें हैं तो समय रहते डॉक्टर के पास जाएं और जांच कराएं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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