दुनिया के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण के मामले एक बार फिर से बढ़ने लगे हैं। भारत में भी कुछ राज्यों में केस में इजाफा देखने को मिल रहा है, हालांकि यहां दैनिक मामले फिलहाल नियंत्रण में हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 7579 कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक तेजी से किए जा रहे टीकाकरण के चलते भारत में कोरोना की रफ्तार को रोकने में सफलता मिली है, देश में अब तक 117 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज मिल चुकी है। कई देशों में कोरोना के बिगड़ते मामलों को देखते हुए लोगों के मन में एक सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन के बूस्टर खुराक की आवश्यकता है?
कोरोना से जंग: वैक्सीन का बूस्टर डोज लेना है या नहीं? आईसीएमआर के निदेशक ने किया स्पष्ट
बूस्टर डोज की जरूरत है या नहीं?
आईसीएमआर के निदेशक डॉ बलराम भार्गव कहते हैं, अब तक ऐसे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं जो बूस्टर वैक्सीन खुराक की आवश्यकताओं का समर्थन करते हों, ऐसे में फिलहाल बूस्टर डोज की जरूरत नजर नहीं आती है। डॉ भार्गव ने सोमवार को कहा कि देश की पूरी आबादी के लिए दूसरी खुराक को पूरा करना फिलहाल सरकार की प्राथमिकता है। सूत्रों के अनुसार, भारत में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) की अगली बैठक में बूस्टर खुराक के मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
क्या कहते हैं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री?
वैक्सीन की बूस्टर डोज को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा था कि यदि आवश्यकता पड़ती है तो इसके लिए हमारे पास पर्याप्त टीके उपलब्ध हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, हमारे पास वैक्सीन की पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, पर हमारा पहला लक्ष्य देश की आबादी को पहले वैक्सीन की दोनों खुराक देना है, जिससे सभी का टीकाकरण पूरा हो सके। उसके बाद, विशेषज्ञों की सिफारिश के आधार पर बूस्टर खुराक पर निर्णय लिया जाएगा।
विशेषज्ञ लेंगे फैसला
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में कहा था कि वैक्सीन की बूस्टर डोज देने जैसे मामलों पर सरकार सीधे तौर पर फैसला नहीं ले सकती है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और विशेषज्ञों की टीम को अगर इसकी आवश्यकता महसूस होती है तो हम उस पर विचार करेंगे। आंकड़ों के मुताबिक भारत में लगभग 82 प्रतिशत आबादी को टीके की पहली खुराक मिल चुकी है, जबकि लगभग 43 प्रतिशत का पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका है।
यहां बूस्टर डोज को मिल चुकी है मंजूरी
कोरोना के खतरे को देखते हुए इजराइल जैसे देश और यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) पहले ही इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों के लिए टीकों की तीसरी खुराक लेने को मंजूरी दे चुके हैं। एफडीए का कहना है कि कमजोर इम्यूनिटी या पहले से ही क्रोनिक बीमारियों के शिकार लोगों को तीसरी डोज देकर संक्रमण के खतरे से काफी हद तक सुरक्षित किया जा सकता है। वर्जीनिया विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजिस्ट और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ विलियम पेट्री ने भी इम्यूनोसप्रेशिव लोगों के लिए बूस्टर डोज की जरूरत पर जोर दिया था।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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