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Indore: दूषित पानी से मची तबाही के बीच अब गिलियन-बैरे सिंड्रोम बढ़ा रही चिंता, जानिए क्या है ये नई समस्या

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Wed, 07 Jan 2026 07:55 AM IST
सार

  • भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण फैला संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच एक महिला में जानलेवा गिलियन-बैरे सिंड्रोम के लक्षण देखे गए हैं।
  • आखिर ये क्या नई समस्या है, यहां जानिए सबकुछ विस्तार से...

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गुलियन-बैरे सिंड्रोम के बारे में जानिए - फोटो : amarujala.com

देश के सबसे साफ शहरों में गिना जाने वाला मध्य प्रदेश का शहर इंदौर इन दिनों दूषित पानी और इसके कारण फैली बीमारियों के कारण सुर्खियों में है। दिसंबर 2025 के आखिरी हफ्ते में यहां दूषित पानी की सप्लाई की खबरें सामने आईं। देखते ही देखते शहर में जानलेवा कालरा रोग फैल गया और इससे 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, सैकड़ों अस्पताल में भर्ती हैं।



दूषित पानी के कारण मचे हड़कंप के बाद प्रशासन ने अब अपनी जांच रिपोर्ट पेश कर दी है। रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर 14 लोगों की मौत की पुष्टि दूषित जल के संक्रमण से होना माना गया है, जिसमें एक 5 महीने का बच्चा भी शामिल है।

खबरों के मुताबिक भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण फैला संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस गंभीर स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब बच्चे भी इसकी चपेट में हैं। पांच दिन पहले उल्टी दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती पांच माह के अव्यान की मौत हो चुकी थी। अब उसके माता और पिता भी इस बीमारी के शिकार हो गए हैं।

दूषित पानी और संक्रमण से मची तबाही के बीच एक नई समस्या लोगों का ध्यान खींच रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भागीरथपुरा में एक महिला में जानलेवा गिलियन-बैरे सिंड्रोम के लक्षण देखे गए हैं। आखिर ये क्या समस्या है, आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

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इंदौर में दूषित जल से गई 14 लोगों की जान - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

मेडिकल इमरजेंसी है गिलियन-बैरे सिंड्रोम
 
इंदौर से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक 67 वर्षीय एक महिला में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) रोग के लक्षण देखे गए हैं। ये एक ऑटो इम्यून बीमारी है, जिसमें हमारे ही शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिकाओं पर अटैक कर देती है। इस वजह से मरीजों को कमजोरी, सुन्न होने या फिर लकवा मारने जैसे दिक्कतें हो सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ जीबीएस की समस्या को मेडिकल इमरजेंसी के तौर पर देखते हैं, जिसमें रोगी को तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। इलाज न मिलने पर जान जाने का भी खतरा हो सकता है।

(ये भी पढ़िए- इंदौर में 'काल बना कालरा')

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तंत्रिकाओं से संबंधित बीमारी - फोटो : Freepik.com

क्या कहना है प्रशासन का?

मीडिया रिपोर्ट्स में फिलहाल महिला की स्थिति के बारे में अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि जब महिला की पूरी जांच की गई, तो पता चला कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक भी हुआ है। महिला वेंटिलेटर पर है और किडनी फेल होने की वजह से उसका डायलिसिस हो रहा है, साथ ही उसको नर्वस सिस्टम की भी समस्या है।

वहीं, प्रशासन ने रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा है भागीरथपुरा में जीबीएस का कोई मामला नहीं मिला है। 





गौरतलब है कि ये ऑटो इम्यून बीमारी, कुछ प्रकार के संक्रमण की स्थिति में ट्रिगर हो सकती है और इसके जानलेवा दुष्प्रभाव भी देखे जाते रहे हैं।

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जानलेवा हो सकती है ये ऑटो इम्यून बीमारी - फोटो : Freepik.com

गिलियन-बैरे सिंड्रोम और इसके लक्षण

दुनियाभर में हर साल लगभग एक लाख लोगों को गिलियन-बैरे सिंड्रोम की समस्या होती है, हालांकि ये दिक्कत क्यों होती है इसका सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। 

ये बीमारी पेरीफेरल नर्वस को अटैक करती है। ये तंत्रिकाएं मांसपेशियों की गति, शरीर में दर्द के संकेत, तापमान और शरीर को छूने पर होने वाली संवेदनाओं का एहसास कराती हैं। इन तंत्रिकाओं को होने वाली क्षति के कारण आपको कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। 

  • हाथ और पैर की उंगलियों, टखनों या कलाई में सुई चुभने जैसा एहसास।
  • पैरों में कमजोरी जो शरीर के ऊपरी हिस्से तक फैल सकती है।
  • चलने या सीढ़ियां में असमर्थ होना।
  • बोलने, चबाने या निगलने में परेशानी होना।
  • पेशाब पर नियंत्रण न रह जाना या हृदय गति का बहुत बढ़ जाना।
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गिलियन-बैरे सिंड्रोम के बारे में जानिए - फोटो : Adobe Stock Images

क्या हैं इस बीमारी के कारण?

गिलियन-बैरे सिंड्रोम के कारणों को अभी तक सही से समझा नहीं जा सका है। इस रोग में प्रतिरक्षा प्रणाली (जो आमतौर पर केवल बाहरी हानिकारक तत्वों पर हमला करती है) वह नसों पर अटैक करना शुरू कर देती है। इससे नसों का सुरक्षात्मक आवरण क्षतिग्रस्त हो जाता है। यह क्षति नसों को आपके मस्तिष्क तक संकेत भेजने में दिक्कत डाल सकती है जिसके कारण कई तरह की जटिलताएं होने लगती हैं।

अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ प्रकार के बैक्टीरिया या वायरस भी इस समस्या को ट्रिगर कर सकते हैं। कैम्पिलोबैक्टर नामक बैक्टीरिया जो अक्सर अधपके पोल्ट्री में पाया जाता है उससे भी ये दिकक्त होती रही है। इन्फ्लूएंजा वायरस, साइटोमेगालोवायरस, जीका वायरस और हेपेटाइटिस ए, बी, सी और ई का संक्रमण भी गिलियन-बैरे सिंड्रोम को ट्रिगर करने कारण बन सकता है।




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स्रोत और संदर्भ
Guillain-Barré Syndrome


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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