Foamy Urine Causes: अक्सर हम शरीर के छोटे-मोटे बदलावों को सामान्य समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन पेशाब में झाग बनना आपके आंतरिक स्वास्थ्य का बड़ा संकेत हो सकता है। अगर आप नोटिस कर रहे हैं कि आपके पेशाब में लगातार झाग बन रहा है, तो यह आपके गुर्दे की ओर से दी जा रही एक चेतावनी हो सकती है। सामान्य स्थिति में पेशाब साफ और बिना झाग के होना चाहिए।
Health Tips: क्या आपके पेशाब में भी आता है झाग? इन गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत
Urine Foam Health Issue: अक्सर कुछ लोगों के पेशाब में झाग बनता है, ऐसा के पीछे कई कारण होते हैं, लेकिन सामान्य तौर पर ये आपके शरीर में होने वाले परेशानी का संकेत होता है। आइए इस लेख में इसी के बारे विस्तार से जानते हैं कि इसके पीछे का क्या कारण है?
किडनी की बीमारी का संकेत
पेशाब में झाग आना क्रोनिक किडनी डिजीज का सबसे प्रमुख लक्षण है। जब किडनी के 'फिल्टर्स' डैमेज हो जाते हैं, तो वे प्रोटीन को रोकने में असमर्थ होते हैं। अगर झाग के साथ आपके पैरों में सूजन, थकान या भूख में कमी महसूस हो रही है, तो यह संकेत है कि आपकी किडनी खतरे में है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से मिलकर अपने लक्षण बताने चाहिए। 'यूरिन एल्ब्यूमिन' टेस्ट के जरिए इसकी तुरंत जांच की जा सकती है।
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डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का असर
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों ही किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। हाई शुगर के कारण किडनी को अधिक काम करना पड़ता है, जिससे वे प्रोटीन लीक करने लगती हैं। अगर आप मधुमेह के रोगी हैं और पेशाब में झाग देख रहे हैं, तो यह 'डायबिटिक नेफ्रोपैथी' की शुरुआत हो सकती है। ब्लड प्रेशर को नियंत्रित न रखना भी इस समस्या को बढ़ा देता है।
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डिहाइड्रेशन और अन्य जीवनशैली कारण
कभी-कभी पेशाब में झाग आने का कारण बहुत ही साधारण होता है, जैसे शरीर में पानी की भारी कमी। जब आप कम पानी पीते हैं, तो पेशाब गाढ़ा हो जाता है, जिससे झाग बनने लगता है। इसके अलावा पुरुषों में 'रेट्रोग्रेड इजैकुलेशन' या कुछ विशेष दवाओं के सेवन से भी ऐसा हो सकता है। अगर पानी पीने के बाद भी झाग कम न हो, तो यह गंभीर स्थिति की ओर इशारा करता है।
जांच और सावधानी है जरूरी
पेशाब में झाग आने को कभी भी नजरअंदाज न करें, क्योंकि यह किडनी फेलियर की पहली सीढ़ी हो सकती है। अपने आहार में नमक कम करें, पर्याप्त पानी पिएं और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें। एक साधारण 'यूरिन रूटीन टेस्ट' से आप जान सकते हैं कि स्थिति कितनी गंभीर है। ध्यान रखें शुरुआती पहचान ही किडनी को डायलिसिस जैसी नौबत से बचा सकती है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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