डायबिटीज वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर कई प्रकार की अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं का भी कारण बन सकता है, यही वजह है कि जिन लोगों का ब्लड शुगर लेवल सामान्य दवाओं के माध्यम से नियंत्रित नहीं हो पाता है, उन्हें डॉक्टर्स इंसुलिन इंजेक्शन की सलाह देते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि कुछ स्थितियों में इंसुलिन का हाई डोज कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण तक बन सकता है?
अध्ययन में दावा: ऐसे डायबिटीज रोगियों में कैंसर का खतरा अधिक, यह स्थितियां बढ़ा देती हैं जोखिम, बरतें सावधानी
हाई डोज इंसुलिन शॉट लेने वालों में जोखिम
अमेरिका स्थित ओहियो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि वैसे तो पारंपरिक मेटाबॉलिक कारक जैसे मोटापा, शुगर कंट्रोल (हीमोग्लोबिन A1c) और ब्लड प्रेशर नियंत्रण के तरीके तो टाइप-1 डायबिटीज वाले के रोगियों में कैंसर के कारक के तौर पर नहीं देखे गए हैं, हालांकि जिन लोगों को लंबे समय से हाई डोज वाले इंसुलिन शॉट की आवश्यकता रही है उनमें समय के साथ कैंसर विकसित होने का जोखिम हो सकता है। विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर युआनजी माओ कहते हैं, हमारे परिणामों से पता चलता है कि टाइप-1 डायबिटीज वाले रोगियों का इलाज करते समय चिकित्सकों को संभावित कैंसर के जोखिम को ध्यान में रखने की आवश्यकता है।
इंसुलिन की डोज
अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार दैनिक इंसुलिन की खुराक को तीन समूहों में वर्गीकृत किया जाता है। लो- 0.5 यूनिट/किलोग्राम से कम, मीडियम: 0.5 यूनिट/किलोग्राम या अधिक और हाई- प्रति दिन 0.8 यूनिट/किलोग्राम से अधिक।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को लगातार हाई डोज की जरूरत लगातार हो रही है, ऐसे लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर विकसित होने का खतरा हो सकता है। इस बारे में चिकित्सकों को विचार करने की आवश्यकता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन करने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने टाइप-1 डायबिटीज वाले 1,303 रोगियों में कैंसर के तमाम जोखिम कारकों को जानने की कोशिश की। अनेक स्तर पर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि डायबिटीज रोगियों में उम्र और लिंग, दो प्रमुख फैक्टर हो सकते हैं जो समय के साथ कैंसर का कारक बनते हैं। वहीं यदि रोगी को हाई डोज की इंसुलिन दी जा रही है तो उसमें कैंसर विकसित होने का खतरा अधिक हो जाता है। विशेष रूप से, महिलाओं में इसका जोखिम अधिक देखा गया है।
क्या कहते हैं डॉक्टर्स?
इंसुलिन और कैंसर के खतरे के बारे में जानने के लिए हमने वरिष्ठ डायबिटोलॉजिस्ट डॉ वसीम गौहरी से संपर्क किया। डॉ वसीम कहते हैं, डेटा से पता चलता है कि डायबिटीज के शिकार लोगों में कई प्रकार के कैंसर के विकसित होने का खतरा अधिक होता है। टाइप-1 डायबिटीज (T1D) में, शरीर स्वाभावित रूप से इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता है, ऐसे में इस प्रकार के रोगियों को ताउम्र इंसुलिन के इंजेक्शन होती है।
इंसुलिन कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाने और डेड सेल्स को कम करने के लिए जाना जाता है, कुछ स्थितियों में देखा गया है कि यह कैंसर कोशिकाओं को जन्म दे सकता है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने विशेषरूप से बताया है कि जिन लोगों को इंसुलिन का अधिक डोज दिया जाता है उनमें कैंसर का जोखिम 4 गुना तक अधिक हो सकती है, हालांकि इसका सैंपल साइज कम है और इसपर भविष्य में होने वाले अन्य अध्ययनों से स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी। फिर भी निश्चित तौर पर डायबिटीज के इलाज के दौरान इस खतरे पर ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।
