कैंसर के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार (24 अप्रैल 2026) को बताया कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर का पता चला। कैंसर के शुरुआती चरण का उनका इलाज भी सफलतापूर्वक हो चुका है। अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार नियमित जांच के दौरान उनके शरीर में एक छोटा सा ट्यूमर पाया गया था जिसके बाद जांच में कैंसर का निदान हुआ था।
Prostate Cancer: नेतन्याहू समेत कई बड़े नेता हो चुके हैं प्रोस्टेट कैंसर का शिकार, क्यों होती है ये बीमारी?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर का पता चला है। इससे पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और यूके के पूर्व प्रधानमंत्री भी इस कैंसर का शिकार रह चुके हैं। अब सवाल ये हैं कि आखिर प्रोस्टेट कैंसर के मामले इतनी तेजी से बढ़ते क्यों जा रहे हैं?
पहले भी कई नेताओं को हो चुका है ये कैंसर
गौरतलब है कि बेंजामिन नेतन्याहू से पहले भी कई बड़े नेता प्रोस्टेट कैंसर का शिकार रह चुके हैं।
- 24 नवंबर 2025 को अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि यूके के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन प्रोस्टेट कैंसर का शिकार हो गए हैं। उन्होंने प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) टेस्ट करवाया था। इस रिपोर्ट में उन्हें प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जानकारी मिली, बाद में उनकी बायोप्सी हुई जिससे कैंसर का पता चला।
- इससे पहले 19 मई 2025 को प्रकाशित रिपोर्ट में हमने जानकारी दी थी कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन भी कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें मूत्र संबंधी दिक्कतें हो रही थीं जिसके बाद डॉक्टरों ने जांच के दौरान प्रोस्टेट कैंसर का निदान किया था। रिपोर्ट में पता चला था कि कैंसर कोशिकाएं हड्डियों तक फैल गई थीं। बाइडेन के कैंसर को लेकर फिलहाल कोई ताजा जानकारी सामने नहीं आई है।
अब सवाल ये है कि प्रोस्टेट कैंसर का खतरा क्यों बढ़ता जा रहा है?
पहले इस कैंसर के बारे में जान लीजिए
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक गंभीर कैंसर है, जो प्रोस्टेट ग्रंथि में विकसित होता है। प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि होती है जो मूत्राशय के नीचे होती है और वीर्य बनाने में मदद करती है।
- बढ़ती उम्र के साथ इस कैंसर का खतरा भी बढ़ता जाता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में इसका जोखिम अधिक देखा जाता है।
- कई मामलों में यह कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए शुरुआती चरण में इसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
- कैंसर का अगर समय पर पता न चल पाए तो ये फैलकर हड्डियों, लिम्फ नोड्स और शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है।
अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये कैंसर रहा हो, उनमें जोखिम और बढ़ जाता है। इसके अलावा मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक रूप से कम मेहनत करना और हाई-फैट डाइट भी इसके खतरे को बढ़ाने वाले माने जाते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर की पहचान क्या है?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता कि प्रोस्टेट कैंसर तब होता है जब प्रोस्टेट ग्रंथि की कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव होने लगते हैं। यही बदलाव कोशिकाओं को असामान्य रूप से तेजी से बढ़ने में मदद करते हैं। ये कोशिकाएं धीरे-धीरे ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यही ट्यूमर बाद में शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है।
- प्रोस्टेट कैंसर को लेकर सबसे बड़ी समस्या ये है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण अक्सर बहुत स्पष्ट नहीं होते। जब बीमारी का पता चलता है कि तब तक कैंसर काफी बढ़ चुका होता है।
- पेशाब करने में दिक्कत, बार-बार पेशाब आना, पेशाब का फ्लो कमजोर हो या पेशाब करते समय जलन या दर्द हो तो सावधान हो जाना चाहिए।
- कुछ मरीजों में पेशाब या वीर्य में खून आ सकता है।
- कमर, कूल्हों या हड्डियों में लगातार दर्द भी संकेत हो सकता है।
- अचानक वजन कम होना, थकान और कमजोरी भी कैंसर के संकेत हो सकते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर से बचाव कैसे करें?
प्रोस्टेट कैंसर को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन कुछ आदतों से आप इसके खतरे को काफी कम कर सकते हैं।
- डॉक्टर आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन टेस्ट (पीएसए) की सलाह देते हैं ताकि शुरुआती चरणों में इसका पता चल पाए।
- इस कैंसर से बचने के लिए संतुलित आहार लें जिसमें हरी सब्जियां, टमाटर, फल, साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर चीजें हों।
- टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन प्रोस्टेट स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद पाया गया है।
- रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा फैट वाली चीजें सेहत के लिए नुकसानदायक मानी जाती हैं।
- नियमित व्यायाम, वजन को कंट्रोल करना भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। मोटापा कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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