कुत्ता काटने के दिल दहला देने वाले वीडियो आपको अक्सर सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हुए दिख ही जाते होंगे। कई मामलों में कुत्ते के काटने से मौत भी हो जाती है। इन्हीं वजहों से बीते महीनों में आवारा कुत्तों से जुड़ा मुद्दा सुर्खियों रहा।
Rabies: क्या 100% असरदार है रेबीज वैक्सीन? कुत्ता काटने के बाद रेबीज के डर से बैंक कर्मचारी ने कर ली आत्महत्या
भारत में कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इससे रेबीज संक्रमण का खतरा रहता है। दुनिया में होने वाली रेबीज से मौतों का लगभग 36% हिस्सा भारत में होता है।
समय पर वैक्सीन लगवाने से रेबीज को रोका जा सकता है, पर क्या ये वैक्सीन 100% कारगर है?
रेबीज और इससे मौत का खतरा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मृतक विश्वनाथ अमीन एक निजी बैंक में वरिष्ठ पद पर कार्यरत था। कुछ दिन पहले उसे एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद उसने चिकित्सकीय सलाह लेकर एंटी-रेबीज के टीके भी लगवाए थे। टीकाकरण के बावजूद युवक रेबीज होने की आशंका को लेकर मानसिक रूप से बेहद चिंतित रहने लगा था। परिवार के अनुसार, रेबीज के कारण कहीं उसकी भी दर्दनाक मौत न हो, इसके डर में उसने पहले ही आत्महत्या कर ली।
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हैं जिसमें रेबीज के शिकार मरीज तड़पते हुए देखे गए हैं। रेबीज होने के बाद जान बचाना बिल्कुल कठिन हो जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो रेबीज वैक्सीन लगवाने से संक्रमण को रोका जा सकता है, पर क्या ये टीके 100% तक असरदार हैं, इसे लेकर भी लोगों के मन में अक्सर सवाल रहता है।
कितनी असरदार है वैक्सीन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, रेबीज वैक्सीन को बीमारी रोकने में लगभग 100% असरदार माना जाता है, बशर्ते इसे कुत्ते के काटने के बाद पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस के तौर पर तुरंत और सही तरीके से लगाया जाए। रेबीज के लक्षण दिखने के बाद यह 100% जानलेवा होता है, लेकिन वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबुलिन ट्रीटमेंट वायरस को बढ़ने से रोकने में बहुत कामयाब हैं।
वैक्सीन की प्रभाविकता को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि बीते महीने ऑस्ट्रेलिया के हेल्थ डिपार्टमेंट ने हाल ही में उन नागरिकों को अलर्ट किया था जिन्हें भारत में रेबीज का शॉट लगा है। विशेषज्ञों ने कहा, ऐसे लोग एक बार चेक कर लें कि उन्हें और रिप्लेसमेंट डोज की जरूरत तो नहीं है। यूके और यूएस ने भी ऐसी ही एडवाइजरी जारी की थीं।
- यह अलर्ट तब जारी किया गया था जब वैक्सीन अभयरब का नकली बैच सामने आया था।
- संभवत: ये 2023 से भारत में लोगों को लगाया जा रहा है।
- अभयराब रेबीज टीका को पीएसयू इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स के एक खास डिवीजन, ह्यूमन बायोलॉजिकल्स इंस्टीट्यूट ने बनाया है।
- इससे चिंता बढ़ गई कि क्या टीके लगवा चुके लोग खुद को संक्रमण से सुरक्षित मान सकते हैं।
वैक्सीनेशन के बाद भी रेबीज से हो गई थी बच्ची की मौत
ये सवाल तब और हावी हो जाता है, जब टीकाकरण के बाद भी लोगों में मौत के मामले रिपोर्ट किए गए।
दिसंबर 2025 में महाराष्ट्र में कुत्ता काटने से एक छह साल की बच्ची की मौत हो गई थी। उसे मौत से करीब एक महीने पहले गली के कुत्ते ने काट लिया था। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एंटी-रेबीज वैक्सीन की चार डोज लगने के बावजूद बच्ची की मौत हो गई थी।
डॉक्टर कहते हैं, वैक्सीन लगने के बाद भी रेबीज से मौत के मामले काफी दुर्लभ होते हैं। हालांकि कुछ स्थितियों में इससे मौत हो सकती है, इसलिए सावधानियां बरतनी जरूरी है।
- कुत्ता काटने के बाद पहला कदम है घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से तुरंत और अच्छी तरह धोना। फिर रेबीज के लिए पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस के लिए तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
- अगर किसी व्यक्ति को रेबीज वैक्सीन कुत्ता काटने के तुरंत बाद नहीं लगती है, तो वायरस नर्वस सिस्टम में अपनी जगह बना सकता है, जिससे बाद का वैक्सीनेशन का असर कम हो सकता है। एक बार जब वायरस सेंट्रल नर्वस सिस्टम में पहुंच जाता है, तो वैक्सीन का ज्यादा असर नहीं होता है।
- कुछ लोगों में वैक्सीन के लिए मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स नहीं बन पाता है, क्योंकि उन्हें पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो सकती है, इम्यूनिटी कमजोर होती है। ये वैक्सीन को असरदार तरीके से रिस्पॉन्स करने में रुकावट डालती हैं।
- रेबीज वायरस के एक्सपोजर का लेवल भी बीमारी के बढ़ने पर असर डाल सकता है। चेहरे, गर्दन और हाथों जैसी जगहों पर काटने से वायरस दिमाग तक तेजी से पहुंचता सकता है इससे भी वैक्सीन का असर कम हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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