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Health Tips: हाई ब्लड शुगर से ज्यादा खतरनाक हो सकता है लो ब्लड शुगर, मामूली सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Tue, 24 Feb 2026 12:19 PM IST
सार

Hypoglycemia Emergency Rules: ब्लड शुगर का लो होना एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है। मगर ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर इस स्थिति में थोड़ी भी लापरवाही की गई तो वो मरीज के जान को जोखिम में डाल सकती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में डॉक्टर से जानते हैं।

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Low Blood Sugar vs High Blood Sugar experts tips to manage Hypoglycemia Emergency
लो ब्लड शुगर की वजह से भ्रम की स्थिति होना (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock

Low Blood Sugar Symptoms And Treatment: डायबिटीज के मरीजों के बीच अक्सर हाई ब्लड शुगर की चर्चा होती रहती है, लेकिन लो ब्लड शुगर के बारे में कम लोगों को मालूम रहता है। 'लो ब्लड शुगर' यानी हाइपोग्लाइसीमिया में ब्लड शुगर कम हो जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक हाई ब्लड शुगर शरीर के अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता हैं, जबकि लो ब्लड शुगर किसी भी व्यक्ति की मिनटों में जान ले सकता है। इसी विषय पर हमने कुशिनगर के निजी अस्पताल के डॉक्टर रवि कुशवाहा से बात की।



उन्होंने बताया कि जब शरीर में ग्लूकोज का लेवल जब 70 mg/dL से नीचे चला जाता है, तो मस्तिष्क को एनर्जी मिलना बंद हो जाती है, जिससे व्यक्ति बेहोश हो सकता है या कोमा में जा सकता है। डॉक्टर कुशवाहा चेतावनी देते हैं कि अक्सर लोग कंपकंपी, पसीना आना और घबराहट जैसे शुरुआती संकेतों को कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।

यह स्थिति तब और खतरनाक हो सकती है जब मरीज नींद में हो या अकेले यात्रा कर रहा हो। इसलिए हाइपोग्लाइसीमिया के प्रति जागरूकता और इसके तत्काल प्रबंधन की जानकारी होना हर शुगर मरीज और उसके परिवार के लिए बहुत जरूरी है।

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लो ब्लड शुगर - फोटो : Freepik

क्यों गिरता है अचानक शुगर लेवल?
डॉक्टर रवि कुशवाहा बताते हैं कि लो ब्लड शुगर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे मुख्य कारण है इंसुलिन या दवाओं की अधिक खुराक ले लेना। इसके अलावा भोजन समय पर न करना, सामान्य से अधिक शारीरिक मेहनत करना या खाली पेट शराब का सेवन करना भी शुगर लेवल को तेजी से गिरा सकता है। कई बार मरीज दवा तो ले लेते हैं लेकिन उसके बाद पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट नहीं खाते, जिससे शरीर में ग्लूकोज का संतुलन बिगड़ जाता है और इमरजेंसी की स्थिति पैदा हो जाती है।

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डायबिटीज - फोटो : Adobe Stock

हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण पहचानें
शुगर लेवल गिरने पर शरीर तुरंत संकेत देना शुरू करता है। डॉक्टर रवि के अनुसार अगर आपको अचानक अत्यधिक पसीना आ रहा है, हाथ-पैरों में कंपकंपी, तेज धड़कन, धुंधला दिखाई देना या बहुत अधिक भूख महसूस हो रही है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

कुछ मरीजों में चिड़चिड़ापन, भ्रम की स्थिति या बोलने में लड़खड़ाहट भी देखी जाती है। इन लक्षणों को पहचानकर अगर तुरंत उपचार न किया जाए, तो मरीज के मस्तिष्क की कोशिकाओं को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

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लो ब्लड शुगर की समस्या - फोटो : Freepik.com

इमरजेंसी में क्या करें? 
डॉक्टर कुशवाहा ऐसी स्थिति में '15-15 नियम' अपनाने की सलाह देते हैं। अगर मरीज होश में है, तो उसे तुरंत 15 ग्राम तेजी से असर करने वाला कार्बोहाइड्रेट दें, जैसे 3-4 चम्मच ग्लूकोज, आधा कप फलों का जूस या 4-5 टॉफी।

इसके बाद 15 मिनट इंतजार करें और दोबारा शुगर चेक करें। अगर शुगर अब भी 70 से कम है, तो प्रक्रिया को फिर से दोहराएं। शुगर लेवल सामान्य होते ही मरीज को प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स युक्त भोजन (जैसे रोटी या सैंडविच) दें ताकि शुगर दोबारा न गिरे।

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लो ब्लड शुगर से हो जाएं सतर्क - फोटो : Freepik.com

सतर्कता ही बचाव है
डॉक्टर रवि कुशवाहा बताते हैं कि इंसुलिन डिपेंडेंट मरीजों में लो ब्लड शुगर का जोखिम अधिक होता है। इसलिए हर डायबिटीज मरीज को अपने पास हमेशा 'शुगर आईडी कार्ड' और कुछ मीठा (ग्लूकोज या टॉफी) रखना चाहिए। ऐसे मरीजों के साथ हर समय एक व्यक्ति देखरेख के लिए होना चाहिए, क्योंकि आपातकालीन परिस्थितियों में अकेले मैनेज करना मुश्किल हो सकता है।

डॉक्टर कुशवाहा के मुताबिक इसके साथ ही अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और पूरी तरह से दवा पर निर्भर हैं तो हर महीने में कम से कम दो बार शुगर लेवल जरूर चेक करना चाहिए। दवाओं के समय और खुराक में खुद बदलाव न करें। ध्यान रखें हाई शुगर को कंट्रोल करने के लिए समय मिलता है, लेकिन लो शुगर में हर सेकंड कीमती होता है। इसलिए अगर स्थिति गंभीर हो तो तुरंत किसी नजदीकी डॉक्टर से सलाह लें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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