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Procrastination: शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी से भी बन जाती है काम टालने की आदत

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Tue, 05 Aug 2025 07:58 PM IST
सार

काम टालना एक आम आदत है, जो अधिकतर लोग करते हैं। किसी काम करने के बारे में सोचते तो हैं, लेकिन टालमटोल करके वो नहीं कर पाते हैं। इसे प्रोकास्टिनेशन भी कहते हैं। यह एक ऐसी समस्या है, जो कुछ मामलों में पोषक तत्वों की कमी से भी हो सकती है। आइए इसी के बारे में जानते हैं।

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Lack of these nutrients in the body also leads to the habit of procrastinating
टालमटोल - फोटो : Adobe Stock

Nutritional Deficiencies Lead to Procrastination: क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो अक्सर जरूरी कामों को टालते रहते हैं? क्या आपको भी हर काम की शुरुआत करने में मुश्किल होती है और आप आलस महसूस करते हैं? अक्सर हम इस आदत को अनुशासन की कमी या आलस्य से जोड़कर देखते हैं। इसे आम बोलचाल में टालमटोल करना या प्रोकास्टिनेशन कहते हैं। 



लेकिन कुछ मामलों में ये सिर्फ मानसिक कारण नहीं होता, बल्कि काम टालने की आदत के पीछे हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी एक बड़ा कारण हो सकती है। हमारा दिमाग और शरीर सही तरीके से काम करने के लिए विटामिन, मिनरल्स और अन्य पोषक तत्वों पर निर्भर करता है। जब इन पोषक तत्वों की कमी होती है, तो यह हमारे ऊर्जा स्तर, एकाग्रता और प्रेरणा को सीधे तौर पर प्रभावित करता है, जिससे काम को टालने की आदत और बढ़ जाती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Lack of these nutrients in the body also leads to the habit of procrastinating
टालमटोल - फोटो : Adobe Stock

आयरन की कमी
आयरन हमारे शरीर के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खनिज है, जो हीमोग्लोबिन के उत्पादन में मदद करता है। हीमोग्लोबिन पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। जब शरीर में आयरन की कमी होती है, जिसे एनीमिया भी कहते हैं, तो मस्तिष्क और मांसपेशियों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसके कारण व्यक्ति को लगातार थकान और कमजोरी महसूस होती है। ऐसे में, किसी भी काम को शुरू करने या उसे पूरा करने की ऊर्जा ही नहीं बचती, जिसके परिणामस्वरूप काम टालने की आदत बढ़ जाती है।


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टालमटोल - फोटो : Adobe Stock

विटामिन बी12 की कमी
विटामिन बी12 हमारे नर्वस सिस्टम और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है, जो मूड और एकाग्रता को नियंत्रित करते हैं। विटामिन बी12 की कमी से 'ब्रेन फॉग' यानी दिमाग में धुंधलापन महसूस हो सकता है, जिससे ध्यान केंद्रित करना और जटिल कार्यों को समझना मुश्किल हो जाता है। जब कोई काम मुश्किल लगता है, तो उसे टालना आसान हो जाता है, और यही स्थिति काम टालने की आदत को बढ़ावा देती है।

Lack of these nutrients in the body also leads to the habit of procrastinating
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Freepik

मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड
मैग्नीशियम एक ऐसा खनिज है जो शरीर में 300 से अधिक रासायनिक प्रतिक्रियाओं में शामिल होता है। यह तनाव को कम करने और नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है। इसकी कमी से बेचैनी, चिड़चिड़ापन और नींद न आने की समस्या हो सकती है, जो काम करने की इच्छा को कम कर देती है। वहीं, ओमेगा-3 फैटी एसिड मस्तिष्क के कार्य और मूड को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है। ओमेगा-3 की कमी को डिप्रेशन और एंग्जाइटी से जोड़ा गया है, जो टालमटोल की आदत का मूल कारण बन सकते हैं।


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विटामिन डी की पूर्ति - फोटो : Adobe

विटामिन डी की कमी
हाल के शोधों से पता चला है कि विटामिन डी का संबंध सिर्फ हड्डियों से ही नहीं, बल्कि मस्तिष्क के स्वास्थ्य से भी है। विटामिन डी की कमी को डिप्रेशन और थकान से जोड़ा गया है। यदि आपके शरीर में विटामिन डी का स्तर कम है, तो आप खुद को थका हुआ और प्रेरणाहीन महसूस कर सकते हैं। यह नकारात्मक भावनाएं और कम ऊर्जा, किसी भी काम को समय पर पूरा करने की प्रेरणा को खत्म कर देती हैं, जिससे आप अनजाने में ही काम को टालने लगते हैं।

लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप लक्षणों के आधार पर कोई सप्लीमेंट ले लें, किसी भी तरह का सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें। वे आपकी सेहत, उम्र, जीवनशैली और मेडिकल हिस्ट्री को देखकर ही बता सकते हैं कि आपको वास्तव में किसी सप्लीमेंट की जरूरत है या नहीं। 


स्रोत और संदर्भ
Procrastination in Daily Working Life

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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