मौजूदा समय में मोटापा तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। मोटापा या अधिक वजन वाले लोगों में डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी अधिक होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि साल 1975 के बाद से दुनियाभर में मोटापे का आंकड़ा लगभग तीन गुना हो गया है। साल 2016 में करीब 1.9 बिलियन (करीब 190 करोड़) लोग अधिक वजन की समस्या के शिकार थे, उनमें से करीब 39 फीसदी लोगों की आयु 18 साल से कम थी।
हार्वर्ड अध्ययन: यह एक आदत मोटापे के जोखिम को कर देती है दोगुना, ज्यादातर लोग करते हैं ऐसी गलती
देर से सोना है नुकसानदायक
हार्वर्ड हेल्थ न्यूज़लेटर के संपादक हेइडी गॉडमैन ने बढ़ते मोटापे और इससे सेहत को होने वाले खतरों के बारे में आगाह किया है। मध्यम आयु वर्ग वाले लोगों पर किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि देर से सोने की आदत मोटापे और पेट बढ़ने के जोखिम को कई गुना तक बढ़ा सकती है। जामा नेटवर्क में प्रकाशित इस अध्ययन में 26 देशों के अलग-अलग आय स्तरों के लगभग 137,000 लोगों पर अध्ययन करके परिणाम प्राप्त किए गए।
अध्ययन में क्या पता चला?
इस अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों से उनके सोने के समय और अवधि के बारे में पूछा गया। इसमें से 14 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे आधी रात के बाद या रात में देर से सोते हैं। अध्ययनकर्ता बताते हैं, रात 8 बजे से 10 बजे के बीच सोना बेहतर माना जाता है, इससे बाद में सोने से मोटापे (30 या उससे अधिक का बॉडी मास इंडेक्स) और पेट बढ़ने का जोखिम 20 प्रतिशत अधिक हो सकता है। इसके अलावा जो लोग दोपहर में सोते हैं उनमें मोटापे का जोखिम और भी अधिक पाया गया।
सही समय पर सोना और उठना है जरूरी
हार्वर्ड की रिपोर्ट में बताया गया है कि सेहत को स्वस्थ बनाए रखने और मोटापे के खतरे से बचने के लिए रात में 8 बजे से पहले सो जाना सबसे बेहतर माना जाता है। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि सोने में देरी करने से आपकी सर्कैडियन लय (सोने-जागने का चक्र) खराब हो सकती है, जो तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाती है। यह दीर्घकालिक तौर पर मोटापे के जोखिम को भी बढ़ावा दे सकती है। रात में जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।
अध्ययन का निष्कर्ष
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ता बताते हैं, रात में आठ घंटे की नींद पूरी करना सभी के लिए आवश्यक है। सभी लोगों को वह उपाय करते रहने चाहिए जो नींद को सही रखने में मदद कर सकते हैं। तनाव या चिंता, दर्द,अस्थमा, कुछ दवाएं, कैफीन (आमतौर पर कॉफी, चाय और सोडा से), शराब या अनुपचारित नींद विकार जैसे स्लीप एपनिया या अनिद्रा के कारण नींद की दिक्कत हो सकती है, इससे दूर करने के प्रयास करते रहने चाहिए।
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स्रोत और संदर्भ
Timing and Length of Nocturnal Sleep and Daytime Napping and Associations With Obesity Types in High-, Middle-, and Low-Income Countries
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