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बड़ी मुसीबत: मारबर्ग संक्रमण आउटब्रेक को लेकर अलर्ट, इससे मृत्युदर बहुत अधिक, बचाव के लिए अब तक न कोई दवा- न वैक्सीन

Mon, 18 Jul 2022 06:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 18 Jul 2022 06:32 PM IST
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Marburg Virus First Case Found in Ghana, symptoms and causes of marburg virus
मारबर्ग संक्रमण के मामले - फोटो : Pixabay

दुनियाभर में कोरोना के जारी संकट के बीच अफ्रीका के कुछ हिस्सों में एक नए वायरस का प्रकोप देखने को मिल रहा है। घाना में मारबर्ग संक्रमण के मामले सामने आने के बाद इसे प्रकोप के तौर पर  घोषित किया गया है। मारबर्ग संक्रमण इबोला की ही तरह होता है जिसके कारण गंभीर रोग विकसित होने का खतरा हो सकता है।



मारबर्ग वायरस रोग (एमवीडी) जिसे मारबर्ग हेमोरेजिक फीवर के रूप में भी जाना जाता है, यह इंसानों में अत्यंत घातक बीमारी का कारण बनती है। इस महीने की शुरुआत में  घाना में दो लोगों में मारबर्ग वायरस के कारण होने वाले रोग की पुष्टि की गई थी, दोनों की ही अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई है।

पश्चिम अफ्रीकी राष्ट्र के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि एहतियात के तौर पर अभी 98 लोगों को संदिग्ध मानकर क्वारंटीन किया गया है। डब्ल्यूएचओ के अफ्रीका के निदेशक डॉ मात्शिदिसो मोएती कहते हैं, मारबर्ग की चुनौतियों को लेकर अफ्रीकी देशों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। घाना ने जिस तरह से शुरुआत में ही कदम उठाते हुए इसे प्रकोप के तौर पर घोषित कर दिया है, यह अच्छा कदम हैं। इस घातक संक्रमण पर अगर समय रहते रोकथाम न की जाए तो यह बड़े खतरे का कारण बन सकता है। आइए मारबर्ग के बारे में विस्तार से समझते हैं।

Marburg Virus First Case Found in Ghana, symptoms and causes of marburg virus
चमगादड़ों को माना जता है मारबर्ग संक्रमण का स्रोत - फोटो : Pixabay

मारबर्ग वायरस के बारे में जानिए

मारबर्ग वायरस के कारण मारबर्ग वायरस डिजीज (एमवीडी) का खतरा होता है, इसकी मृत्युदर 88 फीसदी से अधिक हो सकती है। साल 1967 में जर्मनी के मारबर्ग और फ्रैंकफर्ट में सबसे पहले इस वायरस का प्रकोप देखा गया था। यह वायरस भी इबोला परिवार का ही सदस्य है। दोनों रोग दुर्लभ हैं और उच्च मृत्यु दर के साथ तेजी से प्रकोप का कारण बन सकते हैं।

कोरोना की ही तरह यह भी चमगादड़ों के स्रोत के कारण होने वाली बीमारी है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के विशेषज्ञों के अनुसार संक्रमित जानवर से इंसानों में वायरस के क्रॉसओवर के बाद इसका एक से दूसरे व्यक्ति में संचरण हो सकता है।

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मारबर्ग वायरस डिजीज के लक्षणों की पहचान - फोटो : iStock

मारबर्ग वायरस डिजीज के लक्षण क्या हैं?

सीडीसी के मुताबिक संक्रमितों के संपर्क में आने के बाद इसका इनक्यूबेशन पीरियड 2-21 दिनों को होता है।  इनक्यूबेशन पीरियड का मतलब वायरस से पीड़ित इंसान में लक्षण आने में लगने वाला समय है। इसमें संक्रमितों में  बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द और मायलगिया जैसे लक्षण दिख सकते हैं। समय पर पहचान और उपचार न होने पर लक्षणों के गंभीर रूप लेने का खतरा रहता है जिसमें  पीलिया, अग्न्याशय की सूजन, तेजी से वजन कम होने, झटके आने, लिवर फेलियर और बड़े पैमाने पर रक्तस्राव का खतरा रहता है। 

एमवीडी का निदान थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसके कई लक्षण अन्य संक्रामक रोगों जैसे मलेरिया या टाइफाइड बुखार या वायरल हेमेरेजिक फीवर के समान होते हैं। 

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मारबर्ग वायरस डिजीज के संक्रमण का खतरा - फोटो : Pixabay
कैसे फैलता है यह संक्रमण?


विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति के रक्त या शरीर के तरल पदार्थ (मूत्र, लार, पसीना, मल, उल्टी, स्तन का दूध और वीर्य) के संपर्क में आने से इसका संक्रमण अन्य लोगों में होने का जोखिम होता है। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि संक्रमित के कपड़े, बिस्तर और चिकित्सा उपकरण के प्रयोग से भी संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। विशेषज्ञ संक्रमित लोगों से यौन संबंध रखने को मना करते हैं इससे दूसरे के संक्रमित होने का खतरा अधिक रहता है। 

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मारबर्ग वायरस डिजीज से बचाव के तरीके - फोटो : Pixabay

मारबर्ग वायरस डिजीज का इलाज और बचाव

सीडीसी विशेषज्ञों का कहना है कि मारबर्ग वायरस के कारण होने वाले रोग का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। उपचार के तौर पर रोगी में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करने, ऑक्सीजन और रक्तचार की स्थिति को नियंत्रित रखने और खून की कमी न होने देने पर जोर दिया जाता है। 

एमवीडी के खतरे से बचाव के लिए समय रहते इसके लक्षणों का निदान किया जाना सबसे आवश्यक है। रोगी के साथ सीधे शारीरिक संपर्क से बचना चाहिए। यदि आप प्रभावित क्षेत्र में रह रहे हैं तो सावधानियों में सुरक्षात्मक गाउन, दस्ताने और मास्क पहनना अनिवार्य माना जाता है।

संक्रमित व्यक्ति को सख्त क्वारंटीन में रखते हुए उसके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाली चीजों के उचित रखरखाव को ध्यान में रखकर संक्रमण बढ़ने के खतरे को रोका जा सकता है। मारबर्ग वायरस डिजीज के लिए न तो अब तक कोई विशिष्ट उपचार है और न ही बचाव के लिए वैक्सीन।


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स्रोत और संदर्भ
Marburg virus disease (MVD) 

अस्वीकरण:
 अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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