मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हार्ट अटैक, स्ट्रोक हो या सड़क दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों में रोगी को जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचा दिया जाए और इलाज शुरू हो जाए, जान बचने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। कई बार इलाज में देरी बीमारी से ज्यादा खतरनाक साबित हो जाती है। यही वजह है कि किसी भी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे अहम चेहरा उसकी आपातकालीन चिकित्सा सेवा मानी जाती है।
Patient Safety: दुर्घटना हो या हार्ट अटैक, मिनटों में मिलेगी मदद; आपात सेवाओं के लिए सरकार का बड़ा फैसला
हर एंबुलेंस में प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) व चालक की उपलब्धता रहेगी। यही नहीं, अब कॉल सेंटर में भी डॉक्टरों की ड्यूटी लगेगी, जो आपात परिस्थिति में फोन पर ही ईएमटी को मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज संबंधी सलाह देंगे।
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राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा ऑपरेशनल (एनएएस) गाइडलाइन
यह बदलाव आम लोगों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आपातकाल कभी बताकर नहीं आता। किसी भी व्यक्ति को एंबुलेंस की जरूरत पड़ सकती है।
देश में एंबुलेंस सेवा के लिए पहली बार एक समान राष्ट्रीय मानक लागू होंगे। केंद्र सरकार ने अब एनएएस गाइडलाइन जारी की है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इमरजेंसी कॉल के बाद एंबुलेंस को औसतन 20 मिनट में घटनास्थल तक पहुंचना होगा। वहीं, कॉल सेंटर को तीन मिनट में एंबुलेंस भेजनी होगी। तय मानकों का पालन न होने पर जुर्माना लगाया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को 16वीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की बैठक में ये दिशा-निर्देश जारी किए। इसका मकसद पूरे देश में एंबुलेंस सेवाओं की गुणवत्ता, जवाबदेही व मरीजों की सुरक्षा तय करना है।
- नई गाइडलाइन के अनुसार, हर एंबुलेंस में प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) व चालक की उपलब्धता रहेगी। यही नहीं, अब कॉल सेंटर में भी डॉक्टरों की ड्यूटी लगेगी, जो आपात परिस्थिति में फोन पर ही ईएमटी को मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज संबंधी सलाह देंगे।
मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली एंबुलेंस नहीं चलेगी
नई गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी निजी एजेंसी की एंबुलेंस को सेवा में शामिल करने से पूर्व जिला स्तर की समिति उसकी जांच करेगी। वाहन सभी शर्तों पर खरा उतरेगा तभी उसे मंजूरी मिलेगी। सरकार ने पहली बार पूरे देश के लिए प्रतिक्रिया समय का लक्ष्य तय किया है।
कॉल सेंटर को 95 प्रतिशत कॉल 20 सेकेंड में उठानी होंगी। ड्रॉप या मिस हुई 100 प्रतिशत कॉल पर वापस कॉल करना अनिवार्य होगा।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।