क्या आपने कभी सोचा है कि जन्म प्रमाण पत्र पर लिखी आपकी उम्र और आपके शरीर की असली उम्र अलग-अलग हो सकती है? हो सकता है आप 35 साल के हों, लेकिन आपका शरीर 45 साल के व्यक्ति की तरह काम कर रहा हो। यही अंतर चिकित्सा विज्ञान के लिए सबसे बड़ी पहेली बनता जा रहा है।
Health Alert: 35 की उम्र में शरीर हो गया है 45 का? कहीं कैंसर का शिकार न हो जाएं आप
कैंसर को लंबे समय तक बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता रहा, लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। दुनिया भर में 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। अब एक नए अध्ययन ने इस चिंता की एक अहम वजह सामने रखी है।
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युवा पीढ़ी की बढ़ती जैविक उम्र
कैंसर को लंबे समय तक बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता रहा, लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। दुनिया भर में 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। अब एक नए अध्ययन ने इस चिंता की एक अहम वजह सामने रखी है।
- शोध के मुताबिक आज की युवा पीढ़ी की जैविक उम्र उनकी वास्तविक यानी कैलेंडर के हिसाब से तय उम्र से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है।
- शरीर के अंग और कोशिकाएं समय से पहले बूढ़ी हो रही हैं, जिससे कम उम्र में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
नेचर मेडिसिन में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि शरीर के भीतर तेजी से बढ़ती जैविक उम्र और कम उम्र में कैंसर होने के बीच मजबूत संबंध है। यदि सामान्य रक्त परीक्षणों के जरिए ऐसे लोगों की समय रहते पहचान कर ली जाए, जिनका शरीर अंदर से तेजी से बूढ़ा हो रहा है, तो कैंसर के जोखिम को पहले ही कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
अध्ययन में क्या पता चला?
वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने ये अध्ययन किया। शोध में यूके बायोबैंक के 1.54 लाख से अधिक व अमेरिका के ऑल ऑफ अस रिसर्च प्रोग्राम के 10 हजार से ज्यादा प्रतिभागियों के स्वास्थ्य, जीवनशैली और जैविक आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।
- शोधकर्ताओं का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली इस समस्या को और गंभीर बना रही है।
- मोटापा, असंतुलित खान-पान, शराब का सेवन, लंबे समय तक बैठे रहना, बढ़ता मानसिक तनाव और प्रदूषण जैसे कारक शरीर की जैविक उम्र को तेजी से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि जैविक उम्र का तेजी से बढ़ना ही कैंसर का प्रत्यक्ष कारण है, लेकिन दोनों के बीच मजबूत संबंध जरूर सामने आया है। अध्ययन की खास बात यह भी है कि इसमें केवल कैंसर कोशिकाओं का नहीं, बल्कि पूरे शरीर में समय के साथ होने वाले जैविक बदलावों का विश्लेषण किया गया है, जिससे कैंसर के शुरुआती जोखिम को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।
2050 तक और गंभीर हो सकती है चुनौती
कैंसर के बढ़ते वैश्विक खतरे को लेकर अन्य शोध भी चिंता बढ़ा रहे हैं। लैंसेट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार 2050 तक दुनिया में कैंसर के नए मामलों की संख्या तीन करोड़ तक पहुंच सकती है, जबकि 1.86 करोड़ लोगों की मौत होने का अनुमान है।
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के मुताबिक 1990 के बाद दुनियाभर में 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर के नए मामलों में 79 प्रतिशत और इस आयु वर्ग में कैंसर से होने वाली मौतों में 27.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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