अब नवजात और छोटे बच्चों का देखभाल केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं रहेगा। जन्म के बाद तीन साल (36 महीने) तक सरकार हर बच्चे की नियमित निगरानी करेगी। अगर बच्चा कम वजन का है या समय से पहले पैदा हुआ है, उसके शारीरिक और मानसिक विकास में देरी दिखती है, तो उसे तुरंत उच्च जोखिम श्रेणी में रखकर विशेष देखभाल और इलाज दिया जाएगा।
Child Health: अब सिर्फ टीका नहीं, जन्म के बाद 3 साल तक सरकार रखेगी हर बच्चे पर नजर
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए माता-पिता को तीन साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल फोन और स्क्रीन से दूर रखने की भी सलाह दी है।
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बच्चों की देखभाल को लेकर दी जाएगी सलाह
आशा कार्यकर्ता नियमित रूप से घर जाकर मां और परिवार को बताएंगी कि केवल मां का दूध पिलाना क्यों जरूरी है।
- बच्चे की त्वचा से त्वचा का संपर्क (कंगारू मदर केयर) कितना फायदेमंद है?
- बच्चे से बात करना, खेलना और भावनात्मक जुड़ाव क्यों जरूरी है?
- घर का वातावरण साफ और सुरक्षित कैसे रखें? छह सप्ताह के बाद उम्र के अनुसार पोषण, खेल और मानसिक विकास कैसे बढ़ाएं?
गाइडलाइन में नवजात और छोटे बच्चों के कई डेंजर साइन बताए गए हैं। इनमें दूध नहीं पीना, सांस लेने में दिक्कत, बार-बार दौरे पड़ना, तेज बुखार, लगातार दस्त, मल में खून, सुस्ती या बेहोशी, सीने का ज्यादा धंसना जैसे लक्षण शामिल हैं। ऐसे मामलों में बच्चे को तुरंत अस्पताल भेजा जाएगा।
जलवायु और गर्मी से बचाव की भी सलाह
नई गाइडलाइन में पहली बार जलवायु परिवर्तन को भी बच्चों के स्वास्थ्य से जोड़ा गया है। आशा कार्यकर्ता परिवारों को तेज गर्मी और वायु प्रदूषण से बच्चों को बचाने के उपाय बताएंगी। जैसे दोपहर की तेज धूप में बच्चे को बाहर न ले जाएं। हल्के सूती कपड़े पहनाएं। नवजात को बार-बार स्तनपान कराएं। प्रदूषित हवा से बचाव करें।
- सरकार ने कहा, तीन साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल फोन, टैबलेट या अन्य स्क्रीन से दूर रखें।
- इसके बजाय बच्चों से बातचीत, कहानी सुनाने और खेलकूद के लिए प्रेरित करें।
- हर नवजात की जानकारी जननी पोर्टल और शैशव एप में दर्ज होगी।
- जोखिम वाले बच्चों को डिजिटल रूप से चिह्नित किया जाएगा, ताकि आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और डॉक्टर उनकी नियमित निगरानी कर सकें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।