मानसून अपने साथ कई तरह की बीमारियां लेकर आता है। इन दिनों में खान-पान को लेकर सावधानी बहुत जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सड़क किनारे मिलने वाले पकौड़े, चाट- गोलगप्पे बारिश के दिनों में थोड़ा संभल के खाने चाहिए। कई बार आपकी ये पसंदीदा चीजें बड़ी परेशानी का कारण बन सकती हैं।
Monsoon Disease: कुछ दिनों से खराब है पेट, उल्टी-दस्त से भी हैं परेशान? कहीं ये हेपेटाइटिस का संक्रमण तो नहीं
फूड पॉइजनिंग और हेपेटाइटिस, शुरुआत में दोनों में मतली, उल्टी, पेट खराब होना, भूख कम लगना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। आइए जानते हैं कि इसमें अंतर कैसे कर सकते हैं?
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मानसून के दिनों में पेट की समस्याएं
डॉक्टर कहते हैं, दोनों ही बीमारियों में मतली-उल्टी, पेट खराब होने और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर समय रहते बीमारी की पहचान न की जाए तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
- फूड पॉइजनिंग में जहां कई मामलों में शरीर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, वहीं हेपेटाइटिस-ए के कारण लिवर की सूजन, पीलिया और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं।
- हेपेटाइटिस-ए वायरस दूषित भोजन और पानी के जरिए फैलता है, जबकि फूड पॉइजनिंग बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी से दूषित भोजन खाने के कारण होती है।
- मानसून के दौरान नमी और गंदगी बढ़ने से दोनों तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
पहले फूड पॉइजनिंग के बारे में जानिए
फूड पॉइजनिंग, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि ये दूषित भोजन या पेय पदार्थों से होने वाली समस्या है। साल्मोनेला और ई. कोलाई को इसका प्रमुख कारण माना जाता रहा है।
- भोजन ठीक से न पकाया गया हो, लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा गया हो या अस्वच्छ तरीकों सेतैयार किया गया हो तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- फूड पॉइजनिंग के कारण मरीजों को मतली-उल्टी और दस्त के साथ पेट में ऐंठन, बुखार और कमजोरी की दिक्कत हो सकती है।
- ज्यादातर लोगों में यह बीमारी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन बच्चों-बुजुर्गों और इम्युनिटी की समस्या वाले लोगों में इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं।
कैसे जानें आपको फूड पॉइजनिंग है या हेपेटाइटिस ए?
फूड पॉइजनिंग और हेपेटाइटिस-ए दोनों बीमारियां अक्सर दूषित भोजन या पानी से जुड़ी होती हैं और शुरुआत में कई लक्षण एक जैसे दिखाई देते हैं।
- दोनों में मतली, उल्टी, पेट में दर्द, कमजोरी और कभी-कभी बुखार हो सकते हैं। हालांकि दोनों का कारण अलग-अलग होता है।
- फूड पॉइजनिंग में बैक्टीरिया, वायरस टॉक्सिन जिम्मेदार हो सकते हैं, जबकि हेपेटाइटिस-ए केवल एचएवी वायरस के कारण होता है।
- दोनों से बचाव के लिए साफ पानी पीना, भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और बाहर भोजन न खाना बेहद जरूरी है।
यदि मरीज को केवल उल्टी, दस्त और पेट दर्द है और कुछ दिनों में सुधार होने लगता है तो यह फूड पॉइजनिंग हो सकती है। लेकिन अगर कमजोरी लंबे समय तक बनी रहे, आंखें और त्वचा पीली पड़ जाएं, पेशाब गहरा हो जाए तो हेपेटाइटिस ए का खतरा हो सकता है। समय रहते डॉक्टर से इसकी जांच करा लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।