हार्ट अटैक के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, कम उम्र वाले भी इसका शिकार हो रहे हैं। हार्ट अटैक का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले छाती में तेज दर्द से कराहते व्यक्ति की तस्वीर बनती है। पर हर बार सीने में दर्द होना हार्ट अटैक ही हो, ये जरूरी नहीं है। कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षण भी इसी से मिलते-जुलते हो सकते है। आमतौर पर पैनिक अटैक के शिकार लोगों में भी बिल्कुल ऐसी ही दिक्कतें देखी जाती हैं।
Panic Attack Vs Heart Attack: पैनिक अटैक और हार्ट अटैक दोनों के लक्षण बिल्कुल एक जैसे, कैसे करें इनमें अंतर?
पैनिक अटैक एक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति है, जिसमें अचानक बहुत तेज डर, घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगती है। कई बार इसके लक्षण इतने तेज होते हैं कि लोगों को लगता है कि उन्हें हार्ट अटैक आ रहा है। पर ये दोनों अलग-अलग समस्याएं हैं। आइए इनमें अंतर जान लेते हैं।
पहले पैनिक अटैक के बारे में जान लीजिए
सीने में दर्द, दिल की धड़कन बढ़ना, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, जी मिचलाना, आमतौर पर इन लक्षणों को हार्ट अटैक का संकेत माना जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि पैनिक अटैक की समस्या भी बिल्कुल इसी तरह के लक्षणों को साथ होती है? डॉक्टर और साइकोलॉजिस्ट कहते हैं कि इन दोनों समस्याओं में अंतर को समझना हमारे लिए बहुत जरूरी है।
पैनिक अटैक, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है कि ये अचानक होने वाला अटैक है जिसमें बहुत ज्यादा डर या बेचैनी महसूस होती है। कुछ ही मिनटों में ये काफी बढ़ सकती है। इसमें भी दिल की धड़कन तेज होने, सीने में दर्द, चक्कर आने और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण होते हैं। ये समस्या आमतौर पर 20-30 मिनट तक रहती है, कुछ मामलों में ये लंबे समय तक भी बनी रह सकती है।
हार्ट अटैक और पैनिक अटैक दोनों को समझिए
हार्ट अटैक तब होता है जब आपके दिल के किसी हिस्से में खून का संचार बाधित हो जाता है। ऐसा आमतौर पर इसलिए होता है क्योंकि आपके दिल को खून सप्लाई करने वाली आर्टरी ब्लॉक हो जाती है।
वहीं पैनिक अटैक बहुत ज्यादा डर या एंग्जायटी का अचानक होने वाला अटैक है, जो आपके शरीर के फ्लाइट रिस्पॉन्स की वजह से होता है। पैनिक अटैक जानलेवा नहीं होते, लेकिन शुरुआत में ऐसा लगता है जैसे जान निकल जाएगी।
दोनों के लक्षणों को भी समझना जरूरी
हार्ट अटैक और पैनिक अटैक में फर्क करना अक्सर लोगों के लिए कठिन हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले, दोनों बीमारियों से जुड़े लक्षणों के बारे में बात करते हैं।
हार्ट अटैक के आम लक्षणों में सीने में दर्द या दबाव के साथ कुछ और समस्याएं होती है।
- दिल की धड़कन तेज होना।
- सिर चकराना या बेहोशी महसूस होना।
- ठंडा पसीना आना।
- छाती के साथ जबड़े, गर्दन, हाथ, कंधे या पीठ में दर्द होना।
- सांस लेने में तकलीफ।
- जी मिचलाना या उल्टी की समस्या होना।
- हार्ट अटैक जानलेवा हो सकता है, इसलिए समय रहते लक्षणों का पहचान और इलाज जरूरी हो जाता है।
पैनिक अटैक में भी इसी तरह की दिककतें देखी जाती है। इसमें भी सीने में दर्द और दिल की धड़कन तेज होना काफी आम है। इसके इलावा अन्य लक्षणों पर भी ध्यान देना चाहिए।
- पेट में दर्द या जी मिचलाना।
- सांस लेने में दिक्कत।
- किसी बड़ी मुसीबत का एहसास होना।
- अचानक बहुत ज्यादा चिंता और डर महसूस होना।
- कंपकंपी और कमजोरी या चक्कर आना।
- कई मामलों में, पैनिक अटैक से दिल की धड़कन तेज हो जाती है, जिसे टैकीकार्डिया भी कहते हैं। दिल की धड़कन 200 बीट प्रति मिनट या उससे भी तेज हो सकती है।
पैनिक अटैक और हार्ट अटैक में मुख्य अंतर
हार्ट और पैनिक अटैक दोनों में सीने में तकलीफ होती है, लेकिन आपको यह पता लगाना होगा कि दर्द कहां है। क्लीवलैंड क्लिनिक में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एम.बी मिलर ने इसके कुछ आम अंतर बताए हैं।
- हार्ट अटैक में, दर्द हाथ, जबड़े या गर्दन जैसी दूसरी जगहों तक फैल जाता है पर अगर यह पैनिक अटैक है तो दर्द आमतौर पर सीने में ही रहता है।
- हार्ट अटैक आमतौर पर फिजिकल स्ट्रेन या मेहनत के बाद होता है। पैनिक अटैक में ये नहीं देखा जाता है।
- पैनिक अटैक में दर्द आमतौर पर कुछ मिनट में कम हो सकता है। हार्ट अटैक में छाती का दर्द लगातार बना रहता है और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है।
दोनों ही समस्याओं में समय रहते डॉक्टर की सलाह लेना और उपचार जरूरी हो जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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