क्या आपके घर में भी नवजात या छोटे बच्चे हैं, क्या आप उनकी सेहत का सही तरीके से ख्याल रख पा रहे हैं? ये सवाल इसलिए है क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि छोटे बच्चों के लिए हम जिन चीजों का प्रयोग करते हैं उनमें से कई सिर्फ चली आ रही परंपराओं के आधार पर हैं, इसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लिहाजा जाने-अनजाने इसका बच्चे की सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है।
Children Health: अपने बच्चे को भी इन पांच चीजों से हमेशा दूर रखते हैं डॉक्टर, कहीं आप तो नहीं कर रहे इस्तेमाल?
बच्चों की देखभाल में वर्षों से इस्तेमाल होती आ रही हर चीज जरूरी नहीं कि उनके लिए सुरक्षित भी हो इसलिए बच्चों के लिए किसी भी उत्पाद का इस्तेमाल करने से पहले उसकी जरूरत, सुरक्षा और डॉक्टर की सलाह को जरूर ध्यान में रखें। डॉक्टर ने कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताया है जो वो खुद के बच्चे के लिए कभी इस्तेमाल नहीं करते।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में पीडियाट्रिशियन डॉ नकुल सिंह बताते हैं, बच्चों को नहलाने के बाद पाउडर लगाना हो या फिर आंखों में काजल, बच्चे को जल्दी चलाने की चाहत में बेबी वॉकर हो या फिर ग्राइप वॉटर का इस्तेमाल। ये सभी लंबे समय से प्रयोग में लाई जाती रहीं, शायद ही इससे कोई भी घर बचा हो। लेकिन इनके पीछे कोई खास वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
कई बार तो ओपीडी में आने वाले बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी यही चीजें हो सकती हैं। बतौर डॉक्टर मैं खुद अपने बच्चे के लिए कभी भी पांच चीजों का इस्तेमाल नहीं करता।
बच्चों की आंखों बड़ी करने के लिए काजल
बच्चे की आंखों में काजल लगाना कई परिवारों में पुरानी परंपरा है। कुछ लोगों का मानना होता है कि इससे आंखें बड़ी और सुंदर दिखती हैं। लेकिन समस्या यह है कि बाजार में मिलने वाले हर काजल की सामग्री एक जैसी नहीं होती।
- सीडीसी के विशेषज्ञों के अनुसार काजल और सुरमा जैसे पारंपरिक आंखों के सौंदर्य उत्पाद नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनमें कई बार लेड यानी सीसा की काफी मात्रा पाई गई है।
- डॉक्टर कहते हैं, बाजार में मिलने वाले या फिर घर पर ही तैयार काजल लगाने से आंखें बड़ी होने के कोई प्रमाण नहीं है, बल्कि कुछ मामलों में इससे आंखों में संक्रमण होने का खतरा जरूर हो सकता है।
बेबी पाउडर भी नुकसानदायक
बच्चे की त्वचा पर पाउडर लगाना हमारे यहां बहुत आम है। नहाने के बाद या डायपर बदलने के समय कई माता-पिता इसका इस्तेमाल करते हैं।
डॉक्टर कहते हैं, शिशुओं और बच्चों को बेबी पाउडर से बचाना चाहिए। पाउडर के सूक्ष्म कण बच्चे की सांस के साथ फेफड़ों में जाकर गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं, इससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। समस्या पाउडर से नहीं है बल्कि पाउडर के उड़कर बच्चे की नाक और मुंह के जरिए फेफड़ों में पहुंचने की है।
बेबी वॉकर का हो सकता है उल्टा असर
अक्सर माता-पिता को लगता है कि बेबी वॉकर से बच्चा अपने पैरों पर जल्दी खड़ा होना और चलना सीख जाएगा। लेकिन असलियत ये है कि वॉकर बच्चों को चलना सीखने में मदद नहीं करते। कुछ मामलों में इससे सामान्य चलने के विकास में देरी भी हो सकती है। वॉकर में बैठने से कई बार बच्चे का पूरा पैर एक समान धरती पर नहीं पड़ता, इससे उससे समय पर चलने में परेशानी हो सकती है।
इसके अलावा वॉकर में बच्चा सामान्य से कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ता है, इससे चोट लगने की भी खतरा हो सकता है।
एक अध्ययन में साल 1990 से 2014 के बीच अमेरिका के अस्पतालों में इलाज कराए गए 2,30,676 बच्चों के वॉकर से जुड़ी चोटों का विश्लेषण किया गया।
- इनमें करीब 74 फीसदी चोटें सीढ़ियों से गिरने के कारण हुई थीं और करीब 91 फीसदी चोटें सिर या गर्दन से जुड़ी थीं।
- वॉकर में बच्चे के साथ हादसा उस समय भी हो सकता है जब कोई बड़ा व्यक्ति पास में मौजूद हो, क्योंकि बच्चा बहुत तेजी से आगे बढ़ सकता है।
ग्राइप वॉटर और मिटेंस के नुकसान
- अक्सर नवजात बच्चे को गैस, पेट दर्द या रोने को कम करने के लिए ग्राइप वॉटर या जन्मघुट्टी दिया जाता है। लेकिन इसके फायदे के पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। नवजात को बिना डॉक्टर की सलाह के इसे देना ठीक नहीं माना जाता। कुछ ग्राइप वॉटर में चीनी, सोडियम बाइकार्बोनेट या जड़ी-बूटियां हो सकती हैं, जिससे बच्चे को नुकसान भी हो सकता है।
- इसके अलावा कई घरों में नवजातों के हाथों में मिटेंस पहना दी जाती है ताकि बच्चे पने चेहरे पर नाखून से खरोंच न लगा दे लेकिन इन्हें लंबे समय तक पहनाए रखना सही नहीं माना जाता। मिटेंस बच्चे की उंगलियों की प्राकृतिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं। अगर मिटेंस गीले या गंदे हो जाएं तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।