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World Arthritis Day 2025: बिना दवाई गठिया को ठीक करने का सबसे असरदार तरीका है ये तरीका, डॉक्टर से जानें
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिखर बरनवाल
Updated Sun, 12 Oct 2025 02:40 PM IST
सार
Physiotherapy for Joint Pain: आज वर्ल्ड आर्थराइटिस डे है और आइए इस मौके पर जानते हैं कि गठिया रोग के लिए फिजियोथेरेपी कितना कारगर हो सकता है। साथ ही ये भी जानेंगे कि क्या फिजियोथेरेपी ज्वाइंट रिप्लेसमेंट जैसी को भी टाल सकता है?
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फिजियोथेरेपी
- फोटो : Adobe Stock
World Arthritis Day 2025 physiotherapy: हर साल 12 अक्तूबर को 'वर्ल्ड आर्थराइटिस डे' मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य गठिया और मस्कुलोस्केलेटल रोगों के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है। आज के समय में दुनिया भर के कई विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि गठिया के दर्द और सूजन को प्रबंधित करने के लिए केवल दवाइयों पर निर्भर रहना एकमात्र उपाय नहीं है।
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फिजियोथेरेपी
- फोटो : Adobe Stock
डॉक्टर बरनवाल बताते हैं कि फिजियोथेरेपी गठिया के इलाज में दवाओं पर निर्भरता को काफी कम कर सकती है। यह थेरेपी मुख्य रूप से जोड़ों को सक्रिय रखने और सूजन को नियंत्रित करने पर केंद्रित होती है। इसके साथ ही यह मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
मजबूत मांसपेशियां जोड़ों को बेहतरीन सहारा प्रदान करती हैं, जिससे उन पर आने वाला तनाव कम होता है और मरीज को दर्द में प्रभावी ढंग से राहत मिलती है। यह गठिया प्रबंधन का एक प्राकृतिक और दीर्घकालिक तरीका है।
मजबूत मांसपेशियां जोड़ों को बेहतरीन सहारा प्रदान करती हैं, जिससे उन पर आने वाला तनाव कम होता है और मरीज को दर्द में प्रभावी ढंग से राहत मिलती है। यह गठिया प्रबंधन का एक प्राकृतिक और दीर्घकालिक तरीका है।
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फिजियोथेरेपी
- फोटो : Adobe Stock
फिजियोथेरेपी में गठिया के मरीजों के लिए कई तरह के उपचार होते हैं। डॉक्टर बरनवाल बताते हैं कि इसमें मरीज की जरूरत के हिसाब से खास स्ट्रेचिंग अभ्यास, मांसपेशियों की मजबूती बढ़ाने वाले व्यायाम और मोबिलाइजेशन तकनीकें सिखाई जाती हैं। इन अभ्यासों का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज के जोड़ ज्यादा लचकदार और गतिशील बनें।
इन थेरेपी को रोजाना अपनाने से जोड़ों की अकड़न कम होती है, दर्द में राहत मिलती है, और मरीज की दैनिक गतिविधियां आसान हो जाती हैं, जिससे जीवन की गुणवत्ता सुधरती है।
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इन थेरेपी को रोजाना अपनाने से जोड़ों की अकड़न कम होती है, दर्द में राहत मिलती है, और मरीज की दैनिक गतिविधियां आसान हो जाती हैं, जिससे जीवन की गुणवत्ता सुधरती है।
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फिजियोथेरेपी
- फोटो : Adobe Stock
फिजियोथेरेपी केवल दर्द ठीक नहीं करती, बल्कि इसका लक्ष्य मरीजों को बिना सहारे चलने के लिए स्वतंत्र बनाना है। जब दर्द कम होता है और जोड़ बेहतर काम करते हैं, तो मरीज बिना सहारे के चल-फिर सकते हैं, कपड़े पहन सकते हैं और दैनिक कार्य कर सकते हैं। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है।
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फिजियोथेरेपी
- फोटो : Freepik.com
सर्जरी तक को टालने में सहायक
डॉक्टर मान्वेंद्र बरवाल के मुतबिक, गठिया के शुरुआती या मध्यम चरण में अगर नियमित रूप से फिजियोथेरेपी की जाए, तो कई बार ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी को भी टाला जा सकता है। यह उपचार न केवल दर्द का प्रबंधन करता है बल्कि जोड़ों के घिसाव की गति को भी धीमा करने में मदद करता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
डॉक्टर मान्वेंद्र बरवाल के मुतबिक, गठिया के शुरुआती या मध्यम चरण में अगर नियमित रूप से फिजियोथेरेपी की जाए, तो कई बार ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी को भी टाला जा सकता है। यह उपचार न केवल दर्द का प्रबंधन करता है बल्कि जोड़ों के घिसाव की गति को भी धीमा करने में मदद करता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।