World Arthritis Day 2025: आजकल की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोगों का पॉश्चर खराब हो गया है। अक्सर ये देखने को मिलता है कि लोग लंबे समय तक डेस्क पर काम करने या फोन का स्क्रीन देखने की वजह से गर्दन झुकाए रहते हैं, इससे शरीर का वजन और गुरुत्वाकर्षण जोड़ों पर असमान रूप से दबाव डालता है। यह अतिरिक्त दबाव घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी के कार्टिलेज को समय से पहले प्रभावित करने लगता है, जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी गठिया की समस्या शुरू हो सकती है।
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World Arthritis Day 2025: आपकी 'बैठने की आदत' बिगाड़ सकती है जोड़ों की सेहत, जानें क्यों जरूरी है सही पॉश्चर?
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिखर बरनवाल
Updated Sun, 12 Oct 2025 11:34 AM IST
सार
आज के समय में बहुत से लोगों में देखने को मिलता है कि कम उम्र में ही गठिया की समस्या से परेशान रहते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिसमें से एक बड़ा कारण आपका खराब पाश्चर भी हो सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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World Arthritis Day 2025
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खराब पॉश्चर
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गलत पॉश्चर और जोड़ों पर दबाव
गलत तरीके से बैठने या खड़े होने पर जोड़ों पर ओवरलोडिंग होती है। उदाहरण के लिए आगे की ओर झुककर बैठने से रीढ़ और कूल्हों पर सामान्य से कहीं ज्यादा दबाव पड़ता है। यह अतिरिक्त तनाव धीरे-धीरे कार्टिलेज को खत्म कर देता है और जोड़ों में सूजन पैदा करता है, जो सीधे गठिया के दर्द को जन्म देता है।
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गलत तरीके से बैठने या खड़े होने पर जोड़ों पर ओवरलोडिंग होती है। उदाहरण के लिए आगे की ओर झुककर बैठने से रीढ़ और कूल्हों पर सामान्य से कहीं ज्यादा दबाव पड़ता है। यह अतिरिक्त तनाव धीरे-धीरे कार्टिलेज को खत्म कर देता है और जोड़ों में सूजन पैदा करता है, जो सीधे गठिया के दर्द को जन्म देता है।
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दफ्तर में काम करते समय पोश्चर का रखें ध्यान
- फोटो : Adobe
सही पॉश्चर क्या है?
सही पॉश्चर वह है जिसमें आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और कान, कंधे, और कूल्हे एक सीध में हों। यह पॉश्चर सुनिश्चित करता है कि शरीर का वजन जोड़ों पर समान रूप से वितरित हो। सही पॉश्चर अपनाने से न केवल जोड़ों का तनाव कम होता है, बल्कि रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियां मजबूत बनी रहती हैं।
ये भी पढ़ें- Cold & Cough: मौसम बदलते ही हो गया सर्दी-जुकाम? इन उपायों से बिना दवा के भी पा सकते हैं आराम
सही पॉश्चर वह है जिसमें आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और कान, कंधे, और कूल्हे एक सीध में हों। यह पॉश्चर सुनिश्चित करता है कि शरीर का वजन जोड़ों पर समान रूप से वितरित हो। सही पॉश्चर अपनाने से न केवल जोड़ों का तनाव कम होता है, बल्कि रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियां मजबूत बनी रहती हैं।
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खराब पॉश्चर
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काम करते समय पॉश्चर सुधारने के उपाय
डेस्क पर काम करते समय, अपनी कुर्सी को इस तरह से एडजस्ट करें कि आपके पैर जमीन पर सपाट रहें और घुटने कूल्हों के स्तर पर हों। मॉनिटर आपकी आंखों के लेवल पर होना चाहिए ताकि गर्दन न झुके। इसके बाद हर 30 मिनट में उठकर टहलना और स्ट्रेचिंग करना जोड़ों को जाम होने से बचाएगा।
डेस्क पर काम करते समय, अपनी कुर्सी को इस तरह से एडजस्ट करें कि आपके पैर जमीन पर सपाट रहें और घुटने कूल्हों के स्तर पर हों। मॉनिटर आपकी आंखों के लेवल पर होना चाहिए ताकि गर्दन न झुके। इसके बाद हर 30 मिनट में उठकर टहलना और स्ट्रेचिंग करना जोड़ों को जाम होने से बचाएगा।
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खराब पॉश्चर
- फोटो : Adobe Stock
आज ही लें संकल्प
'विश्व गठिया दिवस' 2025 के थीम 'अचीव योर ड्रीम्स' को ध्यान में रखते हुए, यह आवश्यक है कि आप अपने जोड़ों को स्वस्थ रखकर अपने सपनों की ओर बढ़ें। सही पॉश्चर बनाए रखने का आज से ही मन में ठान लें। छोटे-छोटे बदलाव आपकी लंबी उम्र और दर्द-मुक्त जीवन की नींव बन सकते हैं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
'विश्व गठिया दिवस' 2025 के थीम 'अचीव योर ड्रीम्स' को ध्यान में रखते हुए, यह आवश्यक है कि आप अपने जोड़ों को स्वस्थ रखकर अपने सपनों की ओर बढ़ें। सही पॉश्चर बनाए रखने का आज से ही मन में ठान लें। छोटे-छोटे बदलाव आपकी लंबी उम्र और दर्द-मुक्त जीवन की नींव बन सकते हैं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।