शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर क्यों गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी हो जाता है, इन्हें नजरअंदाज कर देना किस तरह से भारी पड़ सकता है? एक हालिया केस में इसका जीता जागता उदाहरण सामने आया है। एक महिला जो कुछ समय से शौच की आदतों में बदलाव और बवासीर जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करती आ रही थी, जांच के दौरान उसे रेक्टल कैंसर का शिकार पाया गया है। 66 साल की दो बच्चों की मां ने बताया कि कैसे उन्होंने इस जानलेवा बीमारी के एक आम लक्षण को नजरअंदाज कर दिया था और आज वह जिंदा हैं यह उनकी खुशकिस्मती है।
Rectal Cancer: पाइल्स समझकर कर रहे थे इग्नोर निकला रेक्टल कैंसर, मरीज ने बताई चौंकाने वाली आपबीती
अक्सर लोग मल में खून आने जैसे लक्षणों को साधारण पाइल्स (बवासीर) समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि कई मामलों में यही लक्षण गंभीर बीमारी खासकर रेक्टल कैंसर का संकेत भी हो सकता है।
मान रहे थे बवासीर निकला रेक्टल कैंसर
स्थानीय मीडिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार 66 वर्षीय जेन को सबसे पहले जनवरी 2021 में महसूस किया कि शरीर में कुछ तो गड़बड़ है। उन्हें पहले तो लगा ये बवासीर है। जहां बवासीर अक्सर कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है, वहीं लॉक के लक्षण महीनों तक बने रहे। जिसके बाद उन्होंने जुलाई में उन्होंने अपने डॉक्टर की सलाह ली।
- डॉक्टर ने कहा, आप अपनी उम्र के लोगों में मेरी लिस्ट में सबसे फिट इंसान हैं, बस इस गांठ को छोड़कर।
- लगभग छह हफ्ते बाद, सितंबर में फिर से जांच के दौरान डॉक्टरों को एहसास हुआ कि कुछ बहुत ज्यादा गंभीर है। रिपोर्ट में पता चला कि यह रेक्टल कैंसर है।
नवंबर 2021 में उनका इलाज और कीमोथेरेपी शुरू हुई। उसके बाद उन्हें रोजाना रेडियोथेरेपी के साथ-साथ कीमोथेरेपी की गोलियां भी दी जाने लगीं। जेन कहती हैं, मैं जिंदा हूं ये मेरी खुशकिस्मती है। हालांकि लोगों को मेरी तरह से अपने लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।
रेक्टल कैंसर के बारे में जानिए
रेक्टल कैंसर, रेक्टम में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को कहा जाता होता है। रेक्टम हमारी बड़ी आंत के आखिरी का कुछ इंच का हिस्सा होता है। रेक्टम के अंदर होने वाले कैंसर और कोलन के अंदर होने वाले कैंसर को अक्सर 'कोलोरेक्टल कैंसर' कहा जाता है।
- इस तरह के कैंसर में आपको रेक्टम से खून आने या शौच के तरीके और समय में बदलाव जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
- अगर आपके परिवार में पहले किसी को रेक्टल कैंसर हुआ हो या आपको कोई आनुवंशिक बीमारी हो, तो आपको रेक्टल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
इस कैंसर की पहचान कैसे की जाए?
रेक्टल कैंसर आपके पाचन तंत्र में होने वाला तीसरा सबसे आम कैंसर है। कोलन कैंसर और पैंक्रियाटिक कैंसर के बाद इसके मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। आमतौर पर इसके लक्षण पाचन की समस्याओं और बवासीर से मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए इस कैंसर के लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।
कई मामलों में रेक्टल कैंसर के शुरुआत में कोई भी लक्षण दिखाई ही नहीं देते। हालांकि, जैसे-जैसे ये समस्या बढ़ती जाती है आपको कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं।
- दस्त-कब्ज और शौच से खून आना।
- शौच करने के तरीके और समय में अचानक बदलाव आना।
- शौच का धागे जैसा या पतला दिखना।
- थकान-कमजोरी बना रहना।
- पेट में दर्द रहना।
- बिना किसी वजह के वजन कम होना।
क्या है इस कैंसर का कारण?
रेक्टल कैंसर के लिए मुख्यरूप से जेनेटिक म्यूटेशन की वजह से होता है। इसके अलावा खान-पान में गड़बड़ी और लाइफस्टाइल की समस्याओं के कारण भी ये कैंसर हो सकता है।
- आहार में फाइबर की कमी, प्रोसेस्ड मीट और फैट वाली चीजें ज्यादा खाने से भी कैंसर का जोखिम हो सकता है।
- शारीरिक रूप से सक्रिय में कमी, बैठे रहने वाली जीवनशैली, धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन के कारण भी कैंसर हो सकता है।
- आंतों की सूजन से जुड़ी क्रॉनिक बीमारियां जैसे क्रोहन डिजीज या अल्सरेटिव कोलाइटिस भी इसका जोखिम बढ़ा देती है।
--------------
स्रोत:
'I thought I had piles, but it was rectal cancer'
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
कमेंट
कमेंट X