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Thyroid Problems: स्ट्रेस-डिप्रेशन नहीं, थायरॉइड भी हो सकता है आपकी उदासी का असली कारण

Sat, 04 Jul 2026 07:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 04 Jul 2026 07:10 PM IST
सार

अगर स्ट्रेस, डिप्रेशन, घबराहट, मूड स्विंग, लगातार थकान या याददाश्त से जुड़ी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें, तो ये केवल मानसिक बीमारी हो ये जरूरी नहीं है। सही समय पर थायरॉइड की जांच कराना कई गंभीर समस्याओं से बचा सकता है।

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थायरॉइड की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

क्या आपको भी कुछ समय से बहुत ज्यादा उदासी, अकेलापन या टेंशन जैसा महसूस हो रहा है? आमतौर पर इस तरह की समस्याओं को स्ट्रेस-एंग्जाइटी या फिर डिप्रेशन का लक्षण मान लिया जाता है। हालांकि हर बार ये लक्षण मेंटल हेल्थ समस्याओं के ही हों ये जरूरी नहीं है। कई बार कुछ शारीरिक समस्याओं के कारण भी आपके ये दिक्कतें हो सकती हैं।



विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्ट्रेस-डिप्रेशन, घबराहट, मूड स्विंग और लगातार थकान से जुड़ी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार ये संकेत थायरॉइड विकारों के भी हो सकते हैं। सही समय पर थायरॉइड की जांच कराना कई गंभीर समस्याओं से बचा सकता है। 

अब सवाल ये है कि थायरॉइड का मानसिक स्वास्थ्य से क्या संबंध है। अक्सर मोटापा का कारण मानी जाने वाली ये बीमारी कैसे आपके मेंटल हेल्थ को प्रभावित करने लगती है? आइए इस बारे में विस्तार से समझ लेते हैं।

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थायरॉइ़ड की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Adobe Stock

थायरॉइड के कारण होने वाली दिक्कतें

यहां जानना जरूरी है कि हमारे गर्दन में सामने की ओर मौजूद तितली के आकार की छोटी-सी थायरॉइड ग्रंथि शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करती है। 

  • यह ऐसे हार्मोन बनाती है जो शरीर की ऊर्जा और तापमान, मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन और यहां तक कि दिमाग के काम करने के तरीके को भी नियंत्रित करते हैं। 
  • जब थायरॉइड हार्मोन जरूरत से कम या ज्यादा बनने लगते हैं, तो इसका असर केवल शरीर पर ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगता है।


यही कारण है कि कई लोगों में महीनों तक डिप्रेशन या एंग्जायटी का इलाज चलता रहता है, लेकिन जब थायरॉइड टेस्ट कराया जाता है तो असली वजह सामने आती है। खास बात यह है कि थायरॉइड से जुड़े मानसिक लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि उन्हें पहचानना आसान नहीं होता।

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थायरॉइड की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com

थायरॉइड का दिमाग पर कैसे होता है असर?

थायरॉइड ग्रंथि T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) और T4 (थायरोक्सिन ) हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करते हैं। 
 

  • जब इन हार्मोनों का स्तर असंतुलित होता है तो दिमाग में सेरोटोनिन, डोपामिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर प्रभावित हो सकते हैं। 
  • यही वजह है कि व्यक्ति को उदासी, घबराहट, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और सोचने-समझने में कठिनाई महसूस हो सकती है।
  • लंबे समय तक अनियंत्रित थायरॉइड मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
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तनाव-थकान का रहते हैं शिकार? - फोटो : Freepik.com
कैसे पहचानें कि स्ट्रेस-एंग्जाइटी थायरॉइड की वजह से है?

हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन कम बनना) में व्यक्ति को लगातार थकान, उदासी, डिप्रेशन, काम में रुचि कम होने, याददाश्त और नींद अधिक आने जैसी समस्याएं महसूस होती हैं। यदि इन लक्षणों के साथ वजन बढ़ रहा हो, कब्ज की दिक्कत हो, ठंड ज्यादा लगे या त्वचा में रूखापन बढ़ रही है तो थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। 
 
  • कई बार डॉक्टर एंटी-थायरॉइड एंटीबॉडी टेस्ट भी लिख सकते हैं। 
  • महिलाओं, गर्भावस्था के दौरान या मेनोपॉज के दौरान यह खतरा अधिक होता है। 
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नियमित योग की बनाएं आदत - फोटो : Amarujala.com/AI

लाइफस्टाइल में भी करें सुधार

अगर आपमें थायरॉइड के कारण स्ट्रेस-घबराहट की समस्या है तो दवाओं के साथ लाइफस्टाइल में भी सुधार करना बहुत जरूरी हो जाता है। 
 

  • संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम भी महत्वपूर्ण हैं। 
  • आयोडीन, सेलेनियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्व थायरॉइड के लिए जरूरी हैं, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट नहीं लेने चाहिए। 
  • योग, मेडिटेशन और नियमित दिनचर्या मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाते हैं। 
  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचना चाहिए क्योंकि ये हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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