क्या ब्रश करते समय आपके मसूड़ों में दर्द रहता है और खून भी निकलता है? मुंह से अक्सर बदबू आती रहती है? अगर हां तो तुरंत डॉक्टर से इसकी जांच करा लें, कहीं ये पायरिया का संकेत तो नहीं है?
Periodontitis: कहीं आपको भी तो नहीं हो गया है पायरिया? मुंह में ये दिक्कतें हैं तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास
अधिकांश लोग पायरिया को केवल दांतों से जुड़ी मामूली परेशानी मानते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। यह बीमारी धीरे-धीरे मसूड़ों, दांतों को पकड़कर रखने वाली हड्डियों और आसपास के ऊतकों को नुकसान पहुंचाती है।
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पेरियोडोंटाइटिस की समस्या
पेरियोडोंटाइटिस का संक्रमण दांतों से होते हुए मसूड़ों से नीचे पहुंचकर दांतों की हड्डियों को नुकसान पहुंचाने लगता है। इससे धीरे-धीरे मसूड़े कमजोर होने लगते हैं और दांत गिर भी सकते हैं।
पायरिया के शुरुआती दौर में लक्षण अक्सर बहुत हल्के होते हैं। अक्सर लोग मसूड़ों से खून आने, मुंह की बदबू या हल्का दर्द जैसी समस्याओं को सामान्य समझकर महीनों तक टालते रहते हैं। इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा हो सकता है। इसलिए मुंह की दिक्कतों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है।
- ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना, मसूड़ों में सूजन, मुंह से लगातार बदबू आती है तो अलर्ट हो जाएं।
- कई लोगों में मसूड़ों और दांतों के बीच गैप बनने लगता है।
- यदि दांत हिलने लगें या चबाते समय दर्द महसूस हो तो ये संक्रमण बढ़ने का संकेत हो सकता है।
क्यों होती है पायरिया की समस्या?
डॉक्टर कहते हैं, पायरिया होने का मुख्य कारण मुंह की सफाई में कमी को माना जाता है। जब दांतों और मसूड़ों पर बैक्टीरिया की चिपचिपी परत जम जाती है तो यह संक्रमण का रूप ले लेती है।
- खराब ओरल हाइजीन के अलावा धूम्रपान-तंबाकू की आदत भी खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।
- इसके अलावा डायबिटीज, इम्युनिटी की समस्या, हार्मोनल बदलाव और विटामिन सी की कमी भी इसके जोखिम को बढ़ाते हैं।
- जो लोग नियमित रूप से ब्रश और फ्लॉस नहीं करते, उनमें भी यह बीमारी तेजी से बढ़ सकती है।
पायरिया हो जाए तो क्या करें?
यदि मसूड़ों से लगातार खून आए, बदबू बनी रहे या दांत हिलने लगें तो तुरंत दंत चिकित्सक से संपर्क करें। डॉक्टर स्केलिंग, रूट प्लानिंग और दवाओं की मदद से संक्रमण के खतरे को कम कर सकते हैं। इसके अलावा नमक के गुनगुने पानी से कुल्ला, सही तरीके से ब्रश करना और फ्लॉस करना मसूड़ों की सफाई में मदद कर सकते हैं।
- दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें।
- हर 6 महीने में डेंटल चेकअप कराएं, ताकि दांतो की समस्याओं का समय रहते पता किया जा सके।
- शुरुआती इलाज से दांत बचाए जा सकते हैं और जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।