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Recurrent UTI: कुछ लोगों को क्यों होता है बार-बार यूरिन इंफेक्शन? कहीं ये किसी बड़ी बीमारी का संकेत तो नहीं

Fri, 07 Aug 2026 06:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 07 Aug 2026 06:51 PM IST
सार

यदि बार-बार यूटीआई हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि बार-बार संक्रमण किडनी तक भी पहुंच सकता है और गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आने की इच्छा या पेट के निचले हिस्से में दर्द ये सभी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) के सामान्य लक्षण हैं। 

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Recurrent UTI causes know Common Causes of Frequent Urinary Tract Infections and Prevention Tips
यूटीआई का जोखिम - फोटो : Amarujala.com

क्या आपको भी अक्सर पेशाब करते समय जलन होती है, बार-बार पेशाब की इच्छा होती है और पेट के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है? अगर हां तो सावधान हो जाइए ये सभी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) के लक्षण हो सकते हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अधिकतर लोगों को जीवन में कभी न कभी यूटीआई हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में यह समस्या बार-बार लौट आती है।



यूटीआई को आमतौर पर महिलाओं की समस्या माना जाता है, जबकि ये पुरुषों को भी हो सकती है। डॉक्टर कहते हैं, किसी व्यक्ति को छह महीने में दो या उससे अधिक बार यूटीआई हो, तो इसे बार-बार होने वाला यूटीआई माना जाता है। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक होती है क्योंकि उनकी मूत्रमार्ग छोटी होती है। इससे बैक्टीरिया आसानी से मूत्राशय तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा बुजुर्गों, डायबिटीज के मरीजों और गर्भवती महिलाओं में भी इसका जोखिम बढ़ जाता है।

तो क्या आप भी इस समस्या से अक्सर परेशान रहते हैं?

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यूटीआई की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Adobe Stock

सबसे पहले जानिए यूटीआई होती क्यों है?

डॉक्टर बताते हैं, यूटीआई होने का सबसे आम कारण ई. कोलाई बैक्टीरिया का संक्रमण है, जो सामान्य रूप से आंत में पाया जाता है।  जब यह मूत्र मार्ग में पहुंच जाता है तो संक्रमण पैदा कर सकता है।  लगभग 80-90 प्रतिशत यूटीआई के मामले इसी बैक्टीरिया के कारण होते हैं। यदि बार-बार यूटीआई हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि बार-बार संक्रमण किडनी तक भी पहुंच सकता है और गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। 

आइए समझ लेते हैं कि कुछ लोगों को बार-बार ये दिक्कत क्यों होती है?

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कम पानी पीने से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock

कहीं कम पानी तो नहीं है इसका कारण?

जो लोग पूरे दिन बहुत कम पानी पीते हैं या लंबे समय तक पेशाब रोककर रखते हैं, उनमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने से पेशाब होता रहता है जिससे बैक्टीरिया को बाहर निकलने में मदद मिलती है।
 

  • पानी कम पीने से पेशाब कम बनता है और बैक्टीरिया लंबे समय तक मूत्राशय में बने रह सकते हैं। दिनभर में कम से कम 2-3 लीटर पानी पीते रहना आपके खतरे को कम कर सकता है।
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डायबिटीज और यूटीआई - फोटो : Adobe Stock

अक्सर शुगर हाई रहना नुकसानदायक
 

डायबिटीज की स्थिति में खून और पेशाब दोनों में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। अधिक ग्लूकोज बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ावा दे सकता है।
 

  • इसके अलावा डायबिटीज के कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली भी कमजोर हो जाती जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।
  • यही वजह है कि बार-बार यूटीआई होने वाले मरीजों में ब्लड शुगर की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
  • डायबिटीज के मरीजों को यूटीआई को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।
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यूटीआई की समस्या और इसके खतरे - फोटो : Adobe stock photos

इन कारणों को भी जानिए
 

  • महिलाओं में जननांगों की साफ-सफाई में कमी भी बैक्टीरिया को मूत्रमार्ग तक पहुंचा सकती है। साफ अंडरगारमेंट न पहनना और लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना संक्रमण के जोखिम को बढ़ाने वाला हो सकता है।
  • बढ़ा हुआ प्रोस्टेट, किडनी स्टोन, न्यूरोलॉजिकल रोग या मूत्राशय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसके कारण भी कई लोगों में बार-बार यूटीआई होने का खतरा रहता है।
  • रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से योनि और मूत्रमार्ग की प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर हो सकती है, जिससे यूटीआई का खतरा बढ़ता है।
  • कुछ महिलाओं में यौन संबंध के बाद भी बैक्टीरिया मूत्रमार्ग में पहुंच सकते हैं। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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