दुनियाभर में कैंसर को सबसे घातक बीमारियों में से एक माना जाता है। हालांकि हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने एक अन्य बीमारी को इंसानों के लिए इससे भी खतरनाक बताया है। अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 2050 तक सेप्सिस रोग से मरने वालों की संख्या, कैंसर और हृदय रोगों से अधिक हो जाएगी। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2017 में दुनिया भर में सेप्सिस के 48.9 मिलियन (4.89 करोड़) से ज्यादा मामले सामने आए जिसमें 1.1 करोड़ से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
विशेषज्ञों की चेतावनी: कैंसर से भी खतरनाक इस बीमारी से रहें सुरक्षित, कोविड के दौर में बढ़ गए हैं मामले
भारत में खतरा अधिक
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में भारत में सेप्सिस के कारण होने वाली मृत्युदर भी काफी अधिक है। हाल ही में एक बयान में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा कहते हैं, सेप्सिस के खतरे पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितना कि आवश्यक था। नीति के दृष्टिकोण से इस मामले में हम पीछे हैं, लेकिन खतरा बढ़ रहा है। इसके लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को विशेष ध्यान देते हुए इसकी रोकथाम के लिए उपायों पर विचार करना होगा। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू, मलेरिया, यूटीआई या यहां तक कि दस्त जैसी बीमारियों के कारण भी सेप्सिस हो सकता है। ऐसे में इससे बचाव के उपायों पर ध्यान देना आवश्यक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सेप्सिस एक मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति है। इसमें अलग-अलग समय पर लोगों में विभिन्न प्रकार के लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें समझना और तुरंत उपचार के लिए जाना सबसे आवश्यक होता है। इस समस्या का समय रहते निदान करने के लिए लक्षणों को जानना बेहद आवश्यक होता है
- हल्का बुखार और कंपकंपी की समस्या।
- मानसिक स्थिति में बदलाव।
- सांस लेने में कठिनाई या तेजी से सांस लेना।
- हृदय की गति का बढ़ जाना।
- ब्लड प्रेशर लो होने की समस्या।
- त्वचा पर धब्बे बनना।
- शरीर में तेज दर्द या बेचैनी की समस्या होना।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी प्रकार के संक्रमण जैसे निमोनिया, पेट या किडनी में संक्रमण के कारण सेप्सिस की समस्या ट्रिगर हो सकती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जनरल मेडिकल साइंसेज के अनुसार, सेप्सिस के मामलों में हर साल हो रही बढ़ोतरी की मुख्य वजह सामने आई हैं।
- उम्र बढ़ना,उम्रदराज लोगों में सेप्सिस का खतरा अधिक होता है।
- एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या। आमतौर पर यह तब होता है जब संक्रमण से मुकाबले में एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं कर पाती हैं।
- प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करने वाली बीमारियों की बढ़ती संख्या।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि समय रहते सेप्सिस का इलाज न किया जाए तो यह समस्या सेप्टिक शॉक और मौत में बदल सकती है। इसके इलाज के लिए डॉक्टर स्थिति की आवश्यकताओं को देखते हुए संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक्स और रक्तचाप बढ़ाने वाली दवाएं दे सकते हैं। ब्लड शुगर को स्थिर करने के लिए इंसुलिन देने की भी जरूरत हो सकती है। डॉक्टर कहते हैं सभी लोगों को सेप्सिस से बचाव के उपायों का पालन करना चाहिए।
- फ्लू, निमोनिया और अन्य संक्रमणों के लिए टीकाकरण जरूर कराएं।
- स्वच्छता का ध्यान रखें। यदि शीरर में कहीं घाव है तो उसकी उचित देखभाल करे, हाथों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- सेप्सिस के इलाज की बात आती है तो यहां हर मिनट मायने रखता है। जितनी जल्दी आप इलाज करवाएंगे, परिणाम उतना ही बेहतर होगा।
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स्रोत और संदर्भ:
Sepsis is a syndromic response to infection
अस्वीकरण नोट: यह लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुझावों के अनुसार तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।