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Monsoon Health Care: बरसात में भी कूलर के सामने सोते हैं ? जान लें इसका सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है
Thu, 13 Aug 2026 05:19 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Thu, 13 Aug 2026 05:19 PM IST
सार
Can Air Coolers Cause Health Issues In Monsoon: बारिश के मौसम में लोग किसी न किसी बीमारियों से परेशान रहते हैं। पर, क्या इसकी वजह आपका कूलर हो सकता है ? आइए जानते हैं इस बारे में....
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मानसून में कूलर इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : AI
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Can Air Coolers Cause Health Issues In Monsoon: बारिश के मौसम में गर्मी और उमस से राहत पाने के लिए कूलर का इस्तेमाल आम बात है। कई लोग रातभर कूलर चलाकर सोते हैं और ठंडी हवा के लिए उसे बिस्तर के बिल्कुल सामने रखते हैं। लेकिन मानसून में कूलर का इस्तेमाल करते समय सेहत को लेकर थोड़ी सावधानी जरूरी है।
मानसून में कूलर इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : AI
मानसून में कूलर से क्यों बढ़ सकती है एलर्जी?
कूलर पानी के जरिए हवा को ठंडा करता है। मानसून में वातावरण में पहले से ही नमी अधिक रहती है। ऐसे में कूलर लगातार चलने से कमरे की ह्यूमिडिटी और बढ़ सकती है। ज्यादा नमी फंगस और अन्य एलर्जेंस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना सकती है।
जिन लोगों को धूल, फंगस या अन्य एलर्जी है, उनमें इसके संपर्क से छींक, नाक बहना, नाक बंद होना, आंखों में जलन और खांसी जैसी परेशानी हो सकती है।
कूलर पानी के जरिए हवा को ठंडा करता है। मानसून में वातावरण में पहले से ही नमी अधिक रहती है। ऐसे में कूलर लगातार चलने से कमरे की ह्यूमिडिटी और बढ़ सकती है। ज्यादा नमी फंगस और अन्य एलर्जेंस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना सकती है।
जिन लोगों को धूल, फंगस या अन्य एलर्जी है, उनमें इसके संपर्क से छींक, नाक बहना, नाक बंद होना, आंखों में जलन और खांसी जैसी परेशानी हो सकती है।
मानसून में कूलर इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : AI
गंदा कूलर बढ़ा सकता है सांस की परेशानी
कूलर की टंकी, पानी और कूलिंग पैड की नियमित सफाई न होने पर उनमें गंदगी और फंगस जमा हो सकती है। कूलर चलने पर हवा के साथ ये कण कमरे में फैल सकते हैं। एलर्जी या अस्थमा से परेशान लोगों के लिए यह समस्या ज्यादा परेशान करने वाली हो सकती है।
कूलर की टंकी, पानी और कूलिंग पैड की नियमित सफाई न होने पर उनमें गंदगी और फंगस जमा हो सकती है। कूलर चलने पर हवा के साथ ये कण कमरे में फैल सकते हैं। एलर्जी या अस्थमा से परेशान लोगों के लिए यह समस्या ज्यादा परेशान करने वाली हो सकती है।
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मानसून में कूलर इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : AI
क्या कूलर के सामने सोना नुकसानदायक है?
सिर्फ कूलर के सामने सोने को बीमारी की सीधी वजह नहीं माना जा सकता। असली चिंता कमरे की ज्यादा नमी, खराब वेंटिलेशन और गंदे कूलर से जुड़ी है। अगर कूलर की हवा से आपको खांसी, नाक बंद होने या आंखों में जलन जैसी परेशानी महसूस होती है, तो उसकी दिशा बदलना और सफाई करना बेहतर है।
सिर्फ कूलर के सामने सोने को बीमारी की सीधी वजह नहीं माना जा सकता। असली चिंता कमरे की ज्यादा नमी, खराब वेंटिलेशन और गंदे कूलर से जुड़ी है। अगर कूलर की हवा से आपको खांसी, नाक बंद होने या आंखों में जलन जैसी परेशानी महसूस होती है, तो उसकी दिशा बदलना और सफाई करना बेहतर है।
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मानसून में कूलर इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
- फोटो : AI
मानसून में कूलर इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
- कूलर की टंकी और पानी को नियमित रूप से साफ करें।
- कूलिंग पैड्स में गंदगी या फंगस दिखाई दे तो उन्हें साफ करें या बदलें।
- कमरे में वेंटिलेशन यानी हवा के आने-जाने की व्यवस्था रखें।
- कमरे में अत्यधिक नमी होने पर कूलर का इस्तेमाल सीमित करें।
- कूलर की हवा सीधे चेहरे पर रखने से बचें, खासकर अगर इससे आपको असहजता होती है।
- लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन या एलर्जी के लक्षण बने रहें तो डॉक्टर से सलाह लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।