थायरॉइड की बीमारी मौजूदा समय में काफी आम हो गई है। लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी, नींद की बढ़ती दिक्कतों ने इस रोग के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। लिहाजा, महिला-पुरुष, बच्चे-बुजुर्ग सभी इसका शिकार होते जा रहे हैं।
Thyroid: ये गड़बड़ आदतें आपको भी बना देंगी थायरॉइड का मरीज, नहीं संभले तो डॉक्टर के पास आते-जाते रहना तय
थायराइड दरअसल एक छोटी-सी ग्रंथि है, जो हमारे गले में सामने की ओर स्थित होती है, लेकिन इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। यह ग्रंथि थायराइड हार्मोन का उत्पादन करती है, जो मेटाबॉलिज्म, वजन, दिल की धड़कन, तापमान और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करता है।
थायरॉइड की समस्या को जानिए
- हाइपोथायराइडिज्म में थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती। हाइपोथायराइडिज्म में अचानक वजन बढ़ने, लगातार थकान, ठंड ज्यादा लगने, कब्ज, त्वचा के रूखा होने और बालों के झड़ने की दिक्कत होती है।
- वहीं हाइपरथायराइडिज्म में जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनने लगता है। इसके कारण तेजी से वजन घटने, दिल की धड़कनों में अनियमितता, ज्यादा पसीना आने, घबराहट, नींद न आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
गड़बड़ आदतें बन सकती हैं इस बीमारी का कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी कुछ गड़बड़ आदतें इस रोग के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
असंतुलित आहार से बढ़ता है खतरा
गलत खानपान थायरॉइड बीमारी का प्रमख कारण है।
- आयोडीन, सेलेनियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्व थायरॉइड हार्मोन के निर्माण और उसके संतुलन के लिए बेहद जरूरी होते हैं।
- इस बीमारी से बचने के लिए प्रोसेस्ड एंव जंक फूड, ज्यादा चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें कम खाने की सलाह दी जाती है।
- आयोडीन की कमी से हाइपोथायराइडिज्म का खतरा बढ़ता है, इसलिए नियमित रूप से संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी माना जाता है।
ज्यादा तनाव तो नहीं लेते हैं आप
अक्सर तनाव में रहने वाले लोगों में थायरॉइड बीमारी होने का खतरा भी अधिक देखा जाता है।
- तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो थायरॉइड हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकता है।
- इसके अलावा तनाव के कारण नींद की कमी, अनियमित खानपान और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं भी होती हैं, जिससे भी आप इस रोग का शिकार हो सकते हैं।
नींद पूरी न होना खतरनाक
अच्छी सेहत के लिए अच्छी नींद लेना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद न लेना भी थायरॉइड की बीमारी का प्रमुख कारण है। नींद के दौरान शरीर अपने हार्मोनल सिस्टम को रिसेट करता है। ऐसे में नींद पूरी न होने से हार्मोनल बैलेंस बिगड़ने लगता है। नींद की कमी से हार्मोन का स्तर प्रभावित हो सकता है, जिससे हाइपोथायराइडिज्म का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा नींद पूरी न होने से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जो ऑटोइम्यून थायरॉइड रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।