डायबिटीज वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, इसका खतरा किसी भी उम्र वालों में हो सकता है। कुछ जोखिम कारक जैसे आनुवांशिकता, मोटापा, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी आदि के कारण आपमें भी इस रोग के होने का जोखिम बढ़ जाता है। आमतौर पर डायबिटीज के दो प्रमुख प्रकारों- टाइप-1 डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज के बारे में चर्चा होती रही है, पर क्या आप टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में जानते हैं?
Type 1.5 Diabetes: क्या आपको 'लाडा' डायबिटीज के बारे में पता है? जानिए क्यों होती है ये बीमारी
टाइप 1.5 डायबिटीज के लक्षण टाइप-1 और टाइप-2 से मिलते जुलते होते हैं। इस रोग का निदान वयस्कता के दौरान किया जाता है और टाइप-2 डायबिटीज की तरह धीरे-धीरे बढ़ता है।
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टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में जानिए
टाइप 1.5 डायबिटीज के लक्षण टाइप-1 और टाइप-2 से मिलते जुलते होते हैं। इस रोग का निदान वयस्कता के दौरान किया जाता है और टाइप-2 डायबिटीज की तरह धीरे-धीरे बढ़ता है।
- हालांकि टाइप-2 डायबिटीज के विपरीत, लाडा एक ऑटोइम्यून बीमारी है और आहार-जीवन शैली में सुधार करने पर भी इसे ठीक नहीं किया जा सकता है।
- यदि आपका वजन और जीवनशैली भी ठीक है फिर भी यदि आपमें टाइप-2 डायबिटीज का निदान किया गया है, तो संभव है कि यह असल में टाइप 1.5 डायबिटीज हो सकता है।
टाइप 1.5 डायबिटीज के कारण और इसकी पहचान
टाइप 1.5 डायबिटीज को समझने के लिए यह जानना होगा कि यह अन्य मुख्य प्रकार के डायबिटीज से कैसे अलग है?
- टाइप 1 मधुमेह को एक ऑटोइम्यून स्थिति मानी जाती है क्योंकि यह आपके शरीर द्वारा स्वयं अग्नाशयी बीटा कोशिकाओं को नष्ट करने के कारण बनती है। ये कोशिकाएं शरीर को इंसुलिन बनाने में मदद करती हैं।
- वहीं टाइप 2 डायबिटीज मुख्य रूप से शरीर द्वारा इंसुलिन के प्रतिरोध की समस्या है। इसमें या तो पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन बनता नहीं है या फिर शरीर इसका ठीक तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाती है।
टाइप 1.5 डायबिटीज, इंसुलिन-उत्पादक कोशिकाओं के खिलाफ एंटीबॉडी के कारण अग्न्याशय को होने वाले नुकसान की वजह से होता है। यदि आपके परिवार में पहले किसी को ऑटोइम्यून बीमारियां रह चुकी हैं तो आपमें इस प्रकार के डायबिटीज के विकसित होने का खतरा हो सकता है। यदि टाइप 1.5 डायबिटीज वाला व्यक्ति मोटापे का शिकार है तो यह उसमें इंसुलिन प्रतिरोध का भी कारण बन सकती है।
कैसे करें इसकी पहचान?
टाइप 1.5 डायबिटीज के लक्षण शुरुआत में बहुत स्पष्ट नहीं होते हैं। इसमें होने वाली दिक्कतें डायबिटीज के अन्य प्रकारों से मिलती जुलती हो सकती हैं। हालांकि यदि इसका समय पर निदान न किया जाए या फिर इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो यह समस्या डायबिटीज केटोएसिडोसिस का कारण बन सकती है। टाइप 1.5 डायबिटीज में भी अक्सर टाइप-2 डायबिटीज की तरह ही दिक्कतें हो सकती हैं।
- बार-बार प्यास लगना
- बार-बार पेशाब जाने की समस्या।
- वजन घटना।
- धुंधला दिखाई देना और झुनझुनी की समस्या।
इस डायबिटीज से कैसे बचें?
टाइप 1.5 डायबिटीज के निदान में समय लग सकता है, अक्सर इसे टाइप-2 डायबिटीज मान लिया जाता है। टाइप 1.5 डायबिटीज वाले लोगों में भी कम से कम एक एंटीबॉडी का सकारात्मक परीक्षण हो सकता है, जो कि टाइप 1 मधुमेह वाले लोगों में होता है। चूंकि इस रोग में आपका शरीर इंसुलिन के उत्पादन को धीमा कर देता है, इसलिए आपको इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता हो सकती है। जिन लोगों में बिना इंसुलिन के साथ स्थिति कंट्रोल में नहीं रहती है, उन्हें हमेशा इंसुलिन लेना पड़ सकता है।
वर्तमान में टाइप 1.5 डायबिटीज से बचाव का कोई तरीका नहीं है। टाइप-1 डायबिटीज की तरह, इस स्थिति की में भी अनुवांशिक कारक भूमिका निभाते हैं। टाइप 1.5 डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए सही निदान और लक्षणों पर ध्यान देना सबसे जरूरी माना जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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