सेहत को ठीक रखना चाहते हैं तो इसके लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ खान-पान पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं। हम जो कुछ भी खाते हैं या जिस तरह से खाते हैं इसका सेहत पर सीधा असर होता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जितना जरूरी है पौष्टिक आहार का सेवन करना, उतना ही जरूरी हो जाता है पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना। पानी को लेकर लोगों के मन में एक सवाल अक्सर रहता है कि क्या ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए, क्या ठंडा पानी पाचन को धीमा कर देता है?
Water Intake: क्या ठंडा पानी सच में पाचन को धीमा कर देता है? एक्सपर्ट ने दूर किया कन्फ्यूजन
आयुर्वेद के अनुसार, ठंडा पानी पाचन अग्नि को कमजोर कर सकता है, जिससे भोजन को पचाने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। इसके कारण कुछ लोगों को गैस, अपच, पेट फूलना या भारीपन महसूस हो सकता है।
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पहले पाचन की प्रक्रिया के बारे में जान लीजिए
अक्सर लोग सोचते हैं कि भोजन पेट में पहुंचने के बाद ही पचना शुरू होता है, जबकि पाचन की पहली प्रक्रिया मुंह में शुरू होती है।
- जब हम खाना चबाते हैं तो लार में मौजूद एंजाइम भोजन को तोड़ने का काम शुरू कर देते हैं।
- इसके बाद भोजन पेट में पहुंचता है, जहां गैस्ट्रिक एसिड और दूसरे पाचक एंजाइम उसे आगे पचाते हैं।
- अगर इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बहुत अधिक पानी पी लिया जाए तो पाचन की गति प्रभावित हो सकती है।
खाना खाते समय पानी पीना चाहिए या नहीं?
आहार विशेषज्ञ डॉ प्रभात गोस्वामी के अनुसार, खाना खाते समय पूरी तरह पानी से परहेज करने की जरूरत नहीं है। अगर भोजन निगलने में परेशानी हो रही हो या मुंह सूख रहा हो तो 2-3 छोटे घूंट सामान्य या हल्का गुनगुना पानी पी सकते हैं।
लेकिन अगर भोजन के बीच-बीच में लगातार एक या दो गिलास पानी पीते रहें, तो इससे पेट जल्दी भरने का एहसास हो सकता है और कुछ लोगों में पाचन असहज महसूस हो सकता है। बहुत से लोगों की आदत होती है कि खाना खत्म होते ही फ्रिज से ठंडा पानी निकालकर पी लेते हैं। आयुर्वेद इस आदत को सही नहीं मानता।
आयुर्वेद के अनुसार, ठंडा पानी पाचन अग्नि को कमजोर कर सकता है, जिससे भोजन को पचाने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। इसके कारण कुछ लोगों को गैस, अपच, पेट फूलना या भारीपन महसूस हो सकता है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में यह स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं कि ठंडा पानी हर व्यक्ति में पाचन को नुकसान पहुंचाता है।
गुनगुना पानी पानी कितना सही?
खाने के बाद हल्का गुनगुना या सामान्य तापमान का पानी पीना ज्यादा आरामदायक होता है।
- आयुर्वेद का मानना है कि गुनगुना पानी भोजन के पाचन में सहायता करता है और पेट को सहज बनाए रखता है।
- हल्का गर्म पानी पेट की ऐंठन या भारीपन कम करने में भी सहायक हो सकता है।
खाना खाने के बाद कितनी देर में पानी पीना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है किअगर भोजन के दौरान यदि प्यास लगे तो कुछ घूंट सामान्य या गुनगुना पानी पी सकते हैं। भोजन के लगभग 20-30 मिनट बाद पीना अच्छा माना जाता है।
- भोजन के दौरान जरूरत हो तो सिर्फ 2-3 घूंट पानी ही पिएं।
- बहुत ठंडा या बर्फ वाला पानी खाने के तुरंत बाद पीने से बचें, खासकर अगर आपको एसिडिटी या अपच की समस्या रहती है।
- गुनगुना या सामान्य तापमान का पानी अधिक आरामदायक विकल्प हो सकता है।
- कोल्ड ड्रिंक या अत्यधिक मीठे पेय को भोजन के साथ लेने से बचें।
- भोजन को अच्छी तरह चबाकर और आराम से खाएं, इससे पाचन अपने आप बेहतर होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।