Childhood Obesity: बचपन का मोटापा छीन सकता है मां बनने का सपना? हर माता-पिता के लिए बहुत जरूरी है ये रिपोर्ट
स्कूल के दिनों में बढ़ा हुआ वजन या मोटापा लड़कियों की प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) को नुकसान पहुंचा सकता है और भविष्य में मां बनने की संभावना को काफी कम कर सकता है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
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अधिक वजन और मोटापे की समस्या को स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर चिंता का कारण बताते रहे हैं। इससे क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का ही खतरा नहीं रहता है, बल्कि एक बार शुरू हुआ मोटापा आपके लिए जीवनभर की समस्याओं का कारण बन सकता है। तमाम अध्ययन बच्चों में बढ़ते मोटापे की स्थिति को सबसे खतरनाक और गंभीर दुष्प्रभावों वाला मान रहे हैं।
इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बचपन में मोटापा से संबंधित एक नए खतरे को लेकर अलर्ट किया है। इसमें पाया गया है कि स्कूल के दिनों में अगर कोई लड़की अधिक वजन या मोटापे का शिकार है, तो इसका असर सिर्फ उसके बचपन तक सीमित नहीं रहता। यह भविष्य में उसकी मां बनने की संभावना को भी काफी हद तक कम कर सकता है। ऐसे बच्चों में कम उम्र में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा तो रहता ही है साथ ही लड़कियों में ये मां बनने की भी दिक्कतें खड़ी करने वाली समस्या हो सकती है।
शोध में पाया गया कि जिन लड़कियों का वजन छह साल की उम्र से लगातार सामान्य से ज्यादा बढ़ता गया, उनके 30-35 साल की उम्र तक मां बनने की संभावना सामान्य वजन वाली लड़कियों की तुलना में 42 प्रतिशत तक कम थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी माता-पिता को अलर्ट किया है कि बच्चों में अधिक वजन की स्थिति पर ध्यान देते रहें। ये वास्तव में बहुत गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
बचपन के मोटापे का प्रजनन स्वास्थ्य पर असर
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याओं की शुरुआत हमारी सोच से कहीं पहले, यानी बचपन से ही हो सकती है। इसलिए बढ़ते मोटापे की समस्या पर शुरुआती उम्र में ही ध्यान देना बेहद जरूरी है।
गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर प्रजनन से संबंधित समस्याओं का जोखिम देखा जा रहा है, जिसे लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों में मोटापा भी इस खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है इसलिए सभी माता-पिता को इसपर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
जामा जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, जिन लड़कियों का वजन 6 साल की उम्र से लगातार बढ़ता गया, उनके 30 की उम्र तक मां बनने की संभावना अन्य लड़कियों की तुलना में 42 प्रतिशत तक कम पाई गई। यह निष्कर्ष बताता है कि प्रजनन स्वास्थ्य पर असर बचपन से ही शुरू हो सकता है, जबकि अब तक माना जाता था कि यह समस्या बाद की उम्र में विकसित होती है।
- कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अध्ययन की प्रमुख लेखक डॉ. डॉर्थे पेडरसन कहते हैं, यदि किसी लड़की का बीएमआई (बीएमआई) 6 साल की उम्र से ही सामान्य से अधिक रहता है, तो आगे चलकर उसके मां बनने की संभावनाओं पर भी नकारात्मक असर हो सकता है।
- जब महिलाएं 30 की उम्र में गर्भधारण की कोशिश शुरू करती हैं और अक्सर फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं।
- हालांकि इस तरह के मामलों में प्रजनन क्षमता पर पड़ने वाला असर पहले ही शुरू हो चुका होता है।
- इसलिए बचपन से ही स्वस्थ विकास और संतुलित वजन बनाए रखने पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
अध्ययन में क्या पता चला?
इससे पहले के अध्ययनों में इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही थी कि महिलाओं में अधिक बीएमआई (बीएमआई) होने पर गर्भधारण की क्षमता कम हो सकती है, लेकिन यह जानने के लिए अब तक बहुत कम शोध हुए थे कि क्या बचपन का मोटापा भी आगे चलकर संतानहीनता या बांझपन से जुड़ा हो सकता है?
- इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए शोधकर्ताओं ने 1950 से 1989 के बीच कोपेनहेगन में जन्मी 60,864 महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया।
- इन बच्चियों की स्कूल स्वास्थ्य जांच के दौरान हर बीएमआई पर ध्यान दिया गया।
- इसके बाद शोधकर्ताओं ने डेटा के आदार पर यह पता लगाया कि इनमें से किन महिलाओं ने 18 से 45 वर्ष की उम्र के बीच बच्चे को जन्म दिया?
अध्ययन की पूरी अवधि में 78 प्रतिशत (47,669) महिलाओं ने औसतन 27 वर्ष की उम्र में बच्चे को जन्म दिया, जबकि 22 प्रतिशत (13,195) महिलाएं संतानहीन रहीं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लड़कियों का वजन 6 साल की उम्र से ही लगातार अधिक या मोटापे की श्रेणी में था, उनके मां बनने की संभावना सामान्य बीएमआई वाली लड़कियों की तुलना में कम थी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
- डॉ. पेडरसन कहते हैं, वैसे तो बढ़ती उम्र या देर से परिवार शुरू करना प्रजनन समस्याओं का एक बड़ा कारण हो सकता है, लेकिन ओवरवेट और मोटापा इस खतरे को और बढ़ा देते हैं। कम उम्र में मोटापा अंडों की गुणवत्ता में कमी और हार्मोनल गड़बड़ियां दोनों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
चिंता की बात ये है कि वर्तमान में यूरोप सहित दुनियाभर में हर तीन में से एक स्कूली उम्र की लड़की ओवरवेट या मोटापे से जूझ रही है। ये भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है।
- अध्ययन की वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. जेनिफर बेकर कहते हैं, व्यापक रूप से देखें तो हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि प्रजनन स्वास्थ्य की नींव हमारी सोच से कहीं पहले, यानी बचपन में ही पड़ जाती है। हमें इनफर्टिलिटी को केवल वयस्कों की समस्या नहीं मानना चाहिए। यदि हम बचपन में ही मोटापे की समस्या पर ध्यान दे लें और इसे कंट्रोल करने के तरीके अपना लें तो शायद भविष्य की एक बड़ी मुसीबत से बचा जा सकता है।
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स्रोत:
Overweight and obesity in childhood associated with increased risk of childlessness in adulthood, finds study of almost 61,000 women
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