हमारे शरीर में निरंतर कुछ न कुछ गतिविधि होती रहती है। शरीर के सभी कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए बाकायदा एक सिस्टम काम करता है, इसमें हार्मोन्स का विशेष भूमिका होती है।
जानना जरूरी: कोर्टिसोल हार्मोन के क्या कार्य हैं, इसके बढ़ने-घटने का शरीर पर क्या असर होता है? जानिए सबकुछ
Cortisol Hormone Function: कोर्टिसोल एक जरूरी हार्मोन है, जो एड्रिनल ग्रंथियों द्वारा निर्मित होता है। इसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है क्योंकि तनाव के समय इसका स्राव तेजी से बढ़ जाता है। हालांकि कोर्टिसोल सिर्फ तनाव से निपटने के लिए ही नहीं शरीर में और भी कई जरूरी काम करता है। जब शरीर में इसका असंतुलन होने लगता है तो इससे कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
पहले इस हार्मोन के बारे में जान लीजिए
कोर्टिसोल एक जरूरी हार्मोन है, जो एड्रिनल ग्रंथियों द्वारा निर्मित होता है। इसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है क्योंकि तनाव के समय इसका स्राव तेजी से बढ़ जाता है। हालांकि कोर्टिसोल सिर्फ तनाव से निपटने में ही नहीं बल्कि शरीर में और भी कई जरूरी काम करता है।
ब्लड शुगर-ब्लड प्रेशर, मेटाबोलिज्म और सोने-जागने के चक्र को मैनेज करने में भी इसकी भूमिका होती है। अगर कोर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक अधिक या कम बना रहे, तो यह शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
आइए जानते हैं कैसे?
हाई कोर्टिसोल की समस्या
हाई कोर्टिसोल कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, जिनमें सबसे प्रमुख कुशिंग सिंड्रोम है। इसी समस्या से जानिए अनंत अंबानी जूझ रहे हैं, पूरी जानकारी यहां से प्राप्त कर सकते हैं।
एक अध्ययन में पाया गया कि लंबे समय तक हाई कोर्टिसोल का स्तर मस्तिष्क के हिस्से हिप्पोकैम्पस (याददाश्त और लर्निंग से जुड़ा हिस्सा) को नुकसान पहुंचा सकता है। जिसके कारण आपको मानसिक दिक्कतें होने लगती हैं। इसी तरह कोर्टिसोल हाई रहने से हृदय रोगों का खतरा भी अधिक हो जाता है क्योंकि यह सूजन और रक्तचाप दोनों को बढ़ाता है।
कोर्टिसोल बढ़ने की स्थिति वजन बढ़ने, कंधे की हड्डियों के बीच वसा का जमाव, उच्च रक्तचाप, हाई शुगर और मांसपेशियों में कमजोरी का कारण बन सकती है। कोर्टिसोल इंसुलिन के प्रभाव को कम करता है जिससे टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। इसी तरह रक्त वाहिकाओं पर कोर्टिसोल का प्रभाव आपके ब्लड प्रेशर को अनियंत्रित कर सकता है।
कोर्टिसोल कम होने से क्या होता है?
कोर्टिसोल बढ़ने की ही तरह लो होना भी शरीर के लिए ठीक नहीं है। अगर कोर्टिसोल का स्तर सामान्य से नीचे चला जाए, तो यह भी समस्याकारक हो सकता है। इसके कारण थकान और कमजोरी, वजन घटने और भूख न लगने, ब्लड प्रेशर लो होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। लो कोर्टिसोल के कारण मूड डिसऑर्डर जैसे डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन की दिक्कत भी होने लगती हैं।
कैसे रखें इसे कंट्रोल?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं आप दिनचर्या को ठीक रखकर और कुछ आदतों का पालन करके कोर्टिसोल को कंट्रोल रख सकते हैं।
मेडिटेशन इसका सबसे अच्छा तरीका है। ये कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर पर को 20-30% तक कम कर सकता है। इसी तरह नियमित व्यायाम, योग और वॉकिंग भी विशेष रूप से उपयोगी है। कोर्टिसोल के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए हर रात कम से कम 7-8 घंटे की गहरी नींद जरूरी है, नींद की कमी से भी ये हार्मोन असंतुलित हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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