वजन बढ़ना और मोटापा मौजूदा समय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसका शिकार देखे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों का वजन अधिक होता है उनमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर से लेकर कई तरह के कैंसर होने तक का खतरा हो सकता है।
Visceral Fat: सिर्फ मोटापा नहीं पेट के अंदर की ये चर्बी है असली खतरा, बढ़ा सकती है कई बीमारियों का जोखिम
विरसल फैट त्वचा के ठीक नीचे जमा चर्बी से अलग होती है। यह पेट की गहराई में अंगों के आसपास जमा होती है और ज्यादा मात्रा में होने पर टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और फैटी लिवर जैसे मेटाबॉलिक जोखिमों को बढ़ा सकती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विसरल फैट- TOFI
अध्ययनों से पता चलता है कि विसरल फैट बढ़ने से टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, फैटी लिवर और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पेट का आकार बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में अतिरिक्त फैट बढ़ने, पेट के आसपास फैट ज्यादा जमा होने, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक बैठने के कारण ये समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा कैलोरी वाली चीजें और मीठे पेय भी वजन और पेट की चर्बी बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सामान्य तौर पर पेट निकलने और विसरल फैट में अंतर होता है। विसरल फैट को बोलचाल की भाषा में TOFI भी कहा जाता है। टोफी यानी थिन आउटसाइड-फैट इनसाइड।
विसरल फैट पेट की गहराई में आंतरिक अंगों के आसपास जमा होती है। यह त्वचा के ठीक नीचे जमा फैट से अलग होती है।
- शरीर को कुछ मात्रा में फैट की जरूरत होती है क्योंकि यह ऊर्जा का भंडार रखने और कई जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाती है।
- लेकिन अत्यधिक विसरल फैट स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
अध्ययनों में इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस, सूजन और मेटाबॉलिक समस्याओं को बढ़ाने वाला पाया गया है। विसरल फैट आंखों से दिखाई नहीं देती, कमर का घेरा बढ़ना एक संकेत हो सकता है।
विसरल फैट को ज्यादा खतरनाक क्यों माना जाता है?
विसरल फैट शरीर के आंतरिक अंगों के आसपास जमा होती है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा हो सकता है।
- इसके कारण समय के साथ ब्लड शुगर नियंत्रित करने में परेशानी हो सकती है और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है।
- पेट के अंदर अधिक फैट हृदय रोग और फैटी लिवर जैसे जोखिमों से भी जुड़ी है।
विसरल फैट के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है। इंसुलिन शरीर को ब्लड ग्लूकोज का इस्तेमाल करने में मदद करने वाला महत्वपूर्ण हार्मोन है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगती हैं, तो ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। पेट के आसपास अधिक फैट से हृदय संबंधी जोखिमों का खतरा भी हो सकता है।अत्यधिक विसरल फैट मेटाबॉलिक सिंड्रोम, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
विसरल फैट कम कैसे करें?
विसरल फैट कम करने के लिए शारीरिक गतिविधि सबसे महत्वपूर्ण है। वाकिंग, साइकिलिंग, तैराकी और एरोबिक गतिविधियां कैलोरी बर्न करने और कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस सुधारने में मदद कर सकती हैं।
- संतुलित खानपान की मदद से भी इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
- सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, नट्स और सीड्स जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ भी इस समस्या को कम करने में मदद करती हैं।
- अगर वजन सामान्य होने के बावजूद पेट तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है तो डॉक्टर से जांच जरूर करा लें।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।