जब भी हम अस्पताल में जाते हैं तो अक्सर एक दिलचस्प बात देखने को मिलती है। किसी मरीज को इंजेक्शन हाथ की नस में लगाया जाता है, तो किसी को बाजू या फिर मांसपेशियों में। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल बना रहता है कि आखिर डॉक्टर ये कैसे पता लगाते हैं कि किस तरह के इंजेक्शन को शरीर के किस हिस्से में लगाना है?
Injunction: कौन-सा इंजेक्शन नस में लगेगा और कौन-सा मसल्स में? जानिए कैसे की जाती है इसकी पहचान
किसी मरीज को इंजेक्शन हाथ की नस में लगाया जाता है, तो किसी को कंधे, बाजू या नितंब की मांसपेशियों में। पर ये तय कैसे होता है कि कौन सा इंजेक्शन कहां लगाया जाना चाहिए? इंट्रावेनस और इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन क्या होते हैं? आइए इन सबके बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
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इंजेक्शन और इसे लगाने के तरीके
अमर उजाला से बातचीत में जनरल फिजिशियन डॉ विवेक सिंह बताते हैं, कुछ दवाओं का तुरंत असर चाहिए होता है, इसलिए उन्हें सीधे रक्त प्रवाह यानी नसों में दिया जाता है। वहीं कुछ दवाएं धीरे-धीरे शरीर में अवशोषित हों तो अधिक प्रभावी रहती हैं, इसलिए उन्हें मांसपेशियों में लगाया जाता है।
- हालांकि नसों और मांसपेशियों में लगने वाले इंजेक्शन के अलावा भी कई इंजेक्शन होते हैं।
- केवल देखकर यह पहचानना हमेशा आसान नहीं होता कि कौन सा इंजेक्शन किस श्रेणी का है, लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिनसे आम लोग भी समझ सकते हैं कि इंजेक्शन नस में दिया जा रहा है या मांसपेशी में।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, नसों और मांसपेशियों में दिए जाने वाले इंजेक्शन के अलावा भी कई तरीके हैं, जिनका जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जाता है। इंट्रावेनस, इंट्रामस्क्युलर, सबक्यूटेनियस और इंट्राडर्मल इसके प्रमुख प्रकार हैं। हर तरीके का अपना अलग उद्देश्य, लाभ और उपयोग होता है।
पहले इंट्रावेनस इंजेक्शन को समझिए
इंट्रावेनस इंजेक्शन सीधे नसों में दिया जाता है। नसों के माध्यम से दवा सीधे रक्त प्रवाह में पहुंच जाती है, इसलिए इसका असर सबसे तेजी से दिखाई देता है।
- इसे आमतौर पर हाथ की नस, कलाई या बांह की नसों में लगाया जाता है।
- गंभीर संक्रमण, डिहाइड्रेशन, इमरजेंसी की स्थिति, दर्द को कंट्रोल करना हो, कीमोथेरेपी और कई एंटीबायोटिक दवाओं के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
- इस तरह के इंजेक्शन की पहचान इसके लेवल पर लिखे IV यानी इंट्रावेनस के जरिए की जाती है।
मांसपेशियों में लगने वाले इंजेक्शन
इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन मांसपेशियों में दिए जाते है। मांसपेशियों में रक्त आपूर्ति अच्छी होती है, इसलिए दवा वहां से धीरे-धीरे रक्त में अवशोषित होती रहती है।
- डॉक्टर इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन तब लगाते हैं जब दवा का धीरे-धीरे रिलीज होना इलाज के लिए अधिक लाभदायक हो।
- कंधे-बाजू डेल्टॉइड मांसपेशी, जांघ या नितंब की मांसपेशियों में ये लगाया जाता है।
- टिटनेस, हेपेटाइटिस-बी, फ्लू वैक्सीन और कुछ एंटीबायोटिक्स इसी तरीके से दिए जाते हैं।
- इस तरह के इंजेक्शन के लेवल पर IM लिखा होता है।
सबक्युटेनियस और इंट्राडर्मल इंजेक्शन
- सबक्युटेनियस इंजेक्शन दवा को सीधे त्वचा के नीचे और मांसपेशियों के ऊपर मौजूद फैटी टिश्यू की परत में पहुंचाता है। इस तरीके से दवा धीरे-धीरे और लगातार शरीर में अवशोषित होती है। इसका इस्तेमाल आमतौर पर इंसुलिन, खून को पतला करने वाली दवाओं के लिए किया जाता है। इस तरह के इंजेक्शन के लेवल पर SC या SQ लिखा होता है।
- इंट्राडर्मल इंजेक्शन में थोड़ी मात्रा में दवा त्वचा की मध्य परत में डर्मिस दी जाती है। इससे दवा का अवशोषण धीमा होता है और त्वचा पर होने वाली प्रतिक्रिया की आसानी से जांच की जा सकती है। इस तरह के इंजेक्शन के लेवल पर ID लिखा होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।