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Eye twitching: आखिर क्यों फड़कती हैं हमारी आंखें? ये सिर्फ शुभ-अशुभ है या फिर कोई मेडिकल समस्या, जानिए सच्चाई

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 09 Feb 2026 07:36 PM IST
सार

Aankh Fadakna Ka Karan: आमतौर पर आंखों का फड़कना कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रहता है और अपने-आप ठीक भी हो जाता है। लेकिन जब यह बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बना रहे, तो यह शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है।

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आंखों के फड़कने का क्या कारण है? - फोटो : Freepik

आपको भी कभी न कभी एहसास हुआ होगा कि आंखों में कुछ अजीब सी कंपन हो रही है, पलकें तेजी से अनियंत्रित तरीके से कंपन कर रही हैं। इसे आंखों का फड़कना कहते हैं। आंखों का फड़कना यानी पलक का अपने-आप हिलना एक बेहद आम समस्या है, हालांकि अक्सर इसे शुभ-अशुभ से जोड़कर देखा जाता रहा है। कहीं बाईं आंख फड़कना अशुभ माना जाता है तो कहीं दाईं आंख फड़कना शुभ संकेत कहा जाता है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आंखों का फड़कना शुभ-अशुभ संकेतों से इतर शरीर से जुड़ी एक सामान्य न्यूरो-मस्कुलर प्रतिक्रिया हो सकती है। इसे मेडिकल की भाषा में इसे मायोकाइमिया कहा जाता है। अधिकतर मामलों में यह कोई गंभीर बीमारी नहीं होती, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में यह न्यूरोलॉजिकल समस्या की ओर भी इशारा हो सकती है।

आइए समझ लेते हैं कि आखिर हमारी आंखें फड़कती क्यों हैं और इससे कैसे आराम पाया जा सकता है?

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आंख फड़कने की क्या वजह है? - फोटो : Adobe Stock

आंख फड़कने की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आंखों का फड़कना, आपकी आंख-पलक की मांसपेशियों या आंखों के आसपास के चेहरे के हिस्सों का एक अनियंत्रित मूवमेंट है। ज्यादातर मामलों में आंखों का फड़कना सामान्य होता है, हालांकि कुछ स्थितियों में शरीर में होने वाली समस्या का संकेत भी हो सकता है।

आमतौर पर आंखों का फड़कना कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रहता है और अपने-आप ठीक हो जाता है। लेकिन जब यह बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बना रहे, तो यह शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बार-बार पलकें फड़कने के लिए नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी को भी एक कारण माना जा सकता है।

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थकान-कमजोरी के कारण आंख फड़कना - फोटो : Freepik.com

आंखें फड़कने का कारण क्या है?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हमारी पलकें फेशियल नर्व्स के जरिए सीधे आपके दिमाग से जुड़ी होती हैं। आपके दिमाग या फेशियल नर्व में किसी रुकावट से गलत सिग्नलिंग हो सकती है, जिससे मायोकिमिया होता है। इसके अलावा कुछ प्रकार की दवाओं के साइड-इफेक्ट्स के कारण भी आंखें फड़कने की समस्या हो सकती है।

  • थकान या नींद की कमी
  • कैफीन का बहुत ज्यादा सेवन
  • तंबाकू-धूम्रपान का अधिक इस्तेमाल
  • आंखों में सूखापन की समस्या
  • तनाव की स्थिति।
  • नसों और दिमाग की चोट की दवाओं का साइड-इफेक्ट।
  • नर्वस सिस्टम की बीमारियां जिसमें मल्टीपल स्क्लेरोसिस 
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आंखों का फड़कना - फोटो : Freepik

इन कारणों को भी जान लीजिए

डॉक्टरों का मानना है कि आंख फड़कने का सबसे बड़ा कारण थकान और तनाव होना है। जब शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो आंखों की मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से सिकुड़ने लगती हैं, जिससे आपको बार-बार आंख फड़कने की समस्या हो सकती है। डिहाइड्रेशन और मैग्नीशियम-पोटैशियम की कमी भी आंखों की नसों को प्रभावित करती है, जिससे पलक फड़कने लगती है।

लगातार मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने से आंखों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इससे आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं और फड़कने की समस्या शुरू हो सकती है। 

अगर आंखों का फड़कना कई हफ्तों तक बना रहे, आंख पूरी तरह बंद होने लगे, चेहरे के अन्य हिस्सों में भी झटके महसूस हों या देखने में दिक्कत हो, तो यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जैसे हेमीफेशियल स्पैज्म का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क जरूरी है।

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आंख फड़कने पर क्या किया जाना चाहिए? - फोटो : Adobe Stock Photo

मायोकिमिया को कैसे ठीक किया जाए?

मायोकिमिया आमतौर पर अस्थायी समस्या होती है। ज्यादातर मामले बिना ये कुछ ही मिनटों में अपने आप ठीक भी हो जाती है और इसके लिए इलाज की जरूरत नहीं होती है।

  • हालांकि कभी-कभी पलकों की मायोकिमिया आपके काम या रोजाना की दिनचर्या के दूसरे हिस्सों में दखल देने लगती है, जिसके लिए इलाज की जरूरत हो सकती है।
  • अगर आपको किसी दवा की वजह से मायोकिमिया हो रहा है, तो डॉक्टर दूसरी दवा लेने की सलाह दे सकते हैं।
  • स्ट्रेस कम करने, नींद में सुधार, स्मोकिंग कम करने जैसे उपाय करके भी आंखों का फड़कना कम किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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