आपको भी कभी न कभी एहसास हुआ होगा कि आंखों में कुछ अजीब सी कंपन हो रही है, पलकें तेजी से अनियंत्रित तरीके से कंपन कर रही हैं। इसे आंखों का फड़कना कहते हैं। आंखों का फड़कना यानी पलक का अपने-आप हिलना एक बेहद आम समस्या है, हालांकि अक्सर इसे शुभ-अशुभ से जोड़कर देखा जाता रहा है। कहीं बाईं आंख फड़कना अशुभ माना जाता है तो कहीं दाईं आंख फड़कना शुभ संकेत कहा जाता है।
Eye twitching: आखिर क्यों फड़कती हैं हमारी आंखें? ये सिर्फ शुभ-अशुभ है या फिर कोई मेडिकल समस्या, जानिए सच्चाई
Aankh Fadakna Ka Karan: आमतौर पर आंखों का फड़कना कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रहता है और अपने-आप ठीक भी हो जाता है। लेकिन जब यह बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बना रहे, तो यह शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है।
आंख फड़कने की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आंखों का फड़कना, आपकी आंख-पलक की मांसपेशियों या आंखों के आसपास के चेहरे के हिस्सों का एक अनियंत्रित मूवमेंट है। ज्यादातर मामलों में आंखों का फड़कना सामान्य होता है, हालांकि कुछ स्थितियों में शरीर में होने वाली समस्या का संकेत भी हो सकता है।
आमतौर पर आंखों का फड़कना कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रहता है और अपने-आप ठीक हो जाता है। लेकिन जब यह बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बना रहे, तो यह शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बार-बार पलकें फड़कने के लिए नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी को भी एक कारण माना जा सकता है।
आंखें फड़कने का कारण क्या है?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हमारी पलकें फेशियल नर्व्स के जरिए सीधे आपके दिमाग से जुड़ी होती हैं। आपके दिमाग या फेशियल नर्व में किसी रुकावट से गलत सिग्नलिंग हो सकती है, जिससे मायोकिमिया होता है। इसके अलावा कुछ प्रकार की दवाओं के साइड-इफेक्ट्स के कारण भी आंखें फड़कने की समस्या हो सकती है।
- थकान या नींद की कमी
- कैफीन का बहुत ज्यादा सेवन
- तंबाकू-धूम्रपान का अधिक इस्तेमाल
- आंखों में सूखापन की समस्या
- तनाव की स्थिति।
- नसों और दिमाग की चोट की दवाओं का साइड-इफेक्ट।
- नर्वस सिस्टम की बीमारियां जिसमें मल्टीपल स्क्लेरोसिस
इन कारणों को भी जान लीजिए
डॉक्टरों का मानना है कि आंख फड़कने का सबसे बड़ा कारण थकान और तनाव होना है। जब शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो आंखों की मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से सिकुड़ने लगती हैं, जिससे आपको बार-बार आंख फड़कने की समस्या हो सकती है। डिहाइड्रेशन और मैग्नीशियम-पोटैशियम की कमी भी आंखों की नसों को प्रभावित करती है, जिससे पलक फड़कने लगती है।
लगातार मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने से आंखों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इससे आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं और फड़कने की समस्या शुरू हो सकती है।
अगर आंखों का फड़कना कई हफ्तों तक बना रहे, आंख पूरी तरह बंद होने लगे, चेहरे के अन्य हिस्सों में भी झटके महसूस हों या देखने में दिक्कत हो, तो यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जैसे हेमीफेशियल स्पैज्म का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क जरूरी है।
मायोकिमिया को कैसे ठीक किया जाए?
मायोकिमिया आमतौर पर अस्थायी समस्या होती है। ज्यादातर मामले बिना ये कुछ ही मिनटों में अपने आप ठीक भी हो जाती है और इसके लिए इलाज की जरूरत नहीं होती है।
- हालांकि कभी-कभी पलकों की मायोकिमिया आपके काम या रोजाना की दिनचर्या के दूसरे हिस्सों में दखल देने लगती है, जिसके लिए इलाज की जरूरत हो सकती है।
- अगर आपको किसी दवा की वजह से मायोकिमिया हो रहा है, तो डॉक्टर दूसरी दवा लेने की सलाह दे सकते हैं।
- स्ट्रेस कम करने, नींद में सुधार, स्मोकिंग कम करने जैसे उपाय करके भी आंखों का फड़कना कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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