Symptoms Of Hormonal Imbalance in Females: आज के समय में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) प्रजनन आयु की महिलाओं के बीच एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चिंता बनकर उभरा है। हमारे देश में हर पांच में से एक महिला इस स्थिति से जूझ रही है। यह केवल प्रजनन स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक जटिल 'एंडोक्राइन' यानी हार्मोनल विकार है। पीसीओएस के मामले बढ़ने का सबसे बड़ा कारण हमारी आधुनिक और निष्क्रिय जीवनशैली है।
Health Tips: महिलाओं में क्यों बढ़ती जा रही है PCOS की समस्या, जानें क्या है इसके पीछे का मूल कारण?
How Stress Affects PCOS: पीसीओएस एक ऐसी समस्या है जिससे हमारे देश में बहुत सी महिलाएं परेशान रहती हैं। ऐसा होने के पीछे कई कारण हैं, मगर इन कारणों के बारे में बहुत कम बात किया जाता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं, साथ ही इसे ठीक करने के उपाय के बारे में भी जानेंगे।
पीसीओएस की असली जड़
ज्यादातर मामलों में, इंसुलिन रेजिस्टेंस ही पीसीओएस का मूल कारण होता है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो खून में शुगर और इंसुलिन दोनों बढ़ जाते हैं। यह बढ़ा हुआ इंसुलिन हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे चेहरे पर अनचाहे बाल, मुंहासे और तेजी से वजन बढ़ने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। आहार में चीनी और मैदा कम करके इसे सुधारा जा सकता है।
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खराब जीवनशैली और मानसिक तनाव का असर
आज के समय में 'सेडेंटरी लाइफस्टाइल' पीसीओएस के सबसे बड़े कारणों में से एक है। देर रात तक जागना और तनावपूर्ण कार्यशैली शरीर के कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) को बढ़ाती है। बढ़ा हुआ तनाव सीधे तौर पर हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। शारीरिक व्यायाम की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे वजन घटाना लगभग असंभव हो जाता है और पीसीओएस के लक्षण और अधिक गंभीर हो जाते हैं।
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पर्यावरणीय कारक और जेनेटिक्स की भूमिका
पर्यावरण में मौजूद टॉक्सिन्स और प्लास्टिक भी हार्मोन्स में गड़बड़ी पैदा करते हैं। इसके अलावा, आनुवंशिकता या जेनेटिक्स भी एक महत्वपूर्ण कारक है। अगर परिवार में मां या बहन को पीसीओएस की समस्या रही है, तो अन्य महिलाओं में इसके होने की संभावना 50% तक बढ़ जाती है। हालांकि, जेनेटिक्स को बदला नहीं जा सकता, लेकिन सही पोषण और दिनचर्या से इसके प्रभाव को कम जरूर किया जा सकता है।
आदतों में सुधार लाना ही सबसे बड़ा सामाधान
पीसीओएस को सिर्फ दवाइयों से ठीक नहीं किया जा सकता, इसके लिए दिनचर्या में कुछ सकारात्मक बदलाव करने की जरूरत है। अपने आहार में फाइबर, प्रोटीन और साबुत अनाज शामिल करें और रोजाना कम से कम 30 मिनट का व्यायाम करें। वजन में मात्र 5-10% की कमी भी आपके हार्मोन्स को वापस पटरी पर ला सकती है।
Polycystic ovary syndrome
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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