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Health Tips: महिलाओं में क्यों बढ़ती जा रही है PCOS की समस्या, जानें क्या है इसके पीछे का मूल कारण?

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Mon, 09 Feb 2026 02:57 PM IST
सार

How Stress Affects PCOS: पीसीओएस एक ऐसी समस्या है जिससे हमारे देश में बहुत सी महिलाएं परेशान रहती हैं। ऐसा होने के पीछे कई कारण हैं, मगर इन कारणों के बारे में बहुत कम बात किया जाता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं, साथ ही इसे ठीक करने के उपाय के बारे में भी जानेंगे।

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Why PCOS is Rising in Women: Understanding the Root Causes and Lifestyle Links
पीसीओएस - फोटो : Freepik.com

Symptoms Of Hormonal Imbalance in Females: आज के समय में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) प्रजनन आयु की महिलाओं के बीच एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चिंता बनकर उभरा है। हमारे देश में हर पांच में से एक महिला इस स्थिति से जूझ रही है। यह केवल प्रजनन स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक जटिल 'एंडोक्राइन' यानी हार्मोनल विकार है। पीसीओएस के मामले बढ़ने का सबसे बड़ा कारण हमारी आधुनिक और निष्क्रिय जीवनशैली है।



जब शरीर में इंसुलिन का लेवल बढ़ता है, तो यह अंडाशय को अधिक मात्रा में एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) बनाने के लिए उत्तेजित करता है। इसके कारण ओव्यूलेशन की प्रक्रिया बाधित होती है और अंडाशय में छोटी-छोटी गांठें या सिस्ट बनने लगते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोसेस्ड फूड का अत्यधिक सेवन, शारीरिक सक्रियता की कमी और बढ़ता मानसिक तनाव इस समस्या को और अधिक ट्रिगर कर रहे हैं। अगर समय रहते इसे नियंत्रित न किया जाए, तो यह टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोगों जैसे कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कई गुना बढ़ा सकता है।

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पीसीओएस की समस्या - फोटो : Freepik.com

पीसीओएस की असली जड़
ज्यादातर मामलों में, इंसुलिन रेजिस्टेंस ही पीसीओएस का मूल कारण होता है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो खून में शुगर और इंसुलिन दोनों बढ़ जाते हैं। यह बढ़ा हुआ इंसुलिन हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे चेहरे पर अनचाहे बाल, मुंहासे और तेजी से वजन बढ़ने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। आहार में चीनी और मैदा कम करके इसे सुधारा जा सकता है।


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सेडेंटरी लाइफस्टाइल - फोटो : Adobe Stock

खराब जीवनशैली और मानसिक तनाव का असर
आज के समय में 'सेडेंटरी लाइफस्टाइल' पीसीओएस के सबसे बड़े कारणों में से एक है। देर रात तक जागना और तनावपूर्ण कार्यशैली शरीर के कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) को बढ़ाती है। बढ़ा हुआ तनाव सीधे तौर पर हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। शारीरिक व्यायाम की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे वजन घटाना लगभग असंभव हो जाता है और पीसीओएस के लक्षण और अधिक गंभीर हो जाते हैं।


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पीसीओएस की समस्या - फोटो : Freepik.com

पर्यावरणीय कारक और जेनेटिक्स की भूमिका
पर्यावरण में मौजूद टॉक्सिन्स और प्लास्टिक भी हार्मोन्स में गड़बड़ी पैदा करते हैं। इसके अलावा, आनुवंशिकता या जेनेटिक्स भी एक महत्वपूर्ण कारक है। अगर परिवार में मां या बहन को पीसीओएस की समस्या रही है, तो अन्य महिलाओं में इसके होने की संभावना 50% तक बढ़ जाती है। हालांकि, जेनेटिक्स को बदला नहीं जा सकता, लेकिन सही पोषण और दिनचर्या से इसके प्रभाव को कम जरूर किया जा सकता है।

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पीसीओएस की समस्या - फोटो : Freepik.com

आदतों में सुधार लाना ही सबसे बड़ा सामाधान
पीसीओएस को सिर्फ दवाइयों से ठीक नहीं किया जा सकता, इसके लिए दिनचर्या में कुछ सकारात्मक बदलाव करने की जरूरत है। अपने आहार में फाइबर, प्रोटीन और साबुत अनाज शामिल करें और रोजाना कम से कम 30 मिनट का व्यायाम करें। वजन में मात्र 5-10% की कमी भी आपके हार्मोन्स को वापस पटरी पर ला सकती है।

Polycystic ovary syndrome

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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