आजकल हेल्थ और फिटनेस के नाम पर विटामिन सप्लीमेंट्स लेना एक आम ट्रेंड बन चुका है। सोशल मीडिया, फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और ऑनलाइन विज्ञापनों को देखकर लोग बिना डॉक्टर की सलाह के तरह-तरह के सप्लीमेंट्स खरीदकर सेवन करने लगते हैं।
Alert: सेहत के लिए फायदेमंद सप्लीमेंट्स कहीं कर न दें बीमार? आपकी ये गलती पड़ सकती है भारी
- विटामिन, मिनरल, प्रोटीन पाउडर और मल्टीविटामिन को लोग सेहतमंद रहने का आसान उपाय मानते हैं। डॉक्टर भी कई मामलों में सप्लीमेंट्स की सलाह देते हैं, खासकर तब जब शरीर में किसी खास पोषक तत्व की कमी पाई जाए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में कम्युनिटी मेडिसिन के निदेशक-प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर कहते हैं, अक्सर लोग यह सोच लेते हैं कि मल्टीविटामिन की गोलियां उनकी सारी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी कर देंगी। जबकि हकीकत यह है कि शरीर केवल विटामिनों से नहीं चलता। शरीर को रोजाना मिनरल्स, प्रोटीन, फैट, कार्ब, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और पर्याप्त पानी की भी जरूरत होती है।
अगर कोई व्यक्ति सिर्फ मल्टीविटामिन पर निर्भर हो जाए और संतुलित आहार को नजरअंदाज करे, तो इससे शरीर में अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इसका असर दिल, किडनी और लिवर पर पड़ सकता है।
कभी भी एक ही समय पर दो सप्लीमेंट्स नहीं लेना चाहिए। आपको बिना डॉक्टर की सलाह के कुछ भी नहीं लेना चाहिए। ऐसे आहार जिसमें सब्जी एवं दाल की मात्रा अधिक हो का सेवन करें, जो शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्वों की पूर्ति कर सके।
विटामिन डी वाले सप्लीमेंट्स
विटामिन डी को लोग अक्सर पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं, लेकिन यह वसा में घुलनशील विटामिन है। इसका मतलब है कि यह शरीर में जमा हो सकता है और ज्यादा मात्रा में लेने पर आसानी से बाहर नहीं निकलता। विटामिन डी की अधिकता से मांसपेशियों में दर्द, मूड स्विंग्स, किडनी स्टोन और पेट में तेज दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में दिल की आर्टरीज में कैल्सिफिकेशन यानी कैल्शियम का जमाव हो सकता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बन सकता है।
दूसरी ओर, विटामिन ए, डी, ई और के वसा में घुलनशील होते हैं। ये भी शरीर में स्टोर हो जाते हैं। अगर इन्हें लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा लिया जाए, तो ये शरीर में जमा होकर गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
कैल्शियम सप्लीमेंट्स को लेकर सावधानियां
कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है, लेकिन प्रतिदिन 2,500 मिलीग्राम से ज्यादा कैल्शियम का सेवन नुकसानदायक हो सकता है। जरूरत से ज्यादा कैल्शियम आर्टरीज में प्लाक जमा कर उन्हें सख्त बना देता है। इससे रक्त संचार प्रभावित होता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
मैग्नीशियम और आयरन का जोखिम
मैग्नीशियम मांसपेशियों और नर्व सिस्टम के सही कामकाज में मदद करता है, लेकिन इसकी ओवरडोज उन लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है, जिनकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है। किडनी के कमजोर होने पर मैग्नीशियम शरीर में जमा होने लगता है इससे मतली, ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना और गंभीर किडनी समस्याएं हो सकती हैं।
इसी तरह आयरन की कमी से एनीमिया होता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा आयरन लेने से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अधिक आयरन शरीर में फ्री रेडिकल्स बनाकर दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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