ब्रेन में ट्यूमर होने की स्थिति गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है, हर साल इस बीमारी के कारण लाखों लोगों की मौत भी हो जाती है।
World Brain Tumor Day: क्या मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने से ब्रेन ट्यूमर होता है? जान लीजिए इस सवाल का जवाब
क्या मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन ब्रेन ट्यूमर का कारण बन सकती है? हम दिनभर फोन कान से लगाए रखते हैं, वीडियो देखते हैं, कॉल करते हैं और इंटरनेट चलाते हैं। ऐसे में यह चिंता स्वाभाविक है। आइए इस बारे में जान लेते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्रेन ट्यूमर का बढ़ता खतरा
ब्रेन ट्यूमर के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने, बीमारी का जल्द पता लगाने के तरीकों के बारे में शिक्षित करने और ब्रेन ट्यूमर के मरीजों को हौंसला देने के उद्देश्य से हर साल 8 जून को 'वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे मनाया जाता है।
हम बात करने के लिए अक्सर फोन को कान से लगाए रखते हैं, ऐसे में यह चिंता स्वाभाविक है कि कहीं ये ट्यूमर का खतरा तो नहीं बढ़ाती है? ये सवाल लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। इसे समझने के लिए किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि मोबाइल फोन से ब्रेन ट्यूमर होने की बात सिर्फ अफवाह है, इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
क्या फोन के इस्तेमाल से होता है ब्रेन ट्यूमर?
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने स्पष्ट किया है कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर या फिर कैंसर होने का कोई भी लिंक नहीं मिला है।
- इसके लिए 2.50 लाख से ज्यादा मोबाइल फोन यूजर्स का डेटा शामिल किया गया।
- इनमें से कई लोगों ने स्टडी में शामिल होने से पहले 15 साल या उससे ज्यादा समय तक नियमित मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया था।
- ऐसे लोगों में ब्रेन ट्यूमर (ग्लियोमा, मेनिंगियोमा के मामलों का पता लगाने के लिए औसतन 7 साल से ज्यादा समय तक नजर रखी गई।
- जिन लोगों ने अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा घंटे मोबाइल फोन से बात की थी, उनमें ब्रेन ट्यूमर होने की दर उन प्रतिभागियों से अलग नहीं थी जिन्होंने मोबाइल का इस्तेमाल काफी कम किया था।
- इन नतीजों से पता चलता है कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से ट्यूमर के होने का खतरा नहीं बढ़ता है।
क्या मोबाइल फोन से कैंसर होता है?
एक अन्य रिपोर्ट में कैंसर रिसर्च यूके के वैज्ञानिकों ने बताया कि मोबाइल फोन हो या फिर वाई-फाई, किसी से भी कैंसर नहीं होता है। वे जिस तरह का रेडिएशन का इस्तेमाल करते हैं, उनसे डीएनए को नुकसान पहुंचने का जोखिम न के बराबर होता है।
- मोबाइल फोन और फोन टावर के रेडिएशन में डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर पैदा करने के लिए एनर्जी नहीं होती है।
- वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के बीच सीधा एवं निश्चित संबंध स्थापित नहीं हुआ है, लेकिन शोध अभी भी जारी हैं।
कौन सी चीजें बढ़ा रही हैं खतरा?
शोध में अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कौन सी आदते सीधे तौर पर ब्रेन ट्यूमर का कारण बनती है। फिर भी कुछ जीवनशैली कारकों को खतरा बढ़ाने वाला माना जाता रहा है।
- धूम्रपान शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और कोशिकीय क्षति बढ़ाता है। अत्यधिक शराब सेवन भी कई कैंसरों का जोखिम बढ़ाता है।
- मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता शरीर में सूजन बढ़ा सकती हैं। कुछ अध्ययनों में मोटापे और कुछ प्रकार के मस्तिष्क ट्यूमर के बीच संभावित लिंक देखे गए हैं।
- खराब नींद, अत्यधिक तनाव और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीधे ब्रेन ट्यूमर का कारण तो नहीं माना जाता, लेकिन ये मस्तिष्क स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।
- विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से दूरी बनाए रखना समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
--------------
स्रोत:
Mobile phone use and brain tumour risk – COSMOS, a prospective cohort study
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।