World No-Tobacco Day: हमारी जिन आदतों को सेहत के लिए सबसे खतरनाक और जानलेवा माना जाता है, धूम्रपान उनमें से एक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तंबाकू का किसी भी रूप में इस्तेमाल सेहत के लिए जहर जैसा खतरनाक है। चाहे आप गुटखा के रूप में इसे चबाते हैं या सिगरेट के रूप में धूम्रपान, सभी से आपके शरीर को नुकसान हो रहा है।
World No-Tobacco Day: आने वाली पीढ़ियों को तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए फ्रांस सरकार का बड़ा फैसला
World No-Tobacco Day: फ्रांस की स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्री कैथरीन वौट्रिन ने घोषणा की है कि देश में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यह नया कानून जुलाई 2025 से लागू होगा और इसका उद्देश्य भावी पीढ़ियों को तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाना है।
फ्रांस सरकार का बड़ा फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्वास्थ्य को होने वाले गंभीर जोखिमों को देखते हुए फ्रांस सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
फ्रांस की स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्री कैथरीन वौट्रिन ने घोषणा की है कि देश में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यह नया कानून जुलाई 2025 से लागू होगा और इसका उद्देश्य भावी पीढ़ियों को तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाना है।
स्वास्थ्य मंत्री ने इसी हफ्ते एक साक्षात्कार में कहा कि अब बस स्टॉप, पार्क, समुद्र तटों, रेस्तरां और स्कूलों के आसपास जैसे भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित होगा। यह निर्णय बच्चों और युवाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि जहां भी बच्चे मौजूद हों, वहां सिगरेट पीना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। नियम का उल्लंघन करने वालों पर 35 यूरो (करीब ₹3,200) का जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कैफे टेरेस और इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट को फिलहाल इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्री का यह भी कहना है कि ये फैसला सिर्फ कानून लागू करने का प्रयास नहीं है, बल्कि समाज में तंबाकू के प्रति नजरिया बदलने का भी प्रयास है।
हर साल लाखों लोगों की हो जाती है मौत
गौरतलब है कि दुनियाभर में हर साल 8 मिलियन (80 लाख) से ज्यादा लोग तंबाकू के कारण होने वाली बीमारियों से मारे जाते हैं, जिससे यह रोके जा सकने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बन गया है। लगभग 70 लाख मौतें सीधे तौर पर तंबाकू के सेवन के कारण होती हैं, जबकि 10 लाख के करीब मौतें सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने के कारण होती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तंबाकू में पाया जाने वाला निकोटिन अत्यधिक नशे की लत लगाने वाला रसायन है, जो मस्तिष्क के रिवार्ड सिस्टम को प्रभावित करता है। इससे व्यक्ति बार-बार सेवन करने के लिए मजबूर होता है। लेकिन हर बार सेवन के साथ, शरीर में हानिकारक टार, कार्बन मोनोऑक्साइड, और सैकड़ों कैंसरकारक रसायनों की मात्रा बढ़ती जाती है जिसके जानलेवा दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
करीब 12 प्रकार के कैंसर का खतरा
अध्ययनों से पता चलता है कि तंबाकू, विशेषकर धूम्रपान कम से कम 12 अलग-अलग प्रकार के कैंसर को बढ़ाने वाला हो सकता है। इनमें फेफड़े, वोकलकार्ड, मुंह और ग्रासनली, अग्न्याशय, मूत्राशय, पेट, आंत और मलाशय, लिवर, सर्वाइकल, किडनी और एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया कैंसर शामिल हैं। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) का कहना है कि धूम्रपान छोड़ने से इन कैंसर के होने का जोखिम काफी कम हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फ्रांस सरकार द्वारा लिए गए निर्णय से अन्य देशों को भी सीख लेने की आवश्यकता है और तंबाकू के सेवन बंद करने को लेकर लोगों को जागरूक करना जरूरी है।
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