मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे सुखद अनुभव होता है। हालांकि जिस तरह से लाइफस्टाइल में गड़बड़ी और पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में लाखों महिलाओं के लिए ये सपना, सपना ही रह गया है। गर्भधारण में कठिनाई, बार-बार गर्भपात जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना ऐसे मरीजों की भीड़ देखी जा सकती है।
Thyroid Risk: बार-बार हो रहा है मिसकैरेज? कहीं थायरॉइड की बीमारी तो नहीं है इसका कारण
Thyroid Disease Complications: बार-बार होने वाले मिसकैरेज की समस्या बढ़ती जा रही है, कहीं ये थायरॉइड डिसऑर्डर के कारण तो नहीं है? थायरॉइड हार्मोन भ्रूण के शुरुआती विकास, प्लेसेंटा के काम और गर्भाशय की सेहत के लिए जरूरी होते हैं।
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थायरॉइड की बीमारी और इसके खतरे
अध्ययनों से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है।
- हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन की कमी) का सीधा असर महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है।
- अनियंत्रित थायरॉइड की समस्या के कारण पीरियड्स की अनियमितता बढ़ जाती है जिससे ओव्यूलेशन प्रभावित होता है और गर्भधारण में कठिनाईयां आ सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में बच्चे के दिमाग और शरीर के विकास के लिए भी मां का थायरॉइड हार्मोन बेहद जरूरी होता है। अगर यह हार्मोन संतुलित न हो, तो भ्रूण के विकास पर असर पड़ सकता है।
(किन कमियों से होती है थायरॉइड की बीमारी? आप भी हैं शिकार तो जानिए कैसे मिलेगा आराम)
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाएं अक्सर अत्यधिक थकान, वजन बढ़ने, बाल झड़ने, मूड स्विंग्स और अनियमित पीरियड्स जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कई बार ये थायरॉइड की समस्याओं की भी संकेत हो सकता है। अगर समय रहते जांच और सही इलाज से थायरॉइड को कंट्रोल न किया जाए तो इसका असर गर्भधारण पर भी पड़ने का खतरा रहता है।
प्रेग्नेंसी में आ सकती हैं दिक्कतें
थायरॉइड हार्मोन में गड़बड़ी का असर सीधे महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
- हाइपोथायरॉइडिज्म के कारण शरीर में अंडा बनने और निकलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे गर्भधारण में परेशानी आती है।
- थायरॉइड की समस्या महिलाओं में पीरियड्स को अनियमित बना देती है।
- कई मामलों में थायरॉइड डिसऑर्डर शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ा देता है, जो ओव्यूलेशन को रोक सकता है।
- यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी महिलाओं को प्रेग्नेंसी की प्लानिंग के समय डॉक्टर से मिलकर थायरॉइड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
थायरॉइड के कारण गर्भपात का भी खतरा
जिन महिलाओं में थायरॉइड की समस्या होती है उनमें बार-बार मिसकैरेज यानी गर्भपात होने का खतरा भी अधिक रहता है।
- हाइपोथायरॉइडिज्म का गर्भावस्था को बनाए रखने वाले हार्मोनल सिस्टम पर असर पड़ता है।
- जिन महिलाओं का थायरॉइड-स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) लेवल ज्यादा होता है, उनमें गर्भपात का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक देखा गया है।
- थायरॉइड हार्मोन में गड़बड़ी होने पर भ्रूण सही तरह से विकसित नहीं हो पाता। कई मामलों में महिला को गर्भधारण तक हो सकता है।
प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं तो जान लीजिए ये बातें
अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन के अनुसार, प्रेग्नेंसी प्लान करने वाली महिलाओं में टीएसएच लेवल टेस्ट जरूर कराना चाहिए। इसे 2.5 mIU/L से कम रखने वाले उपाय भी जरूरी हैं। अगर ये बढ़ा रहता है तो समय पर इलाज शुरू करने से हेल्दी प्रेग्नेंसी की संभावना काफी बढ़ सकती है।
थायरॉइड को कंट्रोल करने के लिए आहार में आयोडीन, सेलेनियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्वों का संतुलित सेवन जरूरी माना जाता है।
- आयोडीनयुक्त नमक, अंडे, डेयरी प्रोडक्ट्स, नट्स और हरी सब्जियां थायरॉइड हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।
- तनाव भी थायरॉइड हार्मोन्स को प्रभावित कर सकता है। इसलिए योग, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद जरूरी मानी जाती है।
- मोटापा के शिकार लोगों थायरॉइड विकारों का जोखिम अधिक होता है। वजन कंट्रोल के लिए नियमित व्यायाम जरूर करें।
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स्रोत:
Recurrent pregnancy loss in patients with thyroid dysfunction
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