साल 1957 में फ्रांसीसी दार्शनिक और साहित्यिक आलोचक रोलां बार्थ ने चिप्स को 'देशभक्त' बताया था। एक सदी पहले, आलू में लगी एक बीमारी ने कुछ ही साल में आयरलैंड की आधी आबादी खत्म कर दी थी। आज चीन, भारत, रूस और यूक्रेन आलू के प्रमुख उत्पादक हैं। आलू के साथ इन देशों के अंतरंग और जटिल संबंध हैं। लेकिन इनमें से कोई भी आलू को मूल रूप से अपना नहीं कह सकते। 8,000 साल पहले दक्षिण अमेरिका के एंडीज में आलू की खेती शुरू की गई थी। 1500 के बाद इसे यूरोप लाया गया, जहां से यह पश्चिम और उत्तर की ओर फैला और फिर से अमेरिका पहुंचा।
इतिहास के आइने में कहानी उस आलू की, जो विटामिन और पोषक तत्वों का है खजाना
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आलू कितना जरूरी?
चावल, गेहूं और मक्का के बाद आलू दुनिया की चौथी सबसे अहम फसल है। गैर-अनाजों में इसका पहला नंबर है। आलू की कामयाबी के पीछे है इसकी पौष्टिकता, खेती में आसानी और जमीन में छिपे रहने की वजह से युद्धों में इसकी सुरक्षा। आलू की उत्पत्ति को समझने की एक सही जगह है इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP), जहां आलू से जुड़े तमाम तरह के शोध होते हैं। पेरू की राजधानी लीमा के एक उपनगर में बनाए गए इस केंद्र में हजारों तरह के आलू के नमूने मिलते हैं।
CIP जीन बैंक के सीनियर क्यूरेटर रेने गोमेज कहते हैं, "चिली से लेकर संयुक्त राज्य अमरीका तक आलू कहीं भी मिल जाएगा लेकिन इसकी आनुवंशिक विविधता एंडीज में ही मिलती है।" आलू की खेती सबसे पहले लीमा से करीब 1,000 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में टिटिकाका लेक के पास शुरू हुई थी। आलू जल्द ही पहाड़ों पर रहने वाले इंका सहित स्वदेशी समुदायों का अहम खाना बन गया।आलू को फ्रीज करके और सुखाकर बनाया जाने वाला चूनो कई साल तक या कभी-कभी दशकों तक चल जाता था।
अमेरिका से बाहर
1532 में स्पेन के आक्रमण ने इंका को खत्म कर दिया लेकिन आलू की खेती खत्म नहीं हुई। स्पेन के लोग इसे अटलांटिक के पार ले गए, जैसे वे टमाटर, एवेकाडो और मक्का ले गए थे। इतिहासकार इसे दि ग्रेट कोलंबियन एक्सचेंज कहते हैं। इतिहास में पहली बार आलू अमरीका से बाहर गया। एंडीज से लाई गई शुरुआती किस्मों को स्पेन और यूरोप के मुख्य हिस्से में उगाना आसान नहीं रहा।
आनुवंशिकी के वैज्ञानिक हर्नन ए। बर्बानो का कहना है कि एंडीज में आलू के पौधों को दिन में 12 घंटे सूरज की रोशनी मिलती थी। यूरोप में गर्मी के लंबे दिनों ने आलू के पौधों को भ्रमित कर दिया और गर्म महीनों में वे बढ़ नहीं पाए।
पतझड़ और बर्फीले मौसम में आलू के पौधों का जिंदा रहना भी मुश्किल था। यूरोप में आलू की खेती का पहला दशक ना कामयाब रहा। आयरलैंड में आलू को बेहतर मौसम मिला। यहां के ठंडे लेकिन बर्फ-रहित मौसम में फसल तैयार होने का पर्याप्त समय मिला।
किसानों ने यहां आलू की ऐसी किस्म तैयार की जो गर्मियों की शुरुआत में तैयार हो जाती थी। यहीं से आलू किसानों की प्रमुख फसल बन गया। आलू की फसल किसी बीमारी की वजह से खराब हो जाने के बाद आयरलैंड में अकाल पड़ गया था, कहा जाता है कि इस अकाल की वजह से आयरलैंड की आबादी कुछ सालों में आधी होकर रह गई थी
पौष्टिक खाना
किसानों ने आलू को अहमियत दी क्योंकि प्रति हेक्टेयर उनको बेजोड़ पौष्टिकता मिलती थी। आयरलैंड में किराये की जमीन पर खेती होती थी और जमीन मालिकों ने किराया बढ़ा दिया था। किसान ऐसी फसल लेने को मजबूर थे जो कम जमीन में ज्यादा पैदावार दे। समाजशास्त्री जेम्स लैंग के मुताबि क प्रति एकड़ जमीन में आलू से ज्यादा पैदावार किसी और फसल की नहीं थी। इसमें मेहनत कम थी और फसल को रखना आसान था। विटामिन ए और डी को छोडकर आलू में सभी प्रमुख विटामिन और पोषक तत्व मिलते हैं। जीवन बचाने की जो खूबी आलू में है वह किसी और फसल में नहीं।
छिलके वाले आलू के साथ दूध के कुछ उत्पादों को मिला दें तो स्वस्थ मानव आहार तैयार होता है। आलू के हर 100 ग्राम में दो ग्राम प्रोटीन मिलता है। 16वीं सदी के आयरलैंड में उपभोग के कुछ अनुमानों पर य कीन करें तो प्रति वयस्क प्रति दिन साढ़े पांच किलो आलू की आपूर्ति थी।
17वीं और 18वीं सदी में एक एकड़ जमीन पर आलू की खेती और एक गाय के दूध से 6 से 8 लोगों के परिवार को पूरे साल का भोजन मिल जाता था। किसी भी दूसरी फसल से यह संभव नहीं था। आयरलैंड और ब्रिटेन के किसानों का आलू से अटूट नाता बन गया। ब्रिटिश द्वीपों से आलू पूरब की ओर बढ़ा और उत्तरी यूरोप तक फैल गया। 1650 तक आलू बेल्जियम, नीदरलैंड और लक्जमबर्ग तक पहुंच गया। 1740 तक वह जर्मनी, प्रूशिया और पोलैंड तक और 1840 तक रूस पहुंच गया। किसानों ने अपने-अपने देश की जलवायु के हिसाब से किस्में छांटीं और आलू फलता-फूलता गया।
आलू के फायदे
ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार के युद्ध और (इंग्लैंड-फ्रांस) सात साल के युद्ध के दौरान किसानों को आलू में एक और फायदा दिखा। इस पर टैक्स लगाना और इसे युद्ध में नष्ट करना मुश्किल था। अर्ल कहती हैं, "गेहूं की खड़ी फसल को छिपाया नहीं जा सकता।" टैक्स अधिकारी खेत का आकार और फसल देखकर टैक्स अनुमान लगाते थे और फसल तैयार होने पर वसूली के लिए आ जाते थे। लेकिन भूमिगत आलू में यह संभव नहीं था। जरूरत होने पर उसे धीरे-धीरे निकाला जा सकता है। लैंग ने लिखा है, "इस तरह की कटाई फसल को टैक्स अधिकारियों से छिपाकर रखती है और युद्ध के समय किसानों की खाद्य आपूर्ति बचाकर रखती है।"
लूटमार करने वाले सैनिक अनाज के गोदामों पर धावा बोलते हैं, लेकिन वे खेत खोदकर फसल नहीं निकालते। कुलीनों और सैन्य रणनीतिकारों ने यह खूबी पहचान ली थी। प्रूशिया के राजा फ्रेडरिक ने आलू की खेती करने के निर्देश बंटवाए थे। वह चाहते थे कि ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध में अगर दुश्मन सेनाएं हमला करती हैं तो किसानों के पास खाना रहे। दूसरे देशों ने भी ऐसा किया। संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर एसोसिएशन (FOA) के मुताबि क 1800 के दशक की शुरुआत में नेपोलियन कालीन युद्ध शुरू होने तक आलू यूरोप का सुरक्षित आहार बन गया था। इतिहासकार विलियम मैकनील के मुताबि क 1560 के बाद यूरोप में जितने भी युद्ध हुए उनके बाद आलू का रकबा बढ़ता गया। इनमें दो विश्व युद्ध भी शामिल हैं।