आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास अपने हिस्से का तनाव है। बच्चों को पढ़ाई का, बड़ों को नौकरी का, महिलाओं को घर के कामों का, हर कोई किसी न किसी तरह के तनाव से घिरा हुआ है। हर दिन एक ही तरह के रुटीन के हिसाब से चलते हुए हमारा मन ऊब जाता है और चिड़चिड़ा होने लगता है। धीरे-धीरे यह चिड़चिड़ापन अवसाद में बदल जाता है। इसलिए शरीर और मन दोनों को रिचार्ज करने के लिए छुट्टी लेना बहुत जरूरी है।
जिंदगी में कुछ दिनों का ब्रेक है जरूरी नहीं तो हो सकते हैं अवसाद के शिकार
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कई रिसर्च में पाया गया है कि छुट्टी पर जाना हमारे स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है। तनाव महसूस कराने वाले काम और वातावरण से दूर जाने से हम वह काम करते हैं, जिसे रोज की जिंदगी में अनदेखा करते हैं। इससे हमारे मस्तिष्क को सुकून मिलता है।
छुट्टी हमें खुद को खुद से जोड़ने में मदद करती है। यह जानने में मदद करती है कि हम क्या चाहते हैं और उसे कैसे पा सकते हैं। विशषज्ञों के अनुसार, एक अच्छी छुट्टी से लौटने के बाद लोग एक नई ऊर्जा के साथ लौटते हैं। वे बेहतर तरीके से काम करते हैं और उनकी उत्पादकता बढ़ती है।
हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का एक मुख्य कारण स्ट्रेस होता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि छुट्टियां लेने से महिलाओं और पुरुषों में हृदय रोग और दिल के दौरे के जोखिम को कम किया जा सकता है। 2010 में की गई फ्रामिंघम हार्ट स्टडी के मुताबिक छुट्टियां मनाने वाले पुरुषों में दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु की संभावना 32 फीसदी कम होती है, जबकि महिलाओं में मृत्यु की संख्या 50 फीसदी तक कम हो जाती है।
छुट्टियों का सीधा असर आराम और सुकून से जुड़ा हुआ है। जब हम छुट्टियों पर जाते हैं तो वे सारे काम करते हैं, जिन्हें करने से हमें खुशी मिलती है। हम एक तरह से अपनी नींद और खाने का कोटा भी पूरा करते हैं, जिससे हमारे थके हुए शरीर और मन को राहत मिलती है।