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मच्छरों के भिनभिनाने की आवाजें तो आपने सुनी होंगी, लेकिन असलियत कुछ और ही है
मंजू ममगाईं
Updated Thu, 04 Oct 2018 09:46 AM IST
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मच्छरों की भिनभिनाहट से अचानक जब कभी आपकी नींद टूट जाती है तो उस समय आपका गुस्सा यकीनन सातवें आसमान पर पहुंच जाता होगा। अगर आपके साथ भी अक्सर यह होता है तो आपको बता दें, मच्छर वास्तव में कोई आवाज निकालते ही नहीं हैं। इस बात को सुनकर हैरानी होने की जगह पढ़ें ये खबर।
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आपने अक्सर महसूस किया होगा कि मच्छर हमेशा आपके कान के पास आकर ही भिनभिनाते हैं। हद तो तब हो जाती है जब उनका यह भिनभिनाना व्यक्ति की बर्दाश्त से बाहर हो जाता है। पर ऐसा क्यों होता है, इस सवाल का जवाब शायद ही पता हो आपको । सोते समय आपके कान के पास परेशान करने वाली आवाजें करने वाले मच्छरों के बारे में अगर यह कहा जाए कि ये अपने मुंह से ऐसी कोई आवाज निकालते ही नहीं हैं तो आप शायद इस बात पर आसानी से विश्वास नहीं कर पाएंगे। दरअसल यह भिनभिनाहट उनके पंख फड़फड़ाने की आवाज होती है।
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मच्छर के पंख भी कई कीटों की तरह बहुत छोटे होते हैं। यही वजह है कि जब वो उड़ते हुए अपने पंखों को तेजी से खोलते-बंद करते हैं तो उनकी यह आवाज हमें सुनाई देती है। वैसे यह आवाज दूर से सुनाई नहीं देती इसलिए लोगों को यह लगता है कि मच्छर हमारे कान के पास आकर ही अपनी आवाज सुना रहे हैं। दरअसल मच्छर एक सेकेंड में 300 से 600 बार अपने पंख फड़फड़ाते हैं। आपके कान के पास सुनाई देने वाली आवाजें उनके पंखों के फड़फड़ाने से होने वाले शोर पैदा होती है।
जब नर और मादा मच्छर अपने पंखों को एक साथ फड़फड़ाते हैं तब आपको इस तरह की आवाजें सुनाई देती हैं। कई वैज्ञानिकों की मानें तो मच्छरों की ये आवाज उनके विपरीत लिंग की तलाश करने में उनकी मदद करती है।
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हर व्यक्ति मच्छरों की आवाज के लिए अलग तरह से संवेदनशील होता है। जब एक साथ कई मच्छर भिनभिनाते हुए आपके पास मंडराने लगते हैं तो उनकी भिनभिन की फ्रीक्वेंसी इतनी तेज होती है कि यह वाइब्रेशन न सिर्फ कान के परदों पर महसूस होती है बल्कि ये मस्तिष्क के सूचना तंत्र पर एक विशेष प्रभाव डालती है।