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बिस्तर में जबरदस्ती करने वाले पति को मैंने छोड़ दिया

Sun, 17 Feb 2019 08:59 PM IST
मंजू ममगाईं बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: मंजू ममगाईं Updated Sun, 17 Feb 2019 08:59 PM IST
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A Life of a girl after domestic violence and abuse

मुझे ऐसा लग रहा था कि वो रात बीतेगी नहीं। मेरा सिर फट रहा था और मैं लगातार रोए जा रही थी। रोते-रोते जाने कब आंख लग गई। सुबह छह बजे नींद खुली तो मेरा पति सामने था। पिछली रात का सवाल लिए। उसने पूछा, "तो क्या सोचा तुमने? तुम्हारा जवाब हां है या ना? "मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। आखिर हिम्मत करके बोली, "आप आज ऑफिस जाइए प्लीज। मैं आपको शाम तक फोन करके बता दूंगी, वादा करती हूं।"

उसने धमकाते हुए कहा, "ठीक है। मैं चार बजे खुद तुम्हें फोन करूंगा। मुझे जवाब चाहिए और हां, में जवाब चाहिए, वर्ना रात में सजा भुगतने के लिए तैयार रहना। "सजा से उसका मतलब था 'एनल सेक्स'। उसे पता था कि मुझे इससे बहुत दर्द होता है, इसीलिए उसने इसे 'टॉर्चर' करने का तरीका बना लिया था। नौ बजे तक वो और उसकी बड़ी बहन दोनों ऑफिस जा चुके थे। मैं घर में अकेली थी। घंटों सोचने के बाद मैंने अपने पापा को फोन लगाया और कहा कि मैं अब उसके साथ नहीं रह सकती।

A Life of a girl after domestic violence and abuse

मुझे डर था कि पापा नाराज होंगे लेकिन उन्होंने कहा, "तुम बैग उठाओ और निकलो वहां से।" मैं अपने 'ओरिजिनल सर्टिफिकेट्स' और एक किताब लेकर बस अड्डे की तरफ भागी। पति को मेसेज किया कि, 'मेरा जवाब ना है, मैं अपने घर जा रही हूं', और फोन स्विच ऑफ कर लिया। थोड़ी देर बाद मैं अपनों के बीच अपने घर थी। मैंने शादी के दो महीने में ही अपने पति का घर छोड़ दिया था। मेरा पति, साहिल, जिसे मैं आज से तकरीबन तीन साल पहले ग्रैजुएजशन के आखिरी साल में मिली।

वो बहुत हंसमुख था। मुझे उसका आस-पास रहना अच्छा लगता था और यूं ही आस-पास रहते हुए प्यार हो गया। हम घूमने जाते, घंटों फोन पर बातें करते। जिंदगी कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थी, लेकिन ये गुलाबी रोमांस ज़्यादा दिन नहीं टिक सका।

A Life of a girl after domestic violence and abuse
- फोटो : social media

धीरे-धीरे मुझे लगने लगा कि ये वो बराबरी वाला रिश्ता नहीं है, जो मैं चाहती थी। ये रिश्ता वैसा ही होता जा रहा था जैसा मेरे मम्मी और पापा का था। फर्क इतना कि मम्मी कुछ नहीं कहती थीं और मैं चुप रह नहीं पाती थी। पापा छोटी-छोटी बातों को लेकर मम्मी पर चीखते, हाथ उठाते। मम्मी बस रोती रहतीं। साहिल के साथ बहस होती तो वो अक़्सर धक्का-मुक्की पर उतर आता और जबरदस्ती करीब आने की कोशिश करता। मैं मना करती तो चीखता चिल्लाता।

एक बार उसने मुझसे पूछा, "अच्छा बताओ, अगर मैं कभी तुम पर हाथ उठाऊं तो...?" मैं हैरान रह गई। बमुश्किल अपने गुस्से को काबू में कर बोली, "मैं उसी दिन तुमसे अलग हो जाऊंगी।" उसने तपाक से कहा, "इसका मतलब तुम मुझसे प्यार ही नहीं करती। प्यार में तो कोई शर्त नहीं होनी चाहिए।" इसके बाद तकरीबन एक महीने तक हमारी बोलचाल बंद रही। धीरे-धीरे लड़ाइयां बढ़ने लगीं। कई बार मैंने रिश्ता खत्म करने की कोशिश की लेकिन हर बार वो माफी मांग लेता था।

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A Life of a girl after domestic violence and abuse
- फोटो : social media

मैं खुद को हमेशा के लिए साहिल से दूर करना चाहती थी लेकिन पता नहीं क्यों ऐसा कर नहीं पा रही थी। इस बीच मुझ पर शादी का दबाव बनाया जा रहा था। मैं अब टीचर बन गई थी। मैं क्लास में होती और मम्मी-पापा का फोन आ जाता। फोन पर हर बार वही बात होती, "शादी के बारे में क्या सोचा? साहिल से ही कर लो। उससे नहीं करनी तो हमारी पसंद के लड़के से कर लो। अपनी दो छोटी बहनों के बारे में भी सोचो..." वगैरह वगैरह।

घर में कुछ भी गड़बड़ होती तो उसे मेरे शादी ना करने से जोड़ दिया जाता। मम्मी की तबीयत खराब इसलिए हुई क्योंकि मैं शादी नहीं कर रही हूं। पापा को बिजनेस में नुकसान हुआ क्योंकि मैं शादी नहीं कर रही हूं।

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A Life of a girl after domestic violence and abuse

मैं इतनी परेशान हो गई कि आखिर मैंने शादी के लिए हामी भर दी। मैं तैयार तब भी नहीं थी और साहिल का वादा, कि वो कोई ऐसा काम नहीं करेगा जिससे मुझे दुख हो, पर भरोसा भी नहीं था। शादी के बाद मेरा डर सच बनकर सामने आने लगा। साहिल मुझे कठपुतली की तरह अपने इशारों पर नचाने लगा। मुझे कविताएं लिखने का शौक था। मैं फेसबुक पर अपनी कविताएं शेयर करती थी। उसने इस पर रोक लगा दी। मैं वही कपड़े पहन सकती थी जो वो चाहता था। मुझे याद है एक बार उसने कहा था, "रात तक अपनी पढ़ाई-लिखाई का काम निबटाकर बैठा करो। मुझे खुश नहीं रखोगी तो मैं कहीं और जाऊंगा।"

वो कहता था कि मैं उसे खुश नहीं कर पाती हूं इसलिए पॉर्न देखकर कुछ सीखने की नसीहत देता और फिर उसके सिर पर हीरो बनने का शौक सवार हो गया। वो मुझे छोड़कर मुंबई जाना चाहता था।उसने कहा, "तुम यहीं रहकर नौकरी करो और मुझे पैसे भेजना। फिर मैं तुम्हारे नाम पर लोन लेकर घर भी खरीदूंगा।"

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