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Hartalika Teej 2022: माता पार्वती के जीवन से लें ये चार महत्वपूर्ण सीख, परिवार में रहेगी खुशहाली

Tue, 30 Aug 2022 06:15 AM IST
स्वाति शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वाति शर्मा Updated Tue, 30 Aug 2022 06:15 AM IST
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Hartalika Teej 2022: 4 important things to learn from mata parvati
सुखमय दाम्पत्य जीवन का प्रतीक शिव-पार्वती - फोटो : social media

हमारे धर्म ग्रंथ और देवी-देवताओं से जुड़ी कथाएं प्रेरणा पाने का अद्भुत स्रोत हैं। मुश्किल यह है कि हम हमेशा उनके सिर्फ ऊपरी रूप को देखते और समझते हैं। बजाय उस बात की गहराई को समझने के। इसलिए हम सिर्फ पूजा-पाठ और उपवास या कर्मकांड को ही भगवान की आराधना मान लेते हैं। जबकि असल में यह सारे विधि-विधान हमें किसी न किसी तरह की शिक्षा देने के लिए बनाये गए हैं। ये एक तरह का नीति मार्ग भी है जो हमें जीवन में अच्छा करने को प्रेरित कर सकता है और स्वयं में सकारात्मक बदलाव लाने को भी।


 
कोई भी व्रत या तपस्या बिना लगन और प्रतिबद्धता के पूर्ण नहीं होती। जीवन में अगर लक्ष्य तक पहुंचना है तो लक्ष्य के प्रति समर्पण बहुत जरूरी है। जैसा देवी पार्वती ने अपने अपने आराध्य को पाने के लिए किया। स्वयं महादेव भी पार्वती के कठिन तप के समक्ष झुके और उन्हें उनका मनचाहा वरदान दिया। देवी पार्वती अपने आप में स्त्री शक्ति का प्रतीक हैं और उन्हें इसी रूप में पूजा भी जाता है। उनके जीवन में आई बाधाएं उन्हें कभी डिगा नहीं पाईं और वे लक्ष्य तक पहुंची। इस हरतालिका जानिए वे 4 सीख जो देवी पार्वती के जीवन से प्रेरित हैं। 

Hartalika Teej 2022: 4 important things to learn from mata parvati
आगे बढ़ना है तो बाधाओं से न डरें - फोटो : Istock

1. मजबूत इरादे से मिलती विजय 

जीवन को किस तरह से जीना है और जीवन के ध्येय को लेकर कैसे आगे बढ़ना है यह बात देवी पार्वती से हर स्त्री को सीखनी चाहिए। उन्होंने भगवान शिव को वरण करने का इरादा किया था और इस इरादे पर वे अडिग रहीं। कोई भी बाधा, कोई भी लालच उन्हें इस इरादे से हिला नहीं पाया। यह इच्छाशक्ति देवी पार्वती के शक्ति स्वरूप को और ऊर्जावान बनाती है। एक आम स्त्री के भीतर भी जो इच्छाशक्ति होती है, वह उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद कर सकती है। बशर्ते वह अपने इरादे को दृढ़ रखे। चाहे जीवन में कितनी ही मुश्किलें आएं, यदि आपने ठान लिया है कि लक्ष्य तक पहुंचना ही है तो बाधाएं स्वयं आपके लिए रास्ता छोड़ हटने लग जाती हैं। फिर चाहे वो कोई परीक्षा हो, करियर हो या खुद को साबित करने का अवसर। 

Hartalika Teej 2022: 4 important things to learn from mata parvati
माँ पार्वती ने अल्प साधनों की किया शिव जी का पूजन - फोटो : social media

2. साधन महत्वपूर्ण नहीं

देवी पार्वती राजकुमारी थीं। उन्हें किसी बात की कोई कमी नहीं थी। वे चाहतीं तो कोई भी सुविधा उनको तुरंत मिल जाती, लेकिन उन्होंने जब कठिन तपस्या और व्रत का मार्ग चुना तो वे स्वयं कठिनाई भरे पथ पर चलीं, अल्प साधनों के साथ। उन्होंने शिवलिंग बनाने से लेकर भोले भंडारी को चढ़ाये जाने वाले फल-फूल तक बजाय आडंबर करने के, अपने पास प्राप्त अल्प संसाधनों का प्रयोग किया। वे स्वय गुफा में रहीं और प्राकृतिक साधनों से ही पोषण प्राप्त करती रहीं। यह हमें सीख देता है कि जब लक्ष्य सामने हो तो संसाधन या सुविधा नहीं, केवल आपका समर्पण मायने रखता है। भले ही फिर आप संसाधनहीन ही क्यों न हों, अगर आप लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं, तो लक्ष्य अवश्य मिलेगा। 

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Hartalika Teej 2022: 4 important things to learn from mata parvati
प्रेम और विश्वास का वरण - फोटो : Social media

3. प्रेम और विश्वास 

पार्वती के लिए भगवान विष्णु की ओर से भी विवाह का प्रस्ताव आया था लेकिन वे पहले ही मन प्राण से अपने पति रूप में महादेव शिव शंकर को चुन चुकी थीं। उनके किये चयन से उन्हें कोई डिगा नहीं पाया। भगवान विष्णु धन और ऐश्वर्य से भरपूर जीवन देने वाले और भगवान शिव बेहद साधारण जीवन जीने वाले। कैलाश पर्वत पर आसीन भोलेनाथ भौतिकताओं से परे हैं। लेकिन देवी पार्वती ने इस सबके बावजूद भोलेनाथ का ही वरण  किया। वे सब जानती थीं लेकिन उन्होंने अपने सच्चे प्रेम और विश्वास को हर सुख-सुविधा से ऊपर रखा और यही कारण है कि प्रभु भोलेनाथ ने भी उनके स्वाभिमान और प्रेम को सदैव सम्मान दिया। भौतिकतावादी जीवन की ओर तेजी से दौड़ रहे युग में यह बात और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब मात्र कुछ सुख-सुविधाओं के आगे प्रेम और विश्वास जैसी भावनाएं गौण हो जाती हैं। 

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Hartalika Teej 2022: 4 important things to learn from mata parvati
पार्वती और शिव का सुखमय जीवन - फोटो : Facebook

4. प्रसन्नता सदैव सर्वोपरि है

आप जीवन में कितना और क्या अचीव करते हैं इससे कहीं ज्यादा यह बात मायने रखती है कि वो अचीवमेंट आपको कितनी ख़ुशी देता है। शिवजी के साथ माँ पार्वती कंद-मूल खाकर, कम संसाधनों के बीच भी सुखपूर्वक अपने दाम्पत्य जीवन का आनंद लेती हैं। हरतालिका की पूजन और व्रत के पीछे भी मुख्य ध्येय शिव-पार्वती के खुशहाल दाम्पत्य जीवन जैसा जीवन पाने का ही होता है। इसी भावना के साथ यह पूजन किया जाता है कि हमारा जीवन भी भगवान शिव और माता पार्वती जैसा सहज, सुखों से भरपूर और आनंददायक बने। शिव-पार्वती के जीवन से जुड़ी छोटी-छोटी कथाएं और उनमें वर्णित उनका परस्पर प्रेम और आनंद हर एक के लिए प्रेरणा है। यह सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएं या तकलीफें हों, एक-दूसरे के साथ खुश रहना आपके ऊपर निर्भर करता है। 

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