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मस्त जिंदगी जीनी है तो 'मुक्काबाज' से सीखो ये 5 पैंतरे

Fri, 19 Jan 2018 10:21 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 19 Jan 2018 10:21 AM IST
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Lessons To Learn From Anurag Kashyap Film Mukkabaaz To Shine At Office
Mukkabaaz

''अपने टैलेंट का प्रमाणपत्र लेके सोसाइटी में झंडा गाड़ने निकले हो...दांत चियार के टें बोल जाओगे...पहले सही व्यक्तित्व के समक्ष दांत निपोरना सीख लो। इसी को कहते हैं असली पैंतरा।''



भला हो अनुराग कश्यप का जिन्होंने बिल्कुल सही वक्त पर अपनी फिल्म 'मुक्काबाज' परोस दी। जनवरी खत्म होने को है और 'अप्रेजल' की गहमागहमी लगभग हर प्राइवेट कंपनी में शुरू हो चुकी है। इसी के साथ बॉस की चरणवंदना भी तेज हो गई है। लेकिन अगर आप बिना चाटुकारता किए ऑफिस में अपनी धाक जमाना चाहते हैं तो फिल्म 'मुक्काबाज' से ये पांच पैंतरे जरूर अपना लीजिए...

Lessons To Learn From Anurag Kashyap Film Mukkabaaz To Shine At Office
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काम से अनाप-शनाप प्रेम कीजिए

बॉक्सिंग श्रवण के लिए पैशन है और सुनैना से वो 'अनाप-शनाप प्यार' करता है। दोनों को पाने के लिए वो पूरी दुनिया से भिड़ जाता है और दोनों ही चीजें हासिल भी करता है। इनके लिए उसने सही पैंतरा अपनाया। उसने अपनी निजी और पेशेवर जिंदगी में सफलता से संतुलन बनाए रखा।

ठीक इसी तरह आपको भी अपने काम से, दफ्तर से आशिकों जैसा प्यार करना होगा। तभी आपके प्यार (काम) की खुशबू मैनेजमेंट तक पहुंचेगी। फिर बिना किसी के तलवे चाटे आप अपने हर प्रतिद्वंद्वी को रिंग में नॉक आउट करते जाएंगे और ट्रॉफी आपके नाम होती जाएगी...

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बहुत हुआ सम्मान

''अरे गले में घंटी बांध के हमको फांसी दिए हुजूर
सांचा लेके हमको ढाला, आवाज़ों के कुएं में डाला
चाकर बनाके तलवा चटाया, खंजर देके पानी कटाया
जो सिखाया वो न करेंगे अब न सुनेंगे कह के रहेंगे
जबरन बने महान तुम्हारी ऐसी तैसी...
अरे बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी...
गरियाएंगे सीना तान तुम्हारी...
बहुत हुआ सम्मान तुम्हारी ऐसी तैसी''


फिल्म 'मुक्काबाज' के एक गाने की ये पंक्तियां हर कर्मचारी की टीस बयां करती है। पावर और पोजीशन का गलत इस्तेमाल करके बॉस अगर आपका भी शोषण करता है, ऊट-पटांग काम करवाता है तो अब बस 'बहुत हुआ सम्मान'। जिस तरह रेलवे में नौकरी करते वक्त श्रवण ने अपने रिपोर्टिंग मैनेजर को उसकी असली औकात याद दिलाई, (आप सेम-टू-सेम वैसा ही करने की सोचिएगा भी मत, वो फिल्म है) उसी तरह अगर आपको भी लगे कि आपका शोषण हो रहा है तो आवाज उठाइए, लेकिन तरीका थोड़ा संयमित होना चाहिए। अपनी बात को सही मंच पर रखिएगा। रिपोर्टिंग मैनेजर की अक्ल ठिकाने आएगी तो वो आपके साथ कायदे में रहेंगे और आप फायदे में रहेंगे।  

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गुस्से को सही जगह डायवर्ट करो

फिल्म में श्रवण (विनीत सिंह) को उसके बॉक्सिंग कोच संजय कुमार (रवि किशन) ने किस्सा बताया कि वह शुरू में फुटबॉलर बनना चाहते थे लेकिन बड़ी जाति वाले लड़कों ने उन्हें फुटबॉल खेलने नहीं दिया। इसका गुस्सा वह गेहूं की बोरी पर उतारते थे। देखते ही देखते वह बॉक्सर बन गए।

जिस तरह संजय कुमार ने अपने गुस्से को डायवर्ट करके अपने लिये नया रास्ता बनाया ठीक उसी तरह आपके अंदर भी किसी को लेकर कोई जलन या गुस्सा है तो उसे अपनी ऊर्जा में तब्दील कर दें और अग्रेसिव बर्ताव की जगह अग्रेसिव परफॉर्मेंस दें। 

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काम ही काम आएगा

''ज्यादा इंपॉर्टेंट है तुम किसको जानते हो, किसको पहचानते हो, कौन तुमको जानता है, कौन तुमको मानता है।''  

भगवान दास मिश्रा (जिमी शेरगिल) ने श्रवण सिंह (विनीत सिंह) के सपनों को तबाह करने के लिए अपनी एड़ी-चोटी एक कर दी, फिर भी श्रवण अपने टैलेंट और काम के दम पर आगे बढ़ते रहे।  ठीक इसी तरह आपको भी सिर्फ आपका काम ही काम आएगा। आप मजबूत कॉन्टैक्ट्स और पहचान किसी के आगे-पीछे डोल कर या चापलूसी करके नहीं, बल्कि आपने काम की बदौलत ही बना सकते हैं। बाकी तरीके सिर्फ शॉर्ट कट्स होते हैं, जिनका असर भी शॉर्ट टर्म तक ही रहता है।' 

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