Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025 से शुरू हो रही है। नौ दिन से इस पर्व में देवी मां के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान देश-विदेश के सभी देवी माता मंदिरों में विशेष पूजा कराई जाती है। इस दौरान देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ भी बढ़ जाती है। दुनियाभर में देवी सती के 52 शक्तिपीठ स्थापित हैं। इन प्राचीन और चमत्कारी शक्तिपीठों की महिमा अपार है। मान्यता है कि माता सती ने जब अपने प्राण त्याग दिए तो भगवान शिव ने पत्नी देवी सती का शरीर उठाकर सोक में तांडव करना शुरू किया। शिव तांडव से प्रलय की स्थिति आ गई। जिसे रोकने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंग खंड-खंड कर दिए। जहां-जहां उनके अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए।
Shardiya Navratri 2025 : शारदीय नवरात्रि में करें 51 शक्तिपीठों के दर्शन, जानें नाम, स्थान और खासियत
Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर आप अपने नजदीकि या पसंदीदा शक्तिपीठ में दर्शन के लिए जा सकते हैं। यहां आपको सभी 52 शक्तिपीठों के नाम, स्थान और मां का कौन सा अंग गिरा है, उसकी पूरी डिटेल दी जा रही है।
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उत्तर प्रदेश में शक्तिपीठ
1. मणिकर्णिका घाट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश - यहां माता सती की मणिकर्णिका गिरी थी। यहां माता के विशालाक्षी और मणिकर्णी स्वरूप की पूजा होती है।
2. माता ललिता देवी शक्तिपीठ, प्रयागराज - इलाहाबाद स्थित इस जगह पर माता सती के हाथ की अंगुली गिरी थी। यहां माता ललिता के नाम से जानी जाती हैं।
3. रामगिरी, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश में माता सती का दायां स्तन गिरा था। इस स्थान पर माता शिवानी के रूप में पूज्यनीय हैं।
4. उमा शक्तिपीठ वृंदावन, उत्तर प्रदेश में स्थित है। इसे कात्यायनी शक्तिपीठ के नाम से भी जानते हैं। यहां माता के बाल के गुच्छ और चूड़ामणि गिरे थे।
5. देवी पाटन मंदिर, बलरामपुर में माता का बायां स्कंध गिरा था। इस शक्तिपीठ में माता मातेश्वरी के रूप में विराजमान हैं।
उत्तर भारत के शक्तिपीठ
6. नैना देवी मंदिर- हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में शिवालिक पर्वत पर देवी सती की आंख गिरी थी। यहां माता देवी महिष मर्दिनी कही जाती हैं।
7. ज्वाला जी शक्तिपीठ- हिमाचल के कांगड़ा में देवी की जीभ गिरी थी, इस कारण इसका नाम सिधिदा या अंबिका पड़ा।
8. महामाया शक्तिपीठ, अमरनाथ के पहलगांव, कश्मीर में माता सती का गला गिरा था, यहां महामाया की पूजा होती है।
मध्य प्रदेश के शक्तिपीठ
9. हरसिद्धि देवी शक्तिपीठ- मध्य प्रदेश में देवी के दो शक्तिपीठ हैं। इनमें से एक हरसिद्धी देवी शक्तिपीठ है, जहां माता सती की कोहनी गिरी थी। यह रूद्र सागर तालाब के पश्चिमी तट पर स्थित है।
10. शोणदेव नर्मता शक्तिपीठ- मध्यप्रदेश के अमरकंटक में माता का दया नितंब गिरा था। यहां पर नर्मदा नदी का उद्गम होने के कारण यहां माता को नर्मता स्वरूप में पूजा जाता है।
पंजाब और हरियाणा शक्तिपीठ
11. त्रिपुरमालिनी माता शक्तिपीठ- पंजाब के जालंधर में छावनी स्टेशन के पास माता का बायां स्तर गिरा था।
12. माता सावित्री का शक्तिपीठ, हरियाणा के कुरुक्षेत्र में माता के पैर की एड़ी गिरी थी। यहां माता सावित्री का शक्तिपीठ स्थित है।
13. मां भद्रकाली देवीकूप मंदिर, हरियाणा के कुरुक्षेत्र में माता का दायां टखना गिरा था। यहां मां भद्रकाली के स्वरूप की पूजा होती है।
महाराष्ट्र के शक्तिपीठ
14. माता के भ्रामरी स्वरूप का शक्तिपीठ, महाराष्ट्र के जनस्थान पर माता की ठोड़ी गिरी थी। उसके बाद यहां देवी के भ्रामरी स्वरूप की पूजा होने लगी।
15. मणिबंध शक्तिपीठ- अजमेर के पुष्कर में गायत्री पर्वत पर माता सती की दो पहुंचियां गिरी थीं। यहां माता के गायत्री स्वरूप की पूजा की जाती है।
16. मां अंबिका का शक्तिपीठ- राजस्थान के बिरात में माता अंबिका का मंदिर है। यहां माता सती के बाएं पैर की उंगलियां गिरी थीं।
17. माताबाढ़ी पर्वत शिखर शक्तिपीठ- त्रिपुरा में उदरपुर के राधाकिशोरपुर गांव में है। इस स्थान पर माता का दायां पैर गिरा था। यहां माता को देवी त्रिपुर सुंदरी कहलाती हैं।
गुजरात में शक्तिपीठ
18. अंबाजी मंदिर शक्तिपीठ- गुजरात में माता अम्बाजी का मंदिर है। मान्यता है कि यहां माता का हृदय गिरा था।
19. मां चंद्रभागा शक्तिपीठ, जूनागढ़, गुजरात के जूनागढ़ में देवी सती का आमाशय गिरा था। यहां माता को चंद्रभागा के नाम से जाना जाता है।
बंगाल में शक्तिपीठ
20. देवी कपालिनी का मंदिर- बंगाल में माता के सबसे अधिक शक्तिपीठ हैं। यहां पूर्व मेदिनीपुर जिले के तामलुक स्थित विभाष में देवी कपालिनी का मंदिर है। यहां माता की बायीं एड़ी गिरी थी।
21. माता देवी कुमारी शक्तिपीठ- बंगाल के हुगली में रत्नावली में माता सती का दायां कंधा गिरा था। इस मंदिर में माता को देवी कुमारी नाम से पुकारा जाता है।
22. माता विमला का शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद के किरीटकोण ग्राम में देवी सती का मुकुट गिरा था। यहां माता का शक्तिपीठ है और माता के विमला स्वरूप की पूजा की जाती है।
23. भ्रामरी देवी शक्तिपीठ- पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी के बोडा मंडल में सालबाढ़ी गांव में माता का बायां पैर गिरा था। इस स्थान पर माता के भ्रामरी देवी के रूप की पूजा की जाती है।
24. बहुला देवी शक्तिपीठ- वर्धमान जिले के केतुग्राम इलाके में माता सती का बायां हाथ गिरा था।
25. मंगल चंद्रिका माता शक्तिपीठ - वर्धमान जिले के उज्जनि में माता का शक्तिपीठ है। यहां माता की दायीं कलाई गिरी थी।
26. मां महिषमर्दिनी का शक्तिपीठ- पश्चिम बंगाल के वक्रेश्वर में देवी सती का भ्रूमध्य गिरा था। इस स्थान पर माता को महिषमर्दिनी कहा जाता है।
27. नलहाटी शक्तिपीठ- बीरभूम के नलहाटी में माता के पैर की हड्डी गिरी थी।
28. फुल्लारा देवी शक्तिपीठ- पश्चिम बंगाल के अट्टहास में माता सती के होंठ गिरे थे। यहां माता फुल्लारा देवी कहलाती हैं।
29. नंदीपुर शक्तिपीठ- पश्चिम बंगाल में माता सती का हार गिरा था। यहां मां नंदनी की पूजा की जाती है।
30. युगाधा शक्तिपीठ- वर्धमान जिले के ही क्षीरग्राम में माता के दायें हाथ का अंगूठा गिरा। इस स्थान पर माता का शक्तिपीठ बन गया, जहां उन्हें देवी जुगाड्या के नाम से पुकारा जाता है।
31. कलिका देवी शक्तिपीठ- मान्यताओं के मुताबिक, कालीघाट में माता के दाएं पैर की अंगूठा गिरा था। वे मां कालिका के नाम से यहां जानी जाती हैं।
32. कांची देवगर्भ शक्तिपीठ- पश्चिम बंगाल के कांची में देवी की अस्थि गिरी थीं। यहां माता देवगर्भ रूप में स्थापित हैं।